उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिल्क्यारा टनल में दिवाली के दिन तड़के 41 मजदूर मलबा ढहने से फंस गए थे। Tunnel Accident Rescue Operation मजदूरों ने यहां पर तिल-तिल कर 17 दिन काटे और आखिरकार बाहर आ गए। 17 दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में करोड़ों रुपए का खर्चा हुआ। बचाव अभियान पर हुआ खर्च कंपनी नवयुगा वहन करेगी। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लि. (एनएचआईडीसीएल) खर्च का ब्यौरा तैयार कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के निदेशक (प्रशासन और वित्त) अंशू मनीष खलको ने बताया हम जल्द ही रेस्क्यू ऑपरेशन में खर्च हुए पैसे का बिल निर्माण कंपनी को भेजेंगे।
17 दिन तक चले बचाव अभियान में अनेकों एजेंसियों ने बगैर रुके काम किया। इस ऑपरेशन में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। अभी तक खर्च हुए पैसे का टोटल हिसाब नहीं हो पाया है। सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय आगे से इस तरह के हादसों में जिम्मेदारी फिक्स करेगा। हालांकि मंत्रालय पहले ही सुरंग ढहने की जांच का आदेश दे चुका है। इस प्रोजेक्ट का ऑडिट भी किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एक बार तो समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। बाद में पूरे प्लान के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया। छोटे से पाइप के सहारे टनल में फंसे श्रमिकों को खाने का सामान, पानी गर्म करने की रॉड, गर्म कपड़े और अन्य जरूरी सामान के साथ ऑक्सिजन की व्यवस्था की गई। श्रमिकों के परिवारों से कैमरे के माध्यम से बात कराई जाती रही, बल्कि बाहर मौजूद साथी श्रमिक भी उनका उत्साहवर्धन करते रहे।