Dehradun ‘Muslim University’ विवाद, खरीदारों पर संकट! | CM Dhami | Harish Rawat | Uttarakhand News

Spread the love

देहरादून के धौलास में जमीन का एक टुकड़ा और उस पर खड़ा हो गया सियासत का तूफान! 2004 में शैक्षणिक संस्थान के नाम पर ली गई 20 एकड़ जमीन अब जांच के घेरे में है। सवाल उठ रहे हैं—क्या यह सिर्फ जमीन का मामला है या इसके पीछे छुपा है कोई बड़ा राजनीतिक खेल? एक तरफ सरकार सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रहा है। और सबसे ज्यादा चिंता में हैं वे लोग, जिन्होंने अपनी जिंदगी की कमाई से यहां जमीन खरीदी। आखिर धौलास की इस जमीन का सच क्या है? और किस पर गिरेगी कार्रवाई की तलवार? देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।” दोस्तो राजधानी देहरादून के धौलास क्षेत्र में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए ली गई जमीन अब कई लोगों को बेची जा चुकी है जिसके बाद जिला प्रशासन अब इस विषय पर बड़ी कार्यवाही करता हुआ नजर आ रहा है। साथ इस जमीन को लेकर सियासत इतनी तेज है कि मुख्यमंत्री ने इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण वाली राजनीति का उदाहरण बता दिया है जिससे प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली तक की राजनीति में उबाल आ गया है। इसी जमीनी विवाद पर देखिए हमारी खास रिपोर्ट।

राजधानी देहरादून के समीप धौलास क्षेत्र में 2004 में डॉक्टर मोहम्मद असद मदनी के द्वारा शैक्षणिक संस्थान खोले जाने के नाम पर ली गई जमीन का विवाद और प्रदेश के राजनीति में नया रंग ले चुका है। 2004 से 2022 तक यह मामला कोर्ट में भी लंबित रहा लेकिन बाद में कोर्ट के निर्देश पर मदनी के शेखुल हिन्द एजुकेशनल ट्रस्ट ने इन जमीनी को आगे बेचने का काम किया। आज उस जमीन कर दर्जनों ने छोटे छोटे भू खंड खरीदने का काम किया है जिसके उनके पास पूरे प्रमाण है कि जमीन के दस्तावेज सही है। लेकिन इस पूरे विवाद में आप मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा कांग्रेस इस इस जमीन को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे है। इस जमीन पर एम डी डी ए ने भी अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की है। जबकि इस पूरे प्रकरण पर आप जिला प्रशासन ने अपनी पहली निगाह रखते हुए ठोस कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग तहसीलदार और फॉरेस्ट विभाग के साथ मिलकर इस जमीन की पूरी पैमाइश की है और एक विस्तृत रिपोर्ट बनाने का काम कार्य किया जा रहा है जिससे आगे की कार्यवाही सही हो सके। एडीएम के के मिश्रा ने कहा कि जो शिकायत मिली थी उन्हीं शिकायतों के आधार पर जिला प्रशासन अपनी कार्रवाई कर रहा है और अगर अवैध निर्माण या अवैध आवंटन हुआ है तो फिर इसके खिलाफ प्रशासन स्तर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि यह भूमि आवंटन 2004 में कांग्रेस सरकार के समय हुआ था और कांग्रेस की नीति हमेशा ही तुष्टीकरण की राजनीतिक वाली रही है। सीएम धामी ने कहा कि जमीन के इस विवाद पर जांच के आदेश दे दिये गये है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर नियम विरुद्ध कार्य हुआ है तो यह जमीन सरकार में निहित कर दी जाएगी। सरकार ओर प्रशासन तो अपनी कार्यवाही कर रहा है लेकिन सबसे ज्यादा परेशान वह लोग है जिन्होंने 2022 या उसके बाद यहां पर जमीनों को खरीदने का काम किया है। अब इन लोगों को अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी गई इन जमीनों के जाने का डर सताने लगा है क्योंकि बाजार में चर्चा इस बात की है कि यह मुस्लिम समाज के लोगों को जमीनें बेची जा रही है जिससे उनके खिलाफ कार्यवाही हो सकती है। 2004 के डॉ मदनी ने जमीन खरीदी और अब यह जमीन राजनीति का अड्डा बन चुकी है जिस पर कभी भी प्रशासन की बड़ी कार्यवाही की तलवार चल सकती है। प्रशासन की कार्रवाई होने में समय जरूर लगेगा लेकिन जिस आई एम ए को मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बनने से सुरक्षा का खतरा था वह जरूर टल रहा है।