देवभूमि में ‘Save Auli’ आंदोलन,जनता खोला मोर्चा!| Save Auli| Uttarakhand News | Panchayat | Chamoli

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उत्तराखंड के पर्यटन का एक बड़ा सपना, औली का विंटर ड्रीम, आज खड़ा है गंभीर सवालों के बीच! करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए स्नो गन मशीनें जंग खा रही हैं, और पुराना रोपवे बंद होने से सैलानी और स्थानीय व्यवसाय दोनों बेहाल हैं। Winter Destination In Uttarakhand क्या औली का पर्यटन सच में अधर में लटका है? आइए, जानते हैं पूरे मामले की दिलचस्प और हैरान करने वाली सच्चाई। दोस्तों, उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म सेंटर औली आज संकट में है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए आर्टिफिशियल स्नो सिस्टम जर्जर पड़े हैं, और पुराना रोपवे सालों से बंद है। स्थानीय लोग और विपक्षी पार्टियां अब सीधे सवाल कर रहे हैं – आखिर जिम्मेदार कौन है और औली का पर्यटन कब लौटेगा अपने पुराने ग्लैमर में? प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई, मंत्रियों के पुतले फूंके और मांग की ठोस कार्रवाई की। आइए जानते हैं, औली की ये बर्फीली कहानी आखिर कितनी गहरी है। दोस्तो उत्तराखंड के चमोली जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली, कभी शीतकालीन खेलों और पर्वतीय पर्यटन का प्रतीक माना जाता था। यहां की बर्फ़ीली ढलानें और प्राकृतिक सुंदरता देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पर्यटकों को आकर्षित करती थीं। लेकिन आज औली की यह छवि संकट में है।

यूकेडी नेता बृजमोहन सिंह सजवाण ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया, जिसमें औली के आर्टिफिशियल स्नो सिस्टम की बदहाल स्थिति दिखाई गई। साल 2011 में इस परियोजना पर लगभग 6.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसमें एक उच्च हिमालयी कृत्रिम झील, 20 स्थायी और 4 मोबाइल स्नो गन मशीनें शामिल थीं। हालांकि, यूकेडी का कहना है कि परीक्षण के बाद इन मशीनों का कभी सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया और आज ये मशीनें पूरी तरह से गैर-कार्यशील हैं। दोस्तो औली की परेशानियां सिर्फ बर्फ़ की मशीनों तक सीमित नहीं हैं। इसका पुराना रोपवे जनवरी 2023 से सुरक्षा कारणों के चलते बंद पड़ा है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि रोपवे के पहले और दूसरे टावर की नींव में खामियां पाई गई थीं, जिससे यह असुरक्षित हो गया। अब ब्रिडकुल (BRIDCUL) नए रोपवे की योजना तैयार कर रहा है और डीपीआर लगभग पूरी हो चुकी है।लेकिन दोस्तो , स्थानीय लोगों और पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ आधा समाधान है। पर्यटन स्थलों पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद यदि बुनियादी ढांचा लंबे समय तक जर्जर पड़ा रहे, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को होता है। दोस्तो औली के हालातों से स्थानीय लोग बेहद नाराज़ हैं। हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के मंत्रियों के पुतले फूंके और पर्यटन मंत्री के खिलाफ अपनी नाराज़गी जताई।

इस प्रदर्शन में यूकेडी और कांग्रेस के समर्थकों ने भी हिस्सा लिया। उनका कहना है कि औली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल की हालत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार के नाम पर केवल समय व्यतीत हो रहा है। स्थानीय व्यवसायी और होटल संचालक बताते हैं कि पर्यटक कम आने लगे हैं, और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। स्कीइंग और बर्फ़ीली गतिविधियों के लिए औली की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। अब दोस्तो सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी परियोजनाओं के लिए पैसे खर्च करने के बाद मशीनें और रोपवे वर्षों तक क्यों बंद पड़े रहे। कौन जिम्मेदार है और औली का पर्यटन कब अपने पुराने ग्लैमर में लौटेगा? ब्रिडकुल प्रबंध निदेशक एनपी सिंह का कहना है कि नए रोपवे के लिए सर्वे और योजनाएं बनाई जा रही हैं। डीपीआर तैयार है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। वहीं, यूकेडी का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता और परियोजनाओं की अनियमित निगरानी ने औली की स्थिति को इस हद तक बिगाड़ दिया। कुल मिलाकर दोस्तो औली का संकट केवल बर्फ़ और रोपवे तक सीमित नहीं है। यह पर्यटन की जमीनी हकीकत, सरकारी जवाबदेही और लंबे समय तक निवेश की निगरानी पर भी सवाल उठाता है। अगर जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो उत्तराखंड का यह प्रमुख पर्यटन स्थल न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय रोजगार और राज्य की आर्थिक वृद्धि के लिए भी खतरा बन सकता है। औली का विंटर ड्रीम कब दोबारा जीवित होगा और इस बार क्या प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा या फिर सालों पुराने प्रोजेक्ट्स की तरह यह सपना भी खंडहर बन जाएगा?