बाल-बाल बचे BJP सांसद जी हां दोस्तो पूरे उत्तराखंड में मौसन ने कहर बरपाया है ऐसे में एक तस्वीर ऐसी आई जब बीजेपी के सांसद ऊपर से पहाड़ टूटकर गिर गया, और कैसे बची सांसद की जान बताने के लिए आया हूं। Devprayag Landslide Anil Baluni दोस्तो जहां बदरीनाथ हाईवे पर एक भयानक लैंडस्लाइड ने सबकी सांसें थाम दीं। मलबे का ऐसा कहर टूटा कि कुछ सेकंड का फर्क होता, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस लैंडस्लाइड की चपेट में आने से बाल-बाल बचीं BJP की सांसद जान — जी हां, चंद मीटर की दूरी पर गिरा पहाड़ और टल गई एक बड़ी त्रासदी। उत्तराखंड में बारिश का कहर, अनिल बलूनी बाल-बाल बचे, बड़ी दुर्घटना टली। दगड़ियो देवभूमि इन दिनों कहर की चपेट में है। आसमान से बरसती बारिश अब जीवनदायिनी नहीं, जानलेवा बन चुकी है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। चमोली में कई मकानों को नुकसान पुहंचा कई लोग लापता हैं, बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन हो रहे हैं। पहाड़ दरक रहे हैं, सड़कें टूट रही हैं और आवाजाही पर संकट मंडरा रहा है। हालात ऐसे हैं कि अब आम लोग ही नहीं, जनप्रतिनिधि भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे। इसका इसकी तस्वीर गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी से जुड़ी एक घटना में देखने को मिला, जब एक बड़ा हादसा बाल-बाल टल गया।
दगड़ियो देखा आपने सांस रोक देने वाला मंजर सांसद और विधायक को पीछे भागना पड़ा। दोस्तो बता दूं कि गढ़वाल लोकसभा से सांसद अनिल बलूनी दिल्ली से अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आए थे, उनका मकसद था—भारी बारिश और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों की ज़मीनी हकीकत को समझना। इसी क्रम में वे देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी के साथ आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे थे। इससे पहले भी आपने उनकी कई तस्वीरें देखी होंगी हो पैदल-पैदल कई कई आपदा ग्रस्त क्षेत्रों का दौरान कर रहे थे, लेकिन जैसे ही उनका काफिला देवप्रयाग के पास एक संकरे पहाड़ी मार्ग से गुजर रहा था, तभी अचानक ऊपर से पूरी पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे सड़क पर आ गिरा। मलबे और बोल्डरों की रफ्तार इतनी तेज थी कि सांसद और विधायक को आनन-फानन में अपनी गाड़ी छोड़कर पीछे की ओर भागना पड़ा, और दोस्तो जो लोग वहीं पर मौजूद थे वो लोग भी बता रहे हैं कि हादसा महज चंद सेकंड की दूरी पर था, यदि काफिला कुछ मीटर और आगे बढ़ गया होता, तो शायद परिणाम भयावह होता। गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई, लेकिन सड़क पूरी तरह से मलबे में दब गई। घटना के बाद सांसद और विधायक को पैदल ही मलबे को पार करना पड़ा। वैसे तो सवाल पूरे उत्तराखंड के लिए है, कि भौगोलिक संरचना बेहद संवेदनशील है। पहाड़ी इलाके, तीव्र ढलान और मानसून की तीव्रता मिलकर भूस्खलन को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।
दगड़ियो आपको बता दूं, वैसे तो ज्यादा तर पहाड़ी लोग जानते हैं लेकिन फिर भी दोस्तो देवप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों में बीते कई दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिससे पहाड़ियां अत्यधिक कमजोर हो चुकी हैं। जहां-जहां सड़कें कटाव के नज़दीक हैं, वहां खतरा दोगुना हो गया है। पहाड़ों के दरकने का सिलसिला अब इतना आम हो चुका है कि स्थानीय लोग हर वक्त दहशत में रहते हैं और सफर कितना चौनौती पूर्ण हो गया है वो ये तस्वीर बता रही है जब सांसद अनिल बलूनी का काफिला भी टूटते पहाड़ की चपेट में आने से बालबाल बचा है, ये कह सकते हैं की बालबाल बची है जान अगर थोड़ा काखिला आगे होता तो क्या हो सकता था, सोच कर ही डर लगता है। दोस्तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशभर के अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारियों को अपने फोन ऑन रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल रिस्पॉन्स देने का आदेश जारी किया गया है। इधर दोस्तो मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए भी राहत की कोई उम्मीद नहीं जताई है। 18 सितंबर: पौड़ी, नैनीताल, देहरादून, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। 19-20 सितंबर: इन्हीं जिलों में बारिश का अलर्ट बरकरार रहेगा। कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, इसका मतलब साफ है — भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी घटनाएं अभी और देखने को मिल सकती हैं और अभी तो चमोली में पहाड़ से आए मलबे के नीचे न जाने कितने लोग होंगे, ये भी पता नहीं चल पाया है। धराली वाली घटना को घटे वक्त हो गया जो लोग लापता थे उनकी कोई जानकारी नहीं है।
दोस्तो बारिश के कारण गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। लोग रोजमर्रा की ज़रूरी चीज़ों के लिए भी परेशान हैं। बीमार लोगों को अस्पताल तक ले जाना भी मुश्किल हो गया है। बता दूं दगड़ियो सबसे ज़्यादा परेशानी ग्रामीण इलाकों में है, जहां न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही त्वरित राहत पहुंचाने वाली मशीनरी। उत्तराखंड में हर मानसून के साथ यही तस्वीर देखने को मिलती है — बारिश, भूस्खलन, टूटते रास्ते, और खतरे में जानें। अब तो सासंद अनिल बलूनी का काफिला भी आपदा की चपेट में आते आते बचा है, ऐसे में अब वक़्त आ गया है कि राज्य सरकार और केंद्र मिलकर इस चुनौती का स्थायी समाधान तलाशें हालाकिं अनिल बलूनी काफी एक्टिव रहते हैं दिल्ली में प्रदेश के मुद्दों को लेकर ऐसे में उत्तराखंड के कई खंड में टूटने को लेकर भी बात होनी चाहिए। जैसे हाईवे और पहाड़ी मार्गों पर रिटेनिंग वॉल्स का निर्माण, संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम आधारित अलर्ट सिस्टम सड़क निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का पालन ग्रामीण क्षेत्रों में सुदृढ़ और वैकल्पिक मार्गों का विकास। दोस्तो जब तक इन बिंदुओं पर गंभीरता से काम नहीं होता, तब तक हर बारिश, हर बादल और हर तूफान उत्तराखंड के लिए एक नई आफत बनकर आता रहेगा और अब तो सासद ने अपने आंखों के सामने उस मंजर को देखा, जो किसी के जहन में गहरा असर छोड़ने वाला है। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और विधायक विनोद कंडारी की ये घटना भले ही किसी बड़ी अनहोनी में नहीं बदली, लेकिन इसने एक बार फिर पहाड़ों में रहने वालों की नाजुक स्थिति को सबके सामने रख दिया है।