उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त सनसनी मच गई, अगर पेपर लीक की जांच CBI ने शुरू की, तो सिर्फ़ 12 घंटे में गिर जाएगी सरकार। क्या वाकई इतना बड़ा घोटाला है भर्ती परीक्षाओं में? कौन हैं वो चेहरे जो अब भी परदे के पीछे हैं? Uttarakhand Paper Leak Case और क्या CBI जांच की आहट से सत्ता की नींव हिलने वाली है? ये मै क्यों कह रहा हूं बताने के लिए आया हूं दोस्तो आपसे बस गुजारिश है कि आप इस बेहद ही संवदेनशील खबर पर जो खबर सीधे आपके भविष्य से जुड़ी है और आपके बच्चों से जिस खबर सीधा सरोकार है। तो सवाल अब सिर्फ़ पेपर लीक का नहीं रह गया है, सवाल अब ये है कि क्या सरकार किसी बड़े खुलासे से डर रही है?जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा सीधे-सीधे CBI जांच की बात करते हैं और कहते हैं कि “12 घंटे में सरकार गिर जाएगी,” तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है। क्या वाकई परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले सिर्फ दलाल या नकल माफिया हैंया फिर जांच की सुई अब धीरे-धीरे सत्ता के गलियारों की ओर बढ़ रही है?सरकार कहती है जांच निष्पक्ष है, SIT काम कर रही है। लेकिन विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है—CBI जांच से परहेज क्यों?क्या करण माहरा का दावा महज़ सियासी स्टंट है या वाकई सत्ता के अंदर कुछ बड़ा छुपा है। दोस्तो यूकेएसएसएससी पेपर लीक का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है।
अब इस मामले में विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा नेतृत्व में कांग्रेसियों ने देहरादून के गांधी पार्क में बेरोजगारों के समर्थन में धरना दिया। इस दौरान कांग्रेस ने सरकार से इस मामले की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग उठाई. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि धामी सरकार की मंशा पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच कराने की नहीं है। अगर इस मामले की सीबीआई जांच होती है तो 12 घंटे के भीतर सरकार गिर जाएगी। दोस्तो एक तरफ बेरोजगार संग सीबीआई जांच की मांग कर रहा है, तो वहीं दोसरी ओर कांग्रेस का साथ मिलता दिखा रहा है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामले की एसआईटी जांच करा रही है, लेकिन एसआईटी सरकार के इशारे पर काम करेगी। इसमे पकड़े जाने वाले लोगों के संबंध भाजपा के साथ रहे हैं. तब कैसे माना जा सकता है कि बेरोजगारों को न्याय मिलेगा। दो्सतो यहां कांग्रेस अध्यक्ष ने इतिहास को वर्तमान में बताया तो हाकम सिंह फिर आ खड़ा हुआ।
करन माहरा ने कहा कि इससे पहले भी कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह को पुलिस ने साल 2021 में पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार किया था। उसी तरह पटवारी, एई और जेई भर्ती परीक्षा के पेपर लीक करने पर मंगलौर के पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष को एसआईटी ने अरेस्ट किया था। अब की बार दोबारा भर्ती पेपर लीक मामले में हाकम सिंह गिरफ्तार हुआ है। इस बार फिर पेपर लीक के तार भाजपा की तरफ जुड़ रहे हैं। दोस्तो कांग्रेस का आरोपहै कि हरिद्वार में जिस संस्थान से पेपर लीक हुआ, वह संस्थान भी भाजपा नेता का ही है। तब कैसे माना जा सकता है कि एसआईटी निष्पक्षता से जांच कर पाएगी। माहरा ने कहा कि यहां तो हाकम सिंह को संरक्षण देने वाले मगरमच्छों के अलावा बड़ी मछली का नाम भी पेपर लीक में आ रहा है। उन्होंने बड़ा बयान दिया कि अगर इस मामले की हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में सीबीआई जांच हो गई, उस दिन बड़ी मछली का नाम आते ही 12 घंटे के भीतर भाजपा सरकार गिर जाएगी। दोस्तो 21 सितंबर रविवार को यूकेएसएसएससी ने स्नातक स्तरीय पदों की लिखित परीक्षा आयोजित कराई थी। ये परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई थी।
परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही प्रश्न पत्र के तीन पन्ने बाहर आते है, जिसको लेकर हड़कंप मच जाता है.मामले की जांच की गई तो सामने आया है कि प्रश्न पत्र के तीनों पन्ने हरिद्वार के एक एग्जाम सेंटर से लीक हुए थे। पुलिस की जांच में अभी तक जो सामने आया है, उसके अनुसार हरिद्वार के जिसे एग्जाम सेंटर से प्रश्न पत्र के तीनों पन्ने लीक हुए है, वहीं पर मुख्य आरोपी खालिद पेपर दे रहा था। खालिद ने ही प्रश्न पत्र के तीनों पन्नों की फोटो खींचकर अपनी बहन साबिया को भेजा था। साबिया ने वो फोटो प्रोफेसर सुमन चौहान को भेजे थे, यहीं से पूरा मामला खुला था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी खालिद और उनकी बहन साबिया को गिरफ्तार किया है तो सवाल अब भी वही है—क्या पेपर लीक की परतों के नीचे सत्ता की सच्चाई छिपी है?क्या CBI जांच से वो नाम सामने आएंगे, जिनका अभी तक कोई ज़िक्र तक नहीं हुआ?कांग्रेस दावा कर रही है कि सरकार की नींव ही हिल जाएगी। वहीं सरकार खुद को पाक-साफ बता रही है। लेकिन सच क्या है, ये तो तभी सामने आएगा जब जांच का दायरा राजनीतिक दायरों तक भी पहुंचेगा। फिलहाल, बेरोजगारों की निगाहें सरकार पर नही बल्कि इंसाफ पर टिकी हैं।