CM धामी के खिलाफ बड़ी साजिश बेनकाब! | Uttarakhand News | CM Dhami Kashipur Mayor | Deepak Bali

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उत्तराखंड में सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक बड़े बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने साफ कहा, ‘मैं चुनाव हारा नहीं, मुझे हराया गया।’ इस बयान के बाद विरोधियों और मीडिया में सवालों का बवंडर मच गया है। क्या यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत भावनाओं का है, या इसके पीछे छुपी है कोई बड़ी साजिश? दोस्तो बीते दिनों बीजेपी में बड़ा घमासान चरम पर था, अभी खत्म हुआ है या नहीं मै नहीं जानता लेकिन वो गदरपुर वाली चिंगारी अब भी सुलग रही है। वो कैसे बताउंगा आपको अपनी इस वीडियो के जरिए क्योंकि बीजेपी नेताओं की इस खींचातान में सीएम धामी की कुर्सी पर तक बात पहुंच गई। सीएम धामी के खिलाफ क्या कोई साजिश हो रही थी या अभी भी चल रही है क्योंकि गदर वाला गदर तो आपको दिखा चुका हूं लेकिन अब जो चिंगारी सुलग रही है वो बताता हूं। दरअसल काशीपुर के मेयर दीपक बाली ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में पुष्कर सिंह धामी चुनाव नहीं हारे थे, बल्कि उन्हें हराया गया था। मेयर के इस बयान के बाद उत्तराखंड की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है। दोस्तो काशीपुर मेयर दीपक बाली ने सीएम धामी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा

2022 में मुख्यमंत्री धामी चुनाव हारे नहीं थे बल्कि उन्हें हराया गया था। साथ ही उन्होंने इशारों में कहा कि उस समय परिस्थितियां और राजनीतिक समीकरण ऐसे बने, जिनका खामियाजा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भुगतना पड़ा, लेकिन इसका ये मतलब नहीं था कि जनता का भरोसा उनसे खत्म हो गया था। जी हां दोस्तो क्या वाकई में सीएम धामी वो घायल सेना पती हैं। जो विपक्ष के तरकस से निकले तीर से नहीं बल्कि अपनों के षड़यंत्र का शिकार हुए थे, क्योंकि तब की बात को आज की सियासत में तो कुच ऐसे ही परोसा जा रहा है। एक तरफ बीजेपी की गुटबाजी खबर दुसरी तरफ माहौल अब सीएम धामी को घायल सेनापती बताया जा रहा है ये कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती। हां ये तो सच है कि धामी की हार के बाद भी प्रदेश की कमान धामी को दी गई। दोस्तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2022 के विधानसभा चुनावों में अपनी पारंपरिक सीट खटीमा से चुनाव हार गए थे। सीएम धामी को कांग्रेस के प्रत्याशी भुवन चंद्र कापड़ी ने 6,932 मतों के अंतर से हराया था। अपनी सीट हारने के बावजूद, BJP के केंद्रीय नेतृत्व ने उनके नेतृत्व में पार्टी को मिली जीत को देखते हुए उन पर फिर से भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया। दीपक बाली ने राज्य की राजनीति में चल रही खींचतान, आंतरिक असंतोष और कथित साजिशों पर खुलकर अपनी बात रखी। जहां पर कहा कि मौजूदा हालात में उन्हें लगा कि चुप्पी तोड़ना जरूरी है। क्योंकि, प्रदेश के विकास की रफ्तार को बाधित करने की कोशिश लगातार की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो मुख्यमंत्री पुषकर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों को रोकने के लिए छल, प्रपंच और षड्यंत्रों का सहारा ले रहा है। महापौर ने कहा कि तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

महापौर ने कहा कि पार्टी संगठन ने जिस भरोसे के साथ नेतृत्व सौंपा, उसी भरोसे को कमजोर करने के प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे कार्यकर्ताओं के मन में पीड़ा पैदा होती है। कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित और विशाल संगठन है, जहां नेतृत्व क्षमता और कार्यकुशलता के आधार पर जिम्मेदारियां दी जाती हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव हारे नहीं थे, बल्कि परिस्थितियों और भीतरखाने की गतिविधियों के कारण उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने परिवार की तरह एकजुट होकर उनके कंधों पर भरोसा रखा और प्रदेश की बागडोर सौंपी। महापौर के अनुसार यह भरोसा संगठन की परिपक्वता और दूरदृष्टि का प्रमाण था, लेकिन कुछ लोगों को यह निर्णय रास नहीं आया। ऐसे तत्वों ने स्वयं को पार्टी का हिस्सा मानने के बजाय विपक्ष की भूमिका में खड़ा कर लिया और लगातार आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू कर दिया। कहा कि दिन-रात काम करने वाले युवा मुख्यमंत्री को सीधा रोकने के बजाय साजिशों के जरिये बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, जो न केवल अनुचित है, बल्कि जनता के साथ भी विश्वासघात है। दोस्तो महापौर ने विधायक अरविंद पांडे के बयानों पर कड़ा रूख अपनाया। कहा कि अरविंद पांडे एक वरिष्ठ नेता हैं, उनकी वरिष्ठता और अनुभव पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन बार-बार ऐसे बयान देना जो भ्रम पैदा करें, स्वीकार्य नहीं है। किसान सुखवंत सिंह की दुखद मृत्यु का जिक्र करते हुए महापौर ने कहा कि यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है।तो दोस्तो, साफ नजर आ रहा है कि उत्तराखंड की सियासत में बीजेपी के भीतर गुटबाजी और अंदरखाने की खींचतान अभी भी जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर उठ रहे सवाल, उनके नेतृत्व और विकास कार्यों को रोकने की कोशिशें, और साथ ही पार्टी में छुपी असहमति—यह सब दर्शाता है कि राजनीतिक खेल कितनी गहरी और जटिल हो सकती है। हालांकि, पार्टी ने अपने भरोसे और अनुभव के आधार पर सीएम धामी को फिर से प्रदेश की बागडोर सौंपी, और यह दिखाता है कि संगठन क्षमता और दूरदृष्टि के साथ फैसले ले सकता है। ऐसे में जनता की नजरें अब इस पर हैं कि भविष्य में सियासी संतुलन और विकास की गति किस तरह आगे बढ़ती है।