‘हम मुस्लिम हैं’ कहते ही बिगड़ा माहौल?| Vikash Nagar | Uttarakhand News | Kashmiri Boy Attacked

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जी हां दोस्तो अपनी देवभूमि में एक मामूली कहासुनी ने डरावना मोड़ ले लिया वो आये थे कश्मीर से हां भारत में ही ना तो कश्मीर से आए युवकों में से एक ने कहा, ‘हम मुस्लिम हैं’ सुनते ही दुकानदार बौखलाया फिर जो हुआ, उसने पूरे इलाके में अफरातफरी मचा दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि विवाद जानलेवा हमले में बदल गया। विवाद कैसे बढ़ा और किस तरह संभाला गया मामला। दोस्तो बीते कुछ वक्त में ये दूसरा मामला है जहां दूसरे राज्य के युवकों के साथ अपने उत्तराखंड में बदसलूकी हुई, बरबरता हूई जिसने सवाल तमाम खड़े कर दिये। अब उत्तराखंड को दूसरी नजर से देखा जाने लगा है। सवाल किया जा रहा है कि क्या उत्तराखंड बंगाल बिहार बनने की राह पर है। दोस्तो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकासनगर इलाके से एक बेहद तनावपूर्ण मामला सामने आया है। यहां सामान खरीदने गए दो कश्मीरी भाइयों के साथ एक दुकानदार ने न केवल बदसलूकी की, बल्कि उन पर जानलेवा हमला भी कर दिया। आरोप है कि यह हमला उनकी धार्मिक और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर किया गया पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है। दोस्तो घटना बुधवार शाम विकासनगर के डाकपत्थर रोड की है।

जानकारी के अनुसार, 20 वर्षीय दानिश और उसका 17 वर्षीय नाबालिग छोटा भाई एक दुकान पर नमकीन और अन्य सामान खरीदने पहुंचे थे। पीड़ितों का आरोप है कि सामान देते वक्त दुकानदार संजय यादव ने उनसे उनका नाम और धर्म पूछा। जैसे ही उन्होंने बताया कि वे मुस्लिम हैं और कश्मीर के रहने वाले हैं, दुकानदार ने आपा खो दिया। दोस्तो आरोप है कि दुकानदार ने कश्मीर और हालिया आतंकी घटनाओं को लेकर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणियां शुरू कर दीं। बहस बढ़ने पर दुकानदार और उसके साथियों ने दोनों भाइयों पर हमला कर दिया। इस मारपीट में 17 वर्षीय नाबालिग के सिर पर गंभीर चोट आई है, जबकि दानिश का हाथ फ्रैक्चर होने की खबर भी। वैसे ये पहला मामला नहीं इससे पहले देशभर में उत्तराखंड की किरकिरी इस बात को लेकर हो चुकी है कि ऐंजल चकमा जो यहां पढने के लिए आया था उसके साथ भी ऐसी मारपीट की गई कि उसकी जान चली गई। वैसे इसवाले मामले में ये बताया गया कि ये दोनों भाई मूल रूप से कश्मीर के रहने वाले हैं और सर्दियों की छुट्टियों में अपने पिता से मिलने आए थे। उनके पिता पिछले कई सालों से हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब (विकासनगर से सटा इलाका) में किराए पर रहते हैं और आसपास के क्षेत्रों में शॉल बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

पीड़ितों के रिश्तेदार अब्दुल राशिद मीर ने बताया कि वे साल 2008 से यहां काम के सिलसिले में आ रहे हैं, लेकिन धर्म के नाम पर इस तरह का हमला पहली बार देखा है। दोस्तो हमले की खबर फैलते ही विकासनगर में तनाव फैल गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और समुदाय विशेष के सदस्य इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने घायल नाबालिग को गोद में उठाकर पुलिस चौकी का घेराव किया और नारेबाजी की। मुस्लिम सेवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में विशेष समुदाय और कश्मीरी फेरीवालों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है इधर दोस्तो एसएसपी देहरादून, अजय सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि आरोपी संजय यादव को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे में अन्य सख्त धाराएं जोड़ी जा रही हैं। विकासनगर कोतवाली पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई पुरानी रंजिश थी या यह अचानक उपजा विवाद था फिलहाल घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है।

जी हां दोस्तो यहां उसने कहा वो मुस्लिम है कश्मीरी है उसको मारा गया। इससे पहले पढ़ने वाले एक छात्र ने कहा था मैं भारतीय हूं, चीनी नहीं’ दोस्तो मरने के पहले एंजेल चकमा के ये आख़िरी शब्द थे। क्या इन शब्दों को भारत के लोग सुन पा रहे है और इसका अर्थ समझ पा रहे हैं? कुछ नेताओं ने वेदना और दुख के साथ कहा, एंजेल एक गर्वीला भारतीय था। ये बात सबने कही कि उत्तरपूर्व के लोगों को भारतीय नहीं माना जाता, उनके ख़िलाफ़ पूर्वाग्रह है जो इस हत्या के पीछे भी थे। इन प्रतिक्रियाओं से एक निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारतीयों को भारतीयों की हत्या नहीं करनी चाहिए। भारतीयों में बहुत विविधता है, लेकिन सब भारतीय हैं, इसलिए हमें एक दूसरे को नहीं मारना चाहिए। उत्तरपूर्व के लोगों ने भी इस हत्या के ख़िलाफ़ क्षोभ प्रदर्शित करते हुए कहा, हम भारतीय हैं, चीनी नहीं लेकिन अब वहीं बात कश्मीर से भी सुनाई पड़ कर रही है। दोसतो मामला केवल एक झड़प नहीं, बल्कि पूरे समाज और सुरक्षा के नजरिए से बेहद गंभीर है।पुलिस ने मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच जारी है।घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या उत्तराखंड में प्रवासी और विभिन्न समुदायों के साथ सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा रहा है। हमारी यही उम्मीद है कि राज्य प्रशासन समय रहते आवश्यक कदम उठाए और सभी नागरिक सुरक्षित और सम्मान के साथ रह सकें।”