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जी हां दोस्तो एक सर्दी का मौसम और इस मौसम में धधक रहे हैं अपने पहाड़ के जंगल, हैरानी तो यहां होती है, लेकिन इससे बड़ी हैरानी इस बात की फूलों की घाटी के जंगलों में लगा आग ने जहां हालात को बेकाबू कर दिया। वहीं अपना जिम्मेदार महकमा, वन महकमे के हाथ पांव तक फूल गए आग पर काबू पाने में कैसे और किससे लगाई गई मदद की गुहार बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। Massive fire breaks out in Valley of Flowers जी हां दोस्तो जितनी अहम है उससे कहीं ज्यादा सवालों को जन्म देने वाली है। फूलों की घाटी में भीषण आग ने हाहाकार मचा दिया! चार दिन की लगातार मशक्कत के बाद भी वन विभाग को आग पर काबू पाने में हार माननी पड़ी। मदद के लिए अब आईएएफ तक का दरवाजा खटखटाया गया है। सवाल ये उठता है कि आखिर इतनी सुंदर घाटी में लगी इस आग को नियंत्रित करने में क्यों आए अड़चनें और अब राहत की उम्मीद कहां तक? दोस्तो उत्तराखंड की सीमांत जनपद स्थित फूलों की घाटी रेंज 4 दिनों से जंगल आग से धधक रहे हैं। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के फूलों की घाटी रेंज में लगी आग को बुझाने के लिए वन विभाग की टीम ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है, लेकिन ऊंची चट्टानों के कारण आग बुझाने के काम में वनकर्मियों को मुश्किलें आ रही है और वन कर्मियों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद एयरफोर्स, एसडीआरफ और आईटीबीपी से मदद मांगी गई है।
दोस्तो, विकट परिस्थितियों को देखते हुए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अधिकारियों ने प्रशासन से मदद मांगी है। अधिकारियों ने प्रशासन से भारतीय वायु सेवा (IAF), एसडीरआरएफ (SDRF) और आईटीबीपी (ITBP) की मदद उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है, जिससे कि विश्व धरोहर फूलों की घाटी को आग से बचाया जा सके। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि चमोली के ज्योर्तिमठ में फूलों की घाटी रेंज में चार दिनों से जंगलों में आग लगी हुई है। तमाम कोशिशें के बाद भी रेंज के जंगलों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। वन विभाग की टीम भ्यूंडार की पुष्पगंगा को बल्ली लगाकर पार करने में सफल तो हुई लेकिन ऊंची चट्टानों के कारण आग बुझाने के लिए वनकर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.. दोस्तो रेंज के बफर जोन में चार दिनों से लगी आग लगातार फैल रही है। सबसे बड़ी दिक्कत इस स्थान पर पहुंचने की हो रही थी, जिसके लिए रविवार को पुष्पगंगा में लकड़ियों की बल्ली लगाकर वनकर्मी किसी तरह नदी पार करके जंगल की ओर गए। वहीं ज्योर्तिमठ के चांई थैंग के जंगलों में भी आग फैल रही है। अब आपको ये बताता हूं कि, क्यों लगी नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में आग? दोस्तो नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के प्रभागीय वन अधिकारी अभिमन्यु के मुताबिक आग बुझाने के लिए दोनों जगह वनकर्मियों की टीम में भेजी गई हैं। उन्होंने बताया कि आग चट्टानी हिस्सों में फैली है, जिसकी वजह से आग बुझाने में परेशानी हो रही है। आग लगने का कारण चट्टानों से गिरे पत्थरों के टकराने से निकली चिंगारियां को माना जा रहा है, क्योंकि शुष्क मौसम के चलते पहाड़ सूखे हैं तो वहीं जंगलों में भी लड़कियां और सूखी पत्तियां आग भड़काने में सहायक बन रही हैं। बारिश न होने के कारण जंगलों से नमी भी गायब है।
दोस्तो नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क क्षेत्र के तहत फूलों की घाटी रेंज में लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदी के बीच की पहाड़ियों के जंगल धधक रहे हैं। वन विभाग की दो टीमें मौके पर मौजूद हैं, लेकिन पहाड़ियों से गिरते पत्थर और पेड़ों के कारण उस क्षेत्र में जाना भी वन विभाग की टीमों के लिए खतरा बनी हुई है। तमाम कोशिशें के बावजूद वनकर्मियों के लिए आग बुझाना असंभव बना हुआ है। इसको देखते हुए अधिकारियों ने भारतीय वायु सेना, एसडीआरएफ और आईटीबीपी से मदद लेने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है इधर दोस्तो मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 10 दिनों तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में विश्व धरोहर फूलों की घाटी को बचाने के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत वन विभाग के अधिकारियों ने बताई है। आग के खतरे को लेकर वन विभाग की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। दोस्तो आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव को इस संबंध में तत्काल कार्यवाही के लिए अनुरोध किया है। जिलाधिकारी गौरव कुमार का इस संबंध में कहना है कि नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अधिकारियों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट चिंताजनक है। विषम परिस्थितियों में आग बुझाने में फायर कंट्रोल टीम द्वारा भी असमर्थता जताई गई है।फूलों की घाटी में लगी आग ने चार दिन तक वन विभाग की मेहनत को चुनौती दी। अब आईएएफ की मदद से आग को काबू में लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और सतर्क रहने की अपील की है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही घाटी में राहत का माहौल लौटेगा।