उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर-माइक चल सकते हैं लेकिन इन शर्तों के साथ, हाईकोर्ट का निर्देश

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धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के सम्बन्ध में हाईकोर्ट नैनीताल के स्पष्ट आदेश के अनुपालन में थाना पथरी, थाना बहादराबाद, थाना भगवानपुर, थाना झबरेड़ा आदि जनपद पुलिस द्वारा अपने-अपने थाना क्षेत्रों में गोष्ठी आयोजित कर क्षेत्र के धर्मगुरुओं, मौलवियों एवं सम्मानित व्यक्तियों को जागरुक किया गया। इसी क्रम में SO पथरी रविन्द्र कुमार की अगुवाई में पथरी पुलिस ने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाने की कार्यवाही प्रारंभ की।

मन्दिर व मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर के शोर से बच्चों की पढ़ाई में पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को महसूस कर धनपुरा पथरी निवासी अमित कुमार व तालिब हसन ने हाईकोर्ट नैनीताल में याचिका दायर कर इन लाउडस्पीकर्स को हटाने की मांग की थी। याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद High Court नैनीताल ने राज्य सरकार को स्पष्ट शब्दों मे आदेशित किया।

  • कोई भी व्यक्ति अथवा धार्मिक संगठन बिना अनुमति मस्जिद, गुरुद्वारा अथवा मन्दिर में लाउडस्पीकर या PA System का प्रयोग नही करेगा।
  • साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की मंजूरी सिर्फ इसी शर्त पर दी जा सकती है कि इससे अन्य लोगों को कोई भी असुविधा न हो। इसके साथ ही नए धार्मिक स्थलों पर माइक और साउंड सिस्टम लगाने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।
  • सभी लोगों को अपनी धार्मिक विचारधारा के मुताबिक अपनी उपासना पद्धति को मानने की आजादी है। इसके लिए माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग भी किया जा सकता है। लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि इन साउंड सिस्टम की आवाज उस धार्मिक परिसर से बाहर न जा सके।
  • ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के तहत विशेष धार्मिक आयोजन हेतु अनुमति मिलने पर भी ध्वनि का स्तर 06:00 बजे से 22:00 बजे तक एवं 22:00 बजे से 06:00 बजे तक, अलग-अलग dB निर्धारित की गई है। इससे अधिक ध्वनि स्तर पाए जाने पर दोषी व्यक्ति अथवा संस्था से भारी जुर्माना वसूला जाएगा।