Uttarakhand फर्जी निवास प्रमाण पत्रों का बड़ा खुलासा! Uttarakhand News | Haldwani | Fake Domicile

Spread the love

जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक बड़ा खुलासा! क्या सच में पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए स्थायी निवास प्रमाण पत्रों में धड़ल्ले से फर्जीवाड़ा हो रहा था? 50 से अधिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, लेकिन सवाल यह है—कौन थे इसके पीछे? और क्या अब प्रशासन इन फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त कर, नियमों की राह पर लौटाएगा? डीएम ललित मोहन रयाल की जांच और कुमाऊं कमिश्नर की पिछले साल की छापेमारी ने इस घोटाले की परतें खोल दी हैं। आइए जानते हैं, कैसे बन रहे थे ये कूटरचित दस्तावेज और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। दोस्तो ये सवाल मैने शुरुआत में किए उत्तराखंड में बड़ा खुलासा! क्या सच में हल्द्वानी में जारी किए गए स्थायी निवास प्रमाण पत्रों में धड़ल्ले से फर्जीवाड़ा हो रहा था? जांच में अब तक 50 और प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। सवाल यह है—कौन हैं इसके पीछे और क्या प्रशासन अब कड़ा कदम उठाएगा? डीएम की जांच ने इस घोटाले की परतें खोल दी हैं। आइए जानते हैं, कैसे बन रहे थे ये फर्जी दस्तावेज और आगे क्या कार्रवाई होने वाली है। दोस्तो नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर में फर्जी स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।डीएम द्वारा शुरू करवाई गई जांच पड़ताल में 50 और स्थाई निवास प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की पुष्टि हो चुकी है। डीएम ललित मोहन रयाल ने बताया कि यह सभी प्रमाण पत्र वैध दस्तावेजों के बगैर जारी किए गए हैं। जिसके बाद प्रशासन इन प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की तैयारी कर रहा है। डीएम ने बताया कि एसडीएम के हस्ताक्षर के बाद यह सारे प्रमाण पत्र निरस्त हो जाएंगे।

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने पिछले वर्ष वनभूलपुरा में एक कथित अरायजनवीस के यहां छापेमारी की थी। इस दौरान कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया था। दोस्तो मामले में तहसीलदार कुलदीप पांडेय की शिकायत पर पुलिस ने इस प्रकरण में अरायजनवीस, बिजली कर्मी समेत तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पिछले पांच वर्षों में बने स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए थे। हल्द्वानी तहसील में फर्जी तरीके से बनाए गए स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच ने एक गंभीर तस्वीर सामने रखी है। प्रशासन की जांच में अब तक बड़ी संख्या में प्रमाण पत्रों में अनियमितताएं पाई गई हैं, जिनमें गलत तथ्यों, अधूरे दस्तावेज़ों और नियमों के विरुद्ध जारी किए गए प्रमाण पत्र शामिल हैं। जांच के बाद ऐसे प्रमाण पत्र निरस्त किए जा रहे हैं और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहने की बात कही गई है। प्रशासन के अनुसार, बीते पाँच वर्षों के दौरान जारी किए गए प्रमाण पत्रों की गहन स्क्रूटनी की जा रही है। केवल हल्द्वानी तहसील में ही अब तक 115 स्थायी निवास प्रमाण पत्र रद्द किए जा चुके हैं, जबकि हाल ही में 25 और प्रमाण पत्र निरस्त किए गए हैं। जांच के दौरान लगभग दो हजार प्रमाण पत्रों की स्कैनिंग और दस्तावेज़ों का मिलान किया गया, जिसमें कई मामलों में नियमों की अनदेखी और गलत जानकारी के आधार पर प्रमाण पत्र जारी होने के प्रमाण मिले। यह कार्रवाई फिलहाल हल्द्वानी तक सीमित है, लेकिन सवाल इससे कहीं बड़ा है।

अगर एक तहसील में इतने मामलों का खुलासा हो सकता है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जो यह संकेत देते हैं कि समस्या किसी एक जगह तक सीमित नहीं है। स्थायी निवास प्रमाण पत्र का उपयोग शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में होता है। ऐसे में इसकी शुद्धता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। सिर्फ एक क्षेत्र में कार्रवाई कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पूरे जिले और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी इसी गंभीरता से जांच हो, ताकि फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लग सके और आम लोगों का भरोसा बना रहे। दोस्तो इससेपहले उत्तराखंड के जनपद नैनीताल में फर्जी दस्तावेज लगाकर बनाए गए स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की बड़े स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है. डेमोग्राफी चेंज को रोकने और अवैध तरीके से स्थायी निवास हासिल करने वालों पर नकेल कसने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर पिछले पांच वर्षों में जारी सभी प्रमाण पत्रों की पड़ताल की जा रही है. इसी क्रम में हल्द्वानी तहसील में हुई जांच में चौकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच टीम ने

हल्द्वानी तहसील में बीते पांच सालों में जारी 150–200 निवास प्रमाण पत्रों की गहन जांच की, जिसमें 48 प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए. इन सभी मामलों में लगे दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलने पर एसडीएम हल्द्वानी ने तुरंत प्रभाव से इन 48 स्थायी निवास प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया है। यहां दोस्तो प्रशासन का कहना है कि कई प्रमाण पत्रों में पहचान संबंधी दस्तावेज, निवास प्रमाण और जन्म स्थान से जुड़े रिकॉर्ड फर्जी पाए गए, जिसके आधार पर ये कार्रवाई की गई है। दोस्तो एसडीएम हल्द्वानी के अनुसार, टीम रोजाना दस्तावेजों की जांच कर रही है और लक्ष्य है कि अगले 10–15 दिनों में सभी प्रमाण पत्रों की जांच पूरी कर ली जाए। इस पूरे मामले में प्रशासन की नजर केवल फर्जी स्थायी निवास प्राप्त करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें तैयार कराने वाले अरायजनवीस (दस्तावेज लेखक) पर भी है। जिला प्रशासन ने कई अरायजनवीस को नोटिस जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दस्तावेज लेखकों के लाइसेंस संदिग्ध पाए गए हैं और अगर जांच में अनियमितता साबित होती है, तो उनके लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। फर्जी दस्तावेज से निवास बनाने वालों पर होगी कार्रवाई। प्रशासन का साफ संदेश है कि जिला चाहे किसी भी तहसील का हो, फर्जी दस्तावेज लगाकर स्थायी निवास बनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी. आने वाले दिनों में अन्य तहसीलों से भी ऐसे मामले सामने आने की संभावना है, और पूरे जनपद में जांच अभियान जारी रहेगा तो यह था हल्द्वानी का फर्जी निवास प्रमाण पत्रों का मामला। प्रशासन अब सख्त कदम उठाने जा रहा है और फर्जी दस्तावेजों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सवाल यह है—क्या ऐसे घोटाले पूरी तरह खत्म होंगे, या फिर नई जांचों में और चौंकाने वाले खुलासे सामने आएंगे? हम इस पर नजर बनाए रखेंगे और जैसे ही नई जानकारी मिलेगी, आपको तुरंत अपडेट करेंगे।