उत्तराखंड के गदरपुर से बीजेपी विधायक अरविंद पांडे भूमि विवाद के घेरे में फंस गए हैं। क्या सच में उनके परिवार ने जमीन हड़पने की कोशिश की? और क्यों पहुंचे विधायक सीधे देहरादून, पुलिस मुख्यालय तक? आज मै आपको बताउंगा कि डीजीपी से उनकी मुलाकात का मकसद क्या है और क्यों उन्होंने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की है। क्या ये राजनीतिक साज़िश है या सच्चाई सामने आने का मौका? दोस्तो जमीन कब्जाने के मामले में विवादों में घिरे भाजपा के गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने पुलिस मुख्यालय देहरादून में डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने परिजनों पर जमीन कब्जाने के आरोपों पर हुए मुकदमे पर नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की है। अरविंद पांडे ने डीजीपी से की नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग। दोस्तो अरविंद पांडे ने कहा कि यह मुकदमा सच है या झूठ, इस पर मैंने बातचीत नहीं की, लेकिन दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया जाए, जिससे सच सबके सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेरे परिवार का कोई परिजन इसमें दोषी साबित होगा, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती है, तो मुकदमे के हिसाब से वह भूमाफिया हैं। भूमि विवाद में अरविंद पांडे परिवार पर दर्ज है मुकदमा।
दोस्तो बता दें कि 20 जनवरी को बाजपुर पुलिस ने फर्जी तरीके से जमीन हड़पने के आरोप में गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के भाई देवानंद पांडे सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें गांव बहादुरगंज निवासी संजय बंसल ने कोतवाली में तहरीर दी थी कि उनकी गांव मुंडिया पिस्तौर में जमीन है। उन्होंने आपसी रजामंदी से मझरा बक्श निवासी एक व्यक्ति को जमीन काम करने और देखभाल के लिए दी थी। गौर कीजिएगा, दोस्तो अरविंद पांडे परिवार को मिला है नोटिस 21 अगस्त 2025 को प्राधिकरण की ओर से उन्हें मौके पर बुलाया गया। उक्त भूमि पर नए निर्माण करने पर उन्हें एक कारण बताओ नोटिस दिया गया। बताया कि यह निर्माण अवैध है. उसे ध्वस्त करा दो। मौके पर मौजूद विधायक के भाई ने अन्य साथियों के साथ मुझे धमकी दी कि जमीन पर दोबारा दिखाई मत देना और फोटो स्टेट कागजात फेंक दिए। दोस्तो संजय बंसल ने कहा कि उनसे कहा गया कि कागज पढ़ लो जमीन हमारी है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने मिलकर फर्जी तरीके से किरायानामा बनाकर जमीन हड़पने की कोशिश की है और मुझे धमकी भी दी गई थी। इधर दोस्तो डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात करने का उद्देश्य है कि अपने परिजनों पर जमीन कब्जाने के आरोपों पर हुए मुकदमे पर नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की है। मैं डीजीपी से मिलकर मुकदमा खत्म कराने नहीं आया, बल्कि इस मामले की जांच होनी चाहिए़। यह मुझे ‘भू-माफिया’ साबित करने की एक सोची-समझी साजिश है। जब तक जांच पूरी नहीं होती है, तो तब तक मुकदमे के तहत मैं भूमाफिया हूं।
अरविंद पांडे, गदरपुर से बीजेपी के विधायक- दोस्तो इसके अलावा बीजेपी विधायक अरविंद पांडे ने साथ ही कहा है किे वह जांच से भागने वाले नहीं हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी हो। उन्होंने डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया जाए। दोस्तो यहां ये भी आपको बताना जरूरी है कि बीजेपी विधायक अरविंद पांडे पिछले लंबे समय से उत्तराखंड में सुर्ख़ियों में चल रहे हैं। पूर्व की भाजपा सरकार में शिक्षा और खेल मंत्री रहे अरविंद पांडे का वर्तमान धामी सरकार की शुरुआत से ही तल्खियों भरा सफ़र रहा। उन्होंने कई बार धामी सरकार के कार्यकाल में उनके गृह जनपद ऊधम सिंह नगर के कई मामलों पर खुलकर शासन प्रशासन की ख़िलाफ़त की, तो वहीं वर्तमान में वह उनके खिलाफ साजिशें होने का आरोप लगाते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के अंतर्कहल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हाल ही में जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उत्तराखंड दौरा था, तो उस समय प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद रावत सहित भाजपा के कई बड़े नेताओं ने अरविंद पांडे के साथ खड़े होने का संदेश दिया था। यह कहा जा रहा था कि अरविंद पांडे के विवाद को लेकर केंद्र तक बात पहुंच चुकी है और उत्तराखंड में लगातार धामी सरकार से नाराज़ मंत्री, विधायकों और वरिष्ठ भाजपा नेताओं को लेकर संगठन के अंदर खलबली मची हुई है। हालांकि त्रिवेंद्र रावत और अनिल बलूनी फिर अरविंद पांडे से मिलने नहीं गए थे। “तो फिलहाल मामला जांच के चरण में है और अरविंद पांडे ने खुद कहा है कि वह जांच से नहीं भागेंगे। डीजीपी से उनकी मुलाकात और नार्को-पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग ने इस विवाद को और चर्चा का विषय बना दिया है। अब सवाल यह है—भूमि विवाद का सच क्या होगा और क्या राजनीतिक रंग इसमें शामिल है? जैसे ही जांच की नई जानकारी सामने आएगी, हम आपको अपडेट देंगे