Ankita केस में FIR में हेरफेर! ‘VIP को CBI से बचा रहे’! | Ankita Bhandari Case | Uttarakhand News

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देवभूमि उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में एक — अंकिता हत्याकांड एक बार फिर सियासत और सिस्टम के कटघरे में है। अब सवाल सिर्फ़ इंसाफ का नहीं, FIR में हेरफेर, VIP को बचाने की कोशिश, और CBI जांच की दिशा पर उठ रहे गंभीर आरोपों का है। Ankita Murder Case Uttarakhand सीधे दिल्ली तक सवाल पहुंच चुके हैं—क्या सच को दबाया जा रहा है? क्या किसी रसूखदार को बचाने की कवायद हो रही है? और सबसे बड़ा सवाल आख़िर कहां तक पहुंची अंकिता केस की CBI जांच? आज इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे हर वो परत, हर वो दावा जिसने इस केस को एक बार फिर नई बहस और नए बवाल के केंद्र में ला दिया है। जी हां दोस्तो उत्तराखंड का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था, वो मामला एक बार फिर सियासी तूफ़ान के केंद्र में है। कांग्रेस ने सीधे धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं— कह रही है कि CBI जांच को भटकाने की कोशिश हो रही है, और जिन VIP चेहरों पर सवाल हैं, उन्हें बचाने का रास्ता बनाया जा रहा है। दिल्ली में पार्टी मुख्यालय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए।

अंकिता भंडारी पहला ऐसा केस है जहां आरोपी कह रहा है कि मेरा नार्को टेस्ट हो, लेकिन सरकार ही इसका विरोध कर रही है।साफ हो गया है- BJP सरकार जानती है कि अगर नार्को टेस्ट हुआ तो उनके नेताओं के नाम खुल सकते हैं। इसलिए उन लोगों ने नार्को टेस्ट नहीं करवाने दिया।BJP सरकार हर कदम पर अंकिता भंडारी केस को भटकाने का काम कर रही है। हालात ये है कि CM के ऐलान के बाद भी CBI जांच का सच सामने नहीं आ पा रहा है।इस केस में जो पुलिस अधिकारी SIT की प्रमुख थीं, वही CBI में बड़े पद पर हैं। ऐसे में उक्त अधिकारी का उस जोन में रहना उचित नहीं है, उन्हें वहां से हटाया जाना चाहिए। बेहद अफसोस है कि देश के गृह मंत्री हरिद्वार आए, लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। दोस्तो कांग्रेस का ये आरोप है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह के ऐलान को 15 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि अंकिता भंडारी मामले की जांच CBI को सौंपी गई है या नहीं। इस बारे में कोई भी नोटिफिकेशन अभी तक पब्लिक डोमेन में नहीं आया है। मैंने इस विषय पर देहरादून में भी कई प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल पूछे, लेकिन जवाब नहीं मिले हम ये भी जानना चाहते हैं कि अगर CBI को प्रतिवेदन भेजा गया है तो उसमें टर्म ऑफ रेफेरेंस क्या है? वो कहते हैं कि हमें ये जानकारी मिल रही है कि सरकार इस मामले में एक ‘Hypothetical situation’ यानी काल्पनिक स्थिति पर जांच करवाना चाहती है दोस्तो अब इस मामले में काल्पनिक स्थिति ये है कि क्या कोई VIP शामिल था! जबकि ये कोई कल्पना नहीं है, बल्कि ये सच है कि एक VIP को सर्विस देने से मना करने पर एक लड़की की जान गई हैजब हमने इस कल्पना पर सवाल उठाया तो सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए और अबतक CBI की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

वैसे दोस्तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा था कि वे अंकिता भंडारी मामले की दोबारा जांच करवा सकते हैं, बशर्ते अंकिता के माता-पिता इस मामले में अपनी राय दें, मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं अंकिता भंडारी के माता-पिता से जाकर मिलूंगा और पूछूंगा कि वे क्या चाहते हैं? अंकिता भंडारी के माता-पिता ने लिखित रूप में मांग की अंकिता के हत्यारों को सजा मिले- फांसी हो। इस केस में जो VIP शामिल है, उसे भी सजा मिले। जांच CBI के द्वारा, किसी सिटिंग जज की निगरानी में हो। दोस्तो इस मामले में कांग्रेस सरकार को घेर रही है वो कहती है कि इन मांगों के बाद CM ने ये ऐलान किया कि हम अंकिता भंडारी केस की CBI जांच करवाएंगे, लेकिन इस दौरान एक घटना घटी। ये स्वाभाविक था कि पीड़ित पक्ष यानी कि अंकिता के माता-पिता के प्रार्थना पत्र को आधार बनाकार CBI जांच करवाई जानी थी।लेकिन CBI जांच से पहले ही किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा FIR दर्ज किया गया और फिर उस FIR के आधार पर CBI जांच की बात की गई। इसलिए फिर ये संदेह पैदा हो चुका है कि उत्तराखंड की BJP सरकार और CM पुष्कर सिंह धामी अंकिता भंडारी हत्याकांड में कुछ तिकड़म भिड़ा रहे हैं। दोस्तों,अंकिता भंडारी केस में भले ही अदालत ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना दी हो,लेकिन सवाल अब भी ज़िंदा हैं।परिवार आज भी कह रहा है—पूरी सच्चाई सामने नहीं आई,और जिन चेहरों पर शक है, वो अब भी पर्दे के पीछे हैं।CBI जांच की दिशा, FIR का आधारऔर नार्को टेस्ट को लेकर उठे सवालइस केस को फिर से जनता की अदालत में ले आए हैं।अब देखना ये होगा कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या अंकिता के माता-पिता को वो न्याय और संतोष मिल पाएगा,जिसका वो तीन साल से इंतज़ार कर रहे हैं।