दोस्तो, बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे से जुड़ा मामला अब और भी गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जहां पूरे प्रकरण की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित की गई है, वहीं जांच शुरू होने से पहले ही नए सवाल उठने लगे हैं। दावे किए जा रहे हैं कि मंदिर परिसर की सीसीटीवी व्यवस्था और डीवीआर को लेकर भी कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। मै आपको बताने आया हूं कि कैसे चंदा चोरों के खिलाफ एक हाईलेवल जांच से पहले ही बड़े खेल की बू आ रही है। आरोप तो सीसीटीवी से छेड़छाड़ के लग रहे हैं और डीवीआर के बारे में जानकारी आ रही है। दोस्तो मै आपको बद्रीनाथ मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों के बाद सीसीटीवी के साथ खेल और नए खुलासे के बारे में बताउं उससे पहले आपको ये बताता हूं कि आखिर ऐसा खेल क्यं किया गया। दोस्तो बद्रीनाथ धाम चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच को हाईलेवल कमेटी गठित, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट। दोस्तो जैसी ही खबर आई उसके बाद तमाम चंदा चोरों में लगा कि शायद खलबली सी मच गई होगी, क्योंकि इससे पहले इंटरनल जांच होती थी और ऐसे कथित चोर बच निकलते थे। दोस्तो बद्रीनाथ मंदिर में चंदा चोरी पर मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर शासन की कार्रवाई, आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति जांच करेगी और समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप करेंगे।
दोस्तो सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और स्वास्थ्य महानिदेशालय के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। जांच के दौरान समिति आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा संबंधित व्यक्ति का सहयोग और परामर्श भी ले सकेगी और शासन को आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी देगी। दोस्तो गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि समिति शीघ्र ही बदरीनाथ मंदिर का स्थलीय निरीक्षण करेगी। जांच के दौरान संबंधित पक्षों, शिकायतकर्ताओं एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की गहन जांच के बाद निर्धारित 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी, लेकिन दोस्तो इस समिति के गठन के साथ एक खबर ये भी निकल कर आई है कि जिन सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया जा रहा था कि प्रमोद नोटियाल कैमरे में कैद हुए हैं। उन सीसीटीवी फुटेज को कई कर्मचारियों के फोन से डीलीट कराया गया है और हां जो भैवरव सेना के संदीप खत्री आरोप लगा रहे हैं कि चोरी हुई है, ये फुटेज उनके पास तक नहीं पहुंची। ये बात उन्होंने मुझे फोन पर बताई साथ ही ये भी कहा गया खत्री के द्वारा की उनके किसी निकतम साथी के पास वो फोटेज सुरक्षित हैं, जल्द उन तक भी पहुंच जाँएंगे, लेकिन दोस्तो ये तब की बात थी जब इस मामले में सरकार की दखलअंदजी नहीं हुई थी। तो क्या जैसे ही इधर समिति का गठन हुआ उधर सीसीटीवी फुटेज गायब हो गयी या कर दी गई और कहा तो यहां तक जा रहा है कि डीवीआर से छेड़छाड़ हो चुकी है। क्या ये सच है, दोस्तो अभी मै इन सारी खबरों की पुष्टी नहीं करता, लेकिन इतना समझना तो स्वभाविक है कि जब मामला बड़ा हो और चंदा चोरी की बात बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को लपेटे में ले रही हो तो कुछ भी हो सकता है।
दोस्तो गौर करने वाली बात है कि बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता से लिया है। इसी क्रम में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन दोस्तो बीकेटीसी को लेकर सवाल कई हैं और प्रमोद नोटिलाल को लेकर भी, क्योंकि कहा ये गया कि प्रमोद नोटियाल बद्रिविशाल के खजाने में हाथ डालता हुआ साफ-साफ सीसीटीवी में कैद हो गया। तो सवाल प्रमोद नोटियाल को दिए गए स्पेस का है, समय का है, क्योंकि दोस्तो 2 जुलाई को ये बात निकल कर आई थी कि प्रमोद नौटियाल ने चंदा चोरी किया तो फिर उसी दिन प्रमोदी नोटियाल को क्यों नहीं पकड़ा गया। अगर दोस्तो उसी दिन पकड़ गाय होता तो ये पता भी चल जाता कि कितना पैसा चोरी किया। अगर त्वरित एक्शन होता तो शायद वो पैसा भी मिल जाता और ये भी बता लग जाता कि नोटियाल पैसे को कहां ले कर गया और दोस्तो सबसे बड़ी बात जहां से सीसीटीवी आने की बात कहीं गई थी उस कमरे को क्यों नहीं सील कर दिया गाया ताकि कोई छेड़छाड़ या सबूत मिटाने की कोशिश ना करे, लेकिन यहां कुछ ऐसा नहीं हुआ। चंदा चोर के पास पूरा वक्त था, काम तमाम करना का सबूत का या फिर यू कहूं उसको समय दिया गया। दोस्तो मामला बड़ा है क्योंकि बद्रनाथ मंदिर के खजाने में डकैती का मामला है, तो फिर इस मामले को इतना लाइटली क्यों लिया गया। तो दोस्तो, बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे से जुड़े इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ी उम्मीद हाईलेवल जांच समिति से है। आखिर सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर और अन्य रिकॉर्ड से जुड़े जो सवाल उठ रहे हैं, उनका सच क्या है? क्या जांच में इन सभी पहलुओं की पड़ताल होगी? और क्या जिम्मेदारी तय होगी?दोस्तो फिलहाल इन दावों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। अब सबकी निगाहें इसी रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर इस पूरे मामले में सच्चाई क्या है और अगर किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।