जी हां दोस्तो उत्तराखंड में आखिर आम जन के गुस्से का शिकार नेता विधायक होते रहे हैं, लेकिन आज जो हुआ उसने हैरान कर दिया, जहां एक तरफ उत्तराखंड़ के मंत्री जी स्वागत का इंतजार कर रहे थे, वहीं लोगों ने स्वागत किया तो वो भी काले झंडे लहराकर। कैसे वहां से निकले मंत्री जी का काफिला हैरत में पड़ गए अधिकारी, लेकिन ये विरोध हुआ क्यों, वो कौन से मंत्री हैं जिन्हें होना पड़ा लोगों के गुस्से का शिकार। बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो उत्तराखंड से आई इस बड़ी खबर, ने जहां एक तरफ बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। वहीं मंत्री जी भागने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं दिखा, जहां लोगों ने स्वागत करना था, वहां हुआ ऐसा कि मंत्री घिर गए..काले झंडे दिखाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चौंकाया। भारी विरोध और नारेबाजी के बीच माहौल हुआ तनावपूर्ण। उत्तरकाशी में मंत्री गणेश जोशी पर भारी विरोध, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद से बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी जब जनपद भ्रमण पर गंगोरी क्षेत्र में “सरकार जन-जन के द्वार” कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे, तो उनका स्वागत नहीं हुआ, बल्कि वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें चौंका दिया।
स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने मंत्री के काफिले के सामने काले झंडे दिखाए और भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला, इस विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा साफ देखा जा सकता था। उनका आरोप था कि भाजपा सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से दूर है और जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान करने में असफल रही है। खासकर ग्रामीण और कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं में गंभीर अनदेखी के चलते लोगों में असंतोष चरम पर है। काले झंडों के प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच माहौल इतना गर्म हो गया कि क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बन गया। दोस्तो मंत्री गणेश जोशी और स्थानीय विधायक का काफिला जब कार्यक्रम संपन्न होने के बाद वापस लौट रहा था, तब गंगोत्री नेशनल हाईवे पर पहले से ही कांग्रेस कार्यकर्ता काले झंडों और नारेबाजी के साथ मौजूद थे। उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि जनता की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका कहना था कि योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा और केवल दिखावे के लिए नकल और आडिटेड रिपोर्ट बनाई जा रही है लेकिन लोगों के सावल कई थे और गुस्सा सड़क पर दिखाई दे रहा था। हालांकि, दोस्तो इस भारी विरोध को देखते हुए मौके पर मौजूद प्रशासन और पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए किसी भी तरह के टकराव से बचाया।
काफिले को सुरक्षित रूप से आगे भेजा गया, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया कि जनता का गुस्सा बढ़ रहा है और लोग अब सीधे अपने नेता और सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं..विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी भी दी कि यदि सरकार ने जनता की समस्याओं की अनदेखी जारी रखी, तो भविष्य में यह विरोध और तेज होगा। स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब केवल नारेबाजी ही नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि किसानों, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों का समाधान किया जा सके। उत्तरकाशी की यह घटना यह दर्शाती है कि राज्य में जनता का क्रोध धीरे-धीरे संगठित हो रहा है। चुनावी मौसम नजदीक आते ही यह गुस्सा और भी मुखर हो सकता है। सरकार और अधिकारियों के लिए यह चेतावनी है कि अगर जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो विरोध प्रदर्शन केवल राजनीतिक विरोध में ही नहीं, बल्कि सामाजिक आक्रोश का रूप भी ले सकता है। विरोध सिर्फ काले झंडों और नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा। यह एक स्पष्ट संकेत है कि जनता अब सीधे अपने नेताओं और प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रही है। उत्तरकाशी की गलियों और सड़कों पर जनता की यह आवाज आने वाले समय में पूरे उत्तराखंड में राजनीतिक हलचल पैदा कर सकती है।दोस्तो यह घटना हमें याद दिलाती है कि सत्ता में बैठे नेताओं और अधिकारियों के लिए जनता की उम्मीदें सिर्फ योजनाओं के घोषणापत्र तक सीमित नहीं हैं। जनता चाहती है कि उनके मुद्दों को गंभीरता से सुना जाए, समाधान किया जाए और उनका भरोसा जीतने के लिए वास्तविक कदम उठाए जाएं। उत्तरकाशी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया विरोध सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि पूरे राज्य की जनता के आक्रोश और सचेत चेतावनी का प्रतीक है।