पहाड़ों की शांत फिज़ा अचानक गरमा गई, जब पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले पर्यटक स्थल में एक मजार पर बड़ा खुलासा हुआ। मजार को लेकर ऐसा बवाल मचा कि बजरंग दल के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। टिहरी बाइपास इलाके में हालात तनावपूर्ण हो गए, धार्मिक विवाद ने तूल पकड़ लिया और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। क्या यह मामला यहीं थमेगा या आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है? बजरंग दल की चेतावनी के बाद पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हैं, लेकिन पूरी खबर मै आपको बताऊंगा आपने इस रिपोर्ट के जरिए। दोसतो बीते कुछ वक्त से आप देख रहे रहे होंगेकी अपनी देवभूमि में अवैध मजार, मस्जिदों की तादात कुछ ज्यादा ही निकल कर सामने आ रही है और खुलासे ऐसे की चौका रहे हैं, लेकिन अब आज बात मसूरी करता हूं। यहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक मजार को लेकर जमकर हंगामा किया। विवाद बढ़ा तो पुलिस-प्रशासन और मसूर नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बनी हालांकि, पुलिस-प्रशासन ने सूझबूझ से काम लिया और विवाद को खत्म कराने का प्रयास किया।
दरअसल, दोस्तो टिहरी बाइपास पर एक निजी स्कूली की भूमि पर बनी बाबा बुल्ले शाह की मजार और आसपास मौजूद अन्य मजारों को लेकर शुक्रवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब बजरंग दल के कार्यकर्ता मजार परिसर में पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर हंगामा किया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मसूरी प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पहले यहां केवल एक ही मजार थी, लेकिन समय के साथ अब दर्जनों मजारें बना दी गई हैं। आरोप है कि ये सब एक सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। दोस्तो मसूरी बजरंग दल के लोगों का कहना है कि यदि स्कूल प्रबंधन द्वारा मजार के लिए भूमि दी जा सकती है, तो उसी स्थान पर हनुमान मंदिर या माता के मंदिर के निर्माण की अनुमति भी दी जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो संगठन अपने स्तर से मजारों को हटाने की कार्रवाई करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। वहीं, मौके पर पहुंचे नगर पालिका कर अधीक्षक ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि
बाबा बुल्ले शाह की मजार किसी भी प्रकार की सरकारी या वन विभाग की भूमि पर नहीं है, बल्कि यह पिछले करीब 50 वर्षों से निजी संपत्ति पर स्थापित है। इतना ही नहीं दोस्तो कहां तो ये भई कहा कि कि संबंधित भूमि निजी स्कूल की है और स्कूल प्रबंधन की प्रत्येक बोर्ड बैठक में मजार के विषय पर चर्चा होती रही है उन्होंने यह भी कहा कि मजार के संबंध में जो भी तथ्य हैं, उनकी पूरी जानकारी शासन-प्रशासन को भेजी जाएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी भी व्यक्ति या संगठन को नहीं है और किसी भी तरह की अवैध कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोस्तो प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बाद बजरग दल के कार्यकर्ता शांत हुए। हालांकि, मामला अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। स्थानीय लोगों में भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक ओर धार्मिक आस्था का सवाल उठाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था और निजी संपत्ति के अधिकारों को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है, फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है, फिलहाल प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मसूरी में मजार को लेकर उठा यह विवाद अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। एक ओर धार्मिक भावनाओं का सवाल है, तो दूसरी ओर कानून व्यवस्था और निजी भूमि का मामला। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसे में अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि पहाड़ की शांति बनी रहे और किसी भी तरह का टकराव न हो।