Dehradun विवाद से प्रमोशन तक Ajay Kumar Naudiyal की कहानी | Uttarakhand News

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जिन्हें पीटा गया वही बने निदेशक!” उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फैसला। जी हां दोस्तों, उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिस शिक्षा निदेशक के साथ हाल ही में भाजपा विधायक के साथ विवाद और कथित मारपीट का मामला सुर्खियों में रहा। अब उसी अधिकारी को मिला है प्रमोशन का तोहफा!अजय कुमार नौडियाल को शासन ने प्रारंभिक शिक्षा का स्थायी निदेशक नियुक्त कर बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। Ajay Kumar Naudiyal Promotion क्या यह सिर्फ नियमित पदोन्नति है या फिर हालिया घटनाक्रम के बाद लिया गया संतुलित फैसला?पूरी कहानी, विवाद से प्रमोशन तक देखिए इस खास रिपोर्ट में जी हां दोस्तो पहली तस्वीर उस हंगामे की है जहां कमरा बंद कर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ मार पीट की गई। नहीं यहां एक करेंक्शन है। वैसे जिसे हम जिस अजय नौडियाल को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक बता रहे हैं। दरअसल वो अस्थाई निदेशक के पद पर थे लेकिन अब खबर देखिए दोस्ोत उत्तराखंड की राजनीति और शिक्षा महकमे में इन दिनों चर्चा के केंद्र में रहे अजय कुमार नौडियाल को शासन ने प्रमोशन का तोहफा दिया है। लंबे समय से प्रारंभिक शिक्षा विभाग में प्रभारी निदेशक के रूप में कार्य कर रहे अजय कुमार नौडियाल को अब स्थायी रूप से निदेशक प्रारंभिक शिक्षा के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है। शासन स्तर पर जारी आदेश के बाद वे अब विधिवत रूप से विभाग की कमान संभालेंगे। दोस्तो

अजय कुमार नौडियाल काफी समय से अपर शिक्षा निदेशक के पद पर रहते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे. उनका प्रमोशन काफी समय से लंबित था और पदोन्नति चयन समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस पर अंतिम मुहर लगनी थी। अब दोस्तो उत्तराखंड राज्य शैक्षिक सेवा के निदेशक के रिक्त पद के सापेक्ष चयन समिति की संस्तुति के आधार पर शासन ने उन्हें पदोन्नत कर स्थायी नियुक्ति दे दी है. शिक्षा सचिव रविनाथ रमन की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियमानुसार पदोन्नति प्रक्रिया अपनाई गई और चयन समिति की अनुशंसा के बाद अजय कुमार को निदेशक प्रारंभिक शिक्षा नियुक्त किया गया है। दोस्तो अजय कुमार नौडियाल हाल ही में हुए एक विवाद के कारण प्रदेशभर में चर्चा में आ गए थे। रायपुर से बीजेपी विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों पर प्रभारी निदेशक के साथ मारपीट के आरोप लगे थे. इस घटना के वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें कथित तौर पर कार्यालय के भीतर धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार की तस्वीरें दिखाई दी थीं। दोस्तो घटना के बाद शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों में भारी रोष देखा गया। वहीं, प्रदेशभर में शिक्षकों ने विरोध जताया और कई स्थानों पर आंदोलन की चेतावनी दी गई। यह मामला केवल विभागीय विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी गूंजता रहा।

दोस्तो मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आखिरकार विधायक उमेश शर्मा काऊ को सार्वजनिक रूप से खेद जताना पड़ा। शिक्षक संगठनों ने इसे सम्मान व सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया और सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस पूरे घटनाक्रम ने शासन और प्रशासन को भी सख्त संदेश दिया कि अधिकारियों की गरिमा एवं सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। दोस्तो इसी बीच अब अजय कुमार नौडियाल के प्रमोशन का आदेश सामने आने से इस पूरे प्रकरण की चर्चा फिर से तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर इस निर्णय को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे शासन का संतुलित और नियमानुसार लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ इसे हालिया विवाद के बाद मरहम के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, दोस्तो स्थायी निदेशक के रूप में अजय कुमार नौडियाल के सामने कई चुनौतियां होंगी। प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की तैनाती, विद्यालयों की आधारभूत सुविधाएं और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों जैसे मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं। ऐसे में विभागीय समन्वय और प्रशासनिक सख्ती दोनों की आवश्यकता होगी।