गणतंत्र दिवस बना हंगामा दिवस! | Uttarakhand News | Dharali | Uttarkashi

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देश गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा था, लेकिन उत्तरकाशी के धराली में आपदा पीड़ितों ने अपनी अनदेखी का गुस्सा दिखाया और सरकार को अलर्ट कर दिया। ग्रामीणों ने धरना देकर अपनी मांगें सामने रखीं, मांगा मुआवजा लेकिन प्रशासन ने दिया आश्वासन। गणतंत्र दिवस पर इस हंगामे ने सवाल खड़े कर दिए कि आपदा पीड़ितों के अधिकार और मुआवजे के मामले में सरकार कितनी गंभीर है। दोस्तो बड़ी बिडबंना है अपने देश की जहां एक तरफ हम हर साल आजादी का जश्न मानाते हैं। गण तंत्र होने पर गर्व मैहसूस करते हैं, वहीं इन बदलते सालों के बीच आगर कोई चीज नहीं बदलती तो वो है। आम इंसान की किस्मत, जिंदगी उसकी आर्थिकी ये उन लोगों के लिए कहा है मैने जिंहोंने हाल में आई उत्तराखंड आपदा में अपना सब कुछ गवां दिया और आज वो गणतंत्र को कुछ इस तरह से मनाने के लिए मजबूर हैं। जी हां अब क्या कहेंगे, कहने को को बहुत कह दिया जाता है, लेकिन करने के लिए क्या होता है बल आपके पास। अगर कोई इंसान मर रहा है उसको सख्त जरुरत है दवा कि अगर वो दवा मिलने की बजाय उसे सिर्फ आश्वासन दिया जाता रहे तो क्या वो बच पाएगा।

वैसे शायद उसकी जिंदगी तोड़ा देर से जाती लेकिन जब बार बार आश्वासन के बाद भी उसे दवा नहीं मिलती तो वो वक्त से पहले चला जाता है। इसलिए ये तस्वीर इस बात की गवाही दे रही है कि धराली आपदा के जख्म वैसे तो कभी भरेंगे नहीं, लेकिन जो राहत मिल सकती थी वो भी नहीं पा रही है। एक ओर जहां पूरा देश गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था। वहीं दूसरी तरफ धराली के आपदा पीड़ित ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। मांग ये कि उनको मुआवसा दिया जाय जब हंगामा खूब हुआ तो मौके पर एडीएम और एसडीएम पहुंची, लेकिन ग्रामीणों के साथ वार्ता विफल रही। इसके बाद डीएम प्रशांत आर्य ने आंदोलनकारियों को समझाया। डीएम प्रशांत आर्य ने ग्रामीणों को 15 दिनों तक का आश्ववासन दिया. डीएम प्रशांत आर्य के मिले आश्ववासन पर ग्रामीणों ने अपना धरना स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों का निस्तारण जल्द नहीं करेगी तो वह कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठेंगे। दोस्तो बता दूं की बड़ी संख्या में धराली गांव के ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां सभी लोग काली कमली धर्मशाला में एकत्र हुए। इसके बाद उन्होंने सभा आयोजित कर सरकार के खिलाफ रैली निकालने का निर्णय लिया, लेकिन उससे पहले प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और आंदोलनकारियों को समझा कर आंदोलन समप्ता करवाया। ग्रामीणों ने कहा कि, वह लंबे समय से सरकार से अपनी मांगों का निस्तारण कर रहे है, लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने मलबे में दबे प्राचीन पौराणिक कल्प केदार मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार के साथ ही आपदा पीड़ितों को राहत देने की बात मांग की है।

दोस्तो आंदोलनकारियों का कहना है कि आपदा में लोगों का घर तक तबाह हो चुका है. इसीलिए उन्हें तत्काल पुनर्वास नीति के कही बसाया जाए। वहीं धराली आपदा में जिन लोगों का होटल और अन्य व्यवसाय बर्बाद हुआ है, उन्हें उचित मुआवजा देने के साथ ही तत्काल भूमी भी मुहैया कराई जाए ताकि वो लोग जल्द से जल्द अपनी आजीविका अर्जित कर सकें। इसके साथ ही आपदा के मलबे में दबे टू व्हीलर और फोर व्हीलर वाहनों को समय से उचित मुआवजा मुहैया कराया जाए. आपदा में पूर्ण क्षतिग्रस्त दुकानदारों का पूर्ण मुआवजा दिया जाय. वहीं किरायेदारों को उनके नुकसान का भी मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा धराली के लघु व सीमांत किसानों का आपदा के मध्यनजर मानवीय आधार पर कृषि कर्ज माफी करने की मांग कर रहे, लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं किया गया तो वह जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ जाएंगे। वहीं, मौके पर डीएम प्रशांत आर्य ने ग्रामीणों को समझाकर 15 दिनों में मांगों का निस्तारण करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

दोस्त बीते साल पांच अगस्त 2025 उत्तरकाशी जिले के धराली में आपदा आई थी। इस आपदा में धराली बाजार पूरी तरह से तबाह हो गए थे। पूरा बाजार करीब तीन से चालीस फीट मबले के अंदर दब गया था। इस हादसे में 50 से ज्यादा लोग लापता हुए थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया गया था। वही आपदा पीड़ितों का कहना है कि अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है, जिसको लेकर 26 जनवरी को आपदा पीड़ितों ने उत्तरकाशी जिला मुख्यालय पर धरना दिया था, हालांकि बाद में डीएम के आश्वासन पर उन्होंने अपना धरना स्थगित कर दिया। धराली के आपदा पीड़ितों का धरना भले ही फिलहाल स्थगित हो गया हो, लेकिन सवाल आज भी जस के तस खड़े हैं। घर, दुकान, आजीविका और अपनों को खो चुके लोग अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं। डीएम द्वारा दिए गए 15 दिनों के भरोसे पर अब सरकार की परीक्षा है। अगर इस बार भी मांगें अधूरी रहीं, तो धराली की आवाज़ फिर सड़कों पर होगी — और इस बार आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा।