जी हां दोस्तो उत्तराखंड में बहुत कुछ बदल रहा है, ऐसा बदलाव आपने पिछले 10 सालों में कभी नहीं देखा होगा। अब वैज्ञानिकों में चिंतन शुरू हो चुका है कि आखिर क्या ऐसा रहा कि उत्तराखंड ऐसा रूठा मौसम कि सैलानियों की भीड़ भी इंतजार करती दिखाई दे रही है। Uttarakhand Weather Changes जी हां दोस्तो क्यों उत्तराखंड के कई पहाड़ी क्षेत्रों मौसम ने करवट नहीं ली, क्योंकि दोस्तो दिसंबर माह बीत गया, लेकिन उत्तराखंड में बारिश की एक बूंद नहीं पड़ी बल। पहाड़ भी बर्फबारी को तरसते रह गए, मैदानों में घने कोहरे और प्रदेशभर में सूखी ठंड से इंसानों से लेकर पेड़ पौधे और पशु सब बेहाल हैं। दौस्तो खबर पर गौर कीजिएगा जनवरी की शुरुआत में कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फाबारी की हल्की तस्वीर आप देख पा रहे होंगे, लेकिन नवंबर में भी प्रदेश में 98 फीसदी कम बारिश हुई थी। दिसंबर के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को आलम यह था कि राजधानी देहरादून में 12 घंटे तक एक्यूआई 300 के पार रहा। दोस्तो राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के अन्य इलाकों में 2016 के बाद ऐसी स्थिति बनी है, जब बारिश की एक बूंद ना गिरी हो। साल 2016 में भी दून एवं अन्य जिलों में एक एमएम भी बारिश नहीं की गई थी। मौसम विज्ञान केंद्र के डाटा के मुताबिक प्रदेश में दिसंबर माह में सामान्य बारिश 17.5 एमएम है, लेकिन एक एमएम बारिश भी नहीं हुई।
दून में दिसंबर में सामान्य बारिश 21 एमएम होनी चाहिए, लेकिन हुई नहीं। अब ऐसे में मौसम में आ रहा ये परिवर्तन क्या फर्क पड़ने वाला है, क्योकि इसका सीधा अगर हमारी और आपकी सेहत पर पड़ने वाला है। दोस्तो जहां पहाड़ी क्षेत्र बर्फबारी के लिए तरसे तो मैदानी इलाके बारिश के लिए तरसे। अब आपको बताता हूं कि सूखी ठंड ने कैसे बढाई परेशानी। दोस्तो डॉक्टर कहते हैं कि सूखी ठंड और बारिश न होने से हवा में प्रदूषण के कण जम गए हैं। खांसी, जुकाम, एलर्जी और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। कोल्ड डायरिया की समस्या भी देखने को मिल रही है। निमोनिया से बुजुर्ग और बच्चे परेशान हैं। अब आपको वो कारण बताता हूं जो पिछले दस साल में देखने को नहीं मिला तो अब क्यों दिखाई दे रहे हैं, मौसम वैज्ञानिकों रिसर्च क्या कहती है बल, प्रदेश में दिसंबर में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं, जिससे पहाड़ों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश होती है। इस बार विक्षोभ काफी कम आए और वह भी कमजोर रहे। तो यही कारण है कि 2025 के समापन में वो बर्फबारी और बारिश नहीं हुई जो होती रही है। दोस्तो इस बलते मौसम का खेती और बागवानी पर बड़ा असर पड़ा हुआ दिखाई देता है बारिश न होने का सबसे बुरा असर रबी की फसल और बागवानी पर पड़ रहा है। गेहूं, सरसों और दालों की बुआई प्रभावित हुई। नमी की कमी से फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ा और ज्यादा सिंचाई करनी पड़ी।
सेब और अन्य फलों के लिए चिलिंग आवर्स न मिलने से इनकी फसल प्रभावित होने की आशंका है, लेकिन इधर जनवरी आते ही मौसम में परिवर्तन देखने को मिला है मैदानी इलाकों में बारिश का इंतजार है लेकिन पहाड़ी इलाकों में बल्की बर्फबारी की शुरुआत हो गई। केदारनाथ धाम में शीतकाल की पहली बर्फबारी शुरू हो चुकी है। नीति घाटी में सीजन की पहली बराबरी, 2026 नए साल का पहला दिन और शानदार बर्फबारी होती हुई.लेकिन अभी भी निचले इलाकों में लोगों को बर्फबारी का है इंतजार है। दोस्तों, देखा जाए तो मौसम का ये अचानक बदलाव हमारी ज़िंदगी से जुड़ी हर चीज़ को प्रभावित कर रहा है। पहाड़ों में बर्फबारी की कमी से खेती और बागवानी को नुकसान हो रहा है, वहीं मैदानी इलाकों में सूखी ठंड और प्रदूषण ने सेहत पर बुरा असर डाला है, लेकिन उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जनवरी की शुरुआत में केदारनाथ और नीति घाटी में हुई बर्फबारी ने थोड़ा सुकून दिया है। अब हम सबको चाहिए कि इस मौसम के बदलाव को समझें और उसके अनुसार अपने खेतों, फसलों और सेहत का खास ख्याल रखें।