जी हां दोस्तो बदलने को तो मनरेगा का नाम बदल कर वीबीजी रामजी कर दिया, लेकिन यहां राम का नाम जुड़ने से भी कोई फर्क जमीनी स्तर पर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है, क्योंकि जिस खबर को लेकर मै आया हूं वो बताती है कि इस योजना में हो गया लाखों का घोटाला अधिकारी देखते रहे। जमीन पर नहीं हुआ काम, लेकिन निकाला गया भुगतान, अब ग्रामीणों ने किया खुलासा तो अधिकारियों में मच गया हड़कंप, पूरी खबर बताउंगा आपको। दोस्तों, मनरेगा योजना – जिसे प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी रोजगार गारंटी योजना माना जाता है –अब घोटाले की वजह से सुर्खियों में है। ऊधम सिंह नगर के ग्राम गुमसानी में ग्रामीणों ने बड़ा खुलासा किया है। बताया गया कि लाखों रुपए का भुगतान किया गया, लेकिन मजदूरों को काम तक नहीं दिया गया। स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से सरकारी धन का कथित दुरुपयोग हुआ। उधम सिंह नगर में मनरेगा का घोटाला आया सामने, मनरेगा के नाम पर लाखो का घपलेबाजी, काम हुआ ना पेमेंट निकाला गया। ग्रामीणों ने की शिकायत, शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं। अधिकारी लगे मामले की लीपा पोती में। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा, भारत में ग्रामीण बेरोजगारी को कम करने और लोगों को स्थायी रोजगार देने का सपना लिए चल रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है, यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए। लेकिन हाल ही में उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर ब्लॉक के ग्राम गुमसानी में इस योजना के साथ बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मनरेगा के तहत प्रतिदिन 100 से 150 मजदूरों से कार्य कराया जा रहा दिखाया गया, लेकिन असलियत में योजना का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा था। ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके नाम रजिस्टर में होने के बावजूद उन्हें कोई काम नहीं दिया गया। इसके बजाय, कार्य जेसीबी मशीन से करवा कर पैसे निकाले गए, जबकि स्थानीय मजदूर खाली बैठे रहे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि एक ही फोटो को कई बार अलग-अलग परियोजनाओं के लिए अपलोड कर, सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। उदाहरण के तौर पर एनएच-74 मुड़िया अनी और मदर इंडिया स्कूल के पास कार्य कराया गया, जिसकी वीडियो सबूत के रूप में मौजूद है। इससे स्पष्ट है कि इस योजना के तहत आने वाली सरकारी धनराशि का व्यापक स्तर पर गलत इस्तेमाल हो रहा था। मनरेगा योजना के तहत स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत भी सामने आई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से कार्य देने का अनुरोध किया, तो उन्हें नकार दिया गया। इस प्रकार, योजना का असली उद्देश्य—ग्रामीणों को रोजगार देना—पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। घोटाले की वजह से न केवल ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिला, बल्कि योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धनराशि का भ्रष्टाचार हुआ। यह मामला सरकारी प्रणाली और निगरानी तंत्र की भी एक बड़ी चुनौती को सामने लाता है। यदि समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसे घोटालों की रोकथाम हो सके। साथ ही यह मामला यह भी दर्शाता है कि योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुँचाना कितना महत्वपूर्ण है और इसके लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
यह खुलासा एक चेतावनी भी है कि विकास और रोजगार की योजनाओं के नाम पर होने वाला भ्रष्टाचार न केवल गरीब और मेहनतकश लोगों के अधिकारों को हरण करता है, बल्कि सरकार की योजनाओं पर लोगों का भरोसा भी कम करता है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई और जांच आवश्यक है ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक पहुँच सके। ऊधम सिंह नगर का यह मामला सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए उदाहरण है कि अगर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेंगे, तो योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी। ग्रामीणों की यह जागरूकता और खुलासा इस बात की उम्मीद जगाता है कि सही निगरानी और जांच से ऐसे घोटालों की पहचान की जा सकती है और दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है, लेकिन बात जिम्मेदार अधिकारियों की करूं तो वो भी सुनिए क्या कहते हैं अधिकारी, दोस्तो मनरेगा योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना है, लेकिन ग्राम गुमसानी का मामला दिखाता है कि वास्तविकता में कई जगह योजनाओं का दुरुपयोग हो रहा है। इससे न केवल सरकारी धन का नुकसान हो रहा है, बल्कि गरीब और मेहनतकश ग्रामीणों का हक भी छीना जा रहा है। अब आवश्यक है कि प्रशासन, सरकार और निगरानी एजेंसियां इस मामले की गंभीरता को समझें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए योजना को अपने वास्तविक उद्देश्य पर लागू करें।