बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उपजे ताजा विवाद और कथित ‘वीआईपी’ एंगल को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) अपराध एवं कानून व्यवस्था, डॉ. वी. मुरुगेशन ने साफ तौर पर कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की गहन छानबीन में इस पूरे प्रकरण में किसी भी वीआईपी (VIP) की कोई भूमिका सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित ऑडियो क्लिप और दावों को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क है, और इस प्रकार की भ्रामक व झूठी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। एडीजी ने जोर देकर कहा कि पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों को दबोच लिया था और जांच को हर स्तर की अदालत ने सही ठहराया है।
पुलिस की ओर से केस की टाइमलाइन साझा करते हुए डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि इस संवेदनशील मामले में रिकॉर्ड समय के भीतर ठोस कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। महिला डीआईजी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने महज 88 दिनों में डिजिटल, वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों से लैस करीब 500 पन्नों की पुख्ता चार्जशीट अदालत में पेश की थी। इसी मजबूत पैरवी का नतीजा रहा कि 30 मई 2025 को कोटद्वार की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कारावास की कड़ी सजा सुनाई, और वे सभी वर्तमान में जेल में बंद हैं। गौरतलब है कि ताजा विवाद अंकिता के माता-पिता द्वारा दिल्ली के इंडिया गेट पर दिए गए धरने और हाल ही में हुई कुछ राजनीतिक नियुक्तियों के विरोध के बाद भड़का है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने जनता की भावनाओं के अनुरूप पहले ही मामले को सीबीआई (CBI) को संदर्भित करने की सिफारिश की है, जिसकी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।