Kashipur किसान केस में बड़ा UPDATE, कब और कैसे मिलेगा न्याय?| Uttarakhand News | Kashipur News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक किसान इसलिए अपनी जिंदगी को खत्म कर देता है, क्योंकि उसे कुछ लोग अपने झाल में फंसा कर उसके साथ करोड़ों की धोखाधड़ी करते हैं, लेकिन सवाल यहां धोखाधड़ी का तब छोटा लगने लगता है जब इंसाफ के झंडावरदार यानि पुलिस के आलाधिकारी उसे इंसाफ की जगह धुतकारते हैं। Farmer Sukhwant Death Case अब दोस्तो इस एक बड़ा अपडेड इस परे मामले सामने आ चुका है। उधर एसआईटी जांच की कमान अपने हाथ में ले ली है, अब तक कहां पहुंची किसान की लड़ाई। उत्तराखंड किसान आत्महत्या केस में अब बड़ा मोड़ आ गया है। मामले की जांच SIT को सौंप दी गई है।क्या SIT की जांच से बड़े राज सामने आएंगे और पीड़ित किसान परिवार को मिलेगा इंसाफ? दोस्तो काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया था। आज एसआईटी उधम सिंह नगर जिले के आईटीआई थाने में पहुंची और अपनी जांच शुरू की। केस डायरी और अन्य अभिलेखों का परीक्षण करते हुए एसआईटी ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया।

इसके अलावा एसआईटी की तरफ से नैनीताल जिले को काठगोदाम थाने से भी सुखवंत सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल फोन और अन्य अभिलेखीय साक्ष्यों को चेक करने की प्रक्रिया भी की जा रही है. साथ ही सुखवंत के मोबाइल फोन और घटना में प्रयोग Firearm को फोरेंसिक परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा जा रहा है। दरअसल, DGP दीपम सेठ के निर्देश पर किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय SIT का गठन किया गया है। इस टीम में एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे के अलावा- अजय गणपति, पुलिस अधीक्षक चंपावत, वंदना वर्मा, सीओ टनकपुर. निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट, जनपद चंपावत. उपनिरीक्षक मनीष खत्री, जनपद चंपावत, शामिल हैं। एसआईटी की टेक्निकल टीम ने सुखवंत सिंह द्वारा भेजे गए ई-मेल का विस्तृत परीक्षण शुरू कर दिया गया। ई-मेल में सुखवंत सिंह ने अलग-अलग स्थानीय लोगों, पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, साथ ही आयुक्त कुमाऊं मंडल दीपक रावत द्वारा की जा रही मजिस्ट्रेट जांच के अतिरिक्त मामले से संबंधित सभी मुकदमों की विवेचनात्मक की कार्रवाई आईजी एसटीएफ की अध्यक्षता में गठित एसआईटी द्वारा ही की जाएगी. डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि एसआईटी द्वारा प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों का निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन परीक्षण किया जा रहा है।

दोस्तो पूरा मामला आपको बता दूं कि दरअसल, उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर के रहने वाले किसान सुखवंत सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ घूमने के लिए नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र में गए थे। वहीं पर वो होटल में अपनी पत्नी और बेटे का साथ रुके थे. रविवार 11 जनवरी को जब सुखवंत सिंह की पत्नी और बेटे किसी काम से होटल से बाहर गए, तभी सुखवंत सिंह ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले सुखवंत सिंह ने एक वीडियो भी बनाया था। वीडियो में सुखवंत सिंह ने आत्महत्या की वजह बताई थी. सुखवंत सिंह ने आरोप लगाया था कि उसके साथ जमीन खरीदने के नाम पर करीब चार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई है। जब उसने इसकी शिकायत पुलिस से की थी तो पुलिस ने मामले की जांच कर उसे न्याय दिलाने के बचाए उल्टा उसे ही डराया धमकाया. इसी वजह से परेशान होकर वो आत्महत्या कर रहा है। सुखवंत सिंह ने कुछ लोगों के साथ-साथ कई पुलिस अधिकारियों के नाम भी लिए थे। सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद काशीपुर के आईआईटी थाना प्रभारी के अलावा एक एसआई को निलंबित किया है।

वहीं आईआईटी थाने के अंतर्गत आने वाली पौगा चौकी प्रभारी समेत 10 पुलिसकर्मियों को भई लाइन हाजिर किया गया था। कल 15 जनवरी को सभी निलंबित और लाइन हाजिर पुलिसकर्मियों को ट्रांसफर भी कुमाऊं से गढ़वाल रेंज में कर दिया गया है। इसके अलावा शासन की तरफ से इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच पहले ही कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को दी जा चुकी है। वहीं सुखवंत सिंह के भाई की तहरीर पर 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। दोस्तों, उधम सिंह नगर के काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में अब SIT की जांच शुरू हो चुकी है। एसआईटी सभी साक्ष्यों और रिकॉर्ड का गहन परीक्षण कर रही है, जिसमें मोबाइल फोन, ईमेल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्य शामिल हैंइस जांच के जरिए अब यह साफ होगा कि जमीन के विवाद और कथित धोखाधड़ी के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं, और पीड़ित परिवार को आखिरकार न्याय मिल पाएगा या नहीं। प्रशासन ने पहले ही मामले में कार्रवाई करते हुए कई पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर और निलंबित किया है।