उत्तराखंड की सियासत में इस वक्त हलचल तेज है, एक ऐसी मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है,जो हुई तो गुपचुप तरीके से, लेकिन अब उसके चर्चे खुलेआम हो रहे हैं।BJP के दो बड़े दिग्गज बंद कमरे में लंबी बातचीत, न कोई आधिकारिक बयान, न कोई तस्वीर, फिर आखिर क्या पक रहा है अंदरखाने?क्या उत्तराखंड में होने वाला है कोई बड़ा राजनीतिक खेल?क्या संगठन और सरकार में होने जा रहा है बड़ा बदलाव?या फिर 2027 की रणनीति पर शुरू हो चुकी है बड़ी बिसात?सीक्रेट मीटिंग से मचे इस सियासी भूचाल के पीछे की हर परत खुलेगी आज मेरी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो सियासत में हर बात का मतलब होता है और हर मुलाकात की वजह बड़ी होती है। अब कैसे दो दिग्गजों की हालिया मुलाकात चर्चा में है, और क्यों है, ये मै आपको बताउंगा। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसा पक रहा है, जिसकी आंच अब धीरे-धीरे बाहर आने लगी है। एक मुलाकात, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है।एक तस्वीर, जिसने सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है।और सवाल सिर्फ एक आखिर बीजेपी के अंदर चल क्या रहा है? दरअसल, दोस्तो बीजेपी के वरिष्ठ विधायक अरविंद पांडे से मिलने अचानक उनके घर पहुंचते हैं लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, यहां खबर ये निकल कर आई कि मुलाकात होती है, लंबी बातचीत होती है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कुछ भी साफ नहीं किया जाता। अब दोस्तो राजनीति में जब मुलाकातें खामोशी में होने लगें, तो चर्चाएं शोर मचाने लगती हैं ये समझ जाना चाहिए। इसलिए इन नई ताजा मुलाकात को लेकर कई तरह से कयास लगाए जा रहे हैं और अब दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।क्योंकि अरविंद पांडे वही नेता हैं जो कई बार अपनी ही सरकार और संगठन पर सवाल उठाते रहे हैं, चाहे अधिकारियों की कार्यशैली हो या फिर पार्टी के भीतर फैसलों का तरीका अरविंद पांडे खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे हैं।
दोस्तो ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अनिल बलूनी ने अचानक उनसे मुलाकात क्यों की?क्या यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट थी?या फिर बीजेपी के भीतर चल रही किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा? दोस्तो राजनीतिक जानकारों की मानें तो उत्तराखंड बीजेपी में सब कुछ उतना शांत नहीं है, जितना ऊपर से दिखाई देता है। दरअसल दोस्तो 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर जरूर हैं, लेकिन राजनीतिक जमीन तैयार करने का काम अभी से शुरू हो चुका है, दिल्ली से लेकर देहरादून तक, हर नेता अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। अनिल बलूनी को संगठन और दिल्ली दरबार दोनों में मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। वहीं अरविंद पांडे की तराई क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ है, ऐसे में इन दोनों नेताओं की मुलाकात ने कई नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी के भीतर गुटबाजी धीरे-धीरे सतह पर आने लगी है?क्या पार्टी के कुछ नेता खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं? या फिर चुनाव से पहले नाराज चेहरों को साधने की कोशिश की जा रही है? हालांकि दोस्तो बीजेपी की तरफ से इसे सामान्य मुलाकात बताया जा रहा है लेकिन राजनीति में कोई भी मुलाकात यूं ही नहीं होती, खासतौर पर तब, जब चुनावी रणनीतियों का दौर शुरू हो चुका हो। वैसे दोस्तो सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर कुछ बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में अनिल बलूनी और अरविंद पांडे की ये मुलाकात सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक बदलावों का संकेत भी मानी जा रही है। अब देखना होगा कि यह सियासी मुलाकात सिर्फ चाय पर चर्चा थी या फिर उत्तराखंड बीजेपी में किसी बड़े राजनीतिक अध्याय की शुरुआत।लेकिन इतना तय है कि इस “सीक्रेट मीटिंग” ने उत्तराखंड की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन दोस्तो यहां मै आपको ये भी याद दिला दूं कि एक बार तो ऐसी तस्वीर बनी थी कि बीजेपी के एक नहीं कई नेता अविंद पांडे से मुलाकात करने के लिए उडान भरने वाले थे याद है ना आपको उत्तराखंड बीजेपी के कद्दावर नेता वर्तमान विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि अतिक्रमण विवाद में फंसे हुए दिख रहे थे जहां बाजपुर के विचपुरी गांव की एक 68 वर्षीय महिला ने बीजेपी विधायक अरविंद पांडे पर भूमि लीज से जुड़े विवाद में गंभीर आरोप लगाए हैं।
महिला ने उपजिलाधिकारी को शिकायत सौंपकर लीज से अधिक भूमि पर अवैध कब्जे और धमकी देने का आरोप लगाया, तब का मामला है जब इस दौरान अरविंद पांडे के घर पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा होने से राजनीति गर्मा गई है। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण से अरविंद पांडे नाराज हैं, तो उनके समर्थकों में भी गुस्सा है। आज बीजेपी के दो सांसद और दो विधायकों के अरविंद पांडे से मिलने के कार्यक्रम के बाद उत्तराखंड के सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं थी। एक ओर प्रशासन की कार्रवाई हो रही है, तो वहीं अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे के बीच भाजपा के चार बड़े नेताओं की सरकार से नाराज चल रहे विधायक अरविंद पांडे से मुलाकात की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत अमित शाह के हरिद्वार दौरे से लौटते ही गढ़वाल लोकसभा सीट के सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार विधायक मदन कौशिक और डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल के साथ अरविंद पांडे से मिलने जा रहे हैं। दोस्तो तब भी ये सवाल था किभाजपा के यह चार बड़े नेता एक साथ अरविंद पांडे से मिलने क्यों जा रहे हैं, तो इसका एक जवाब यह भी हो सकता है कि पार्टी में लगातार बन रहे गतिरोध के बीच पार्टी के यहां बड़े नेता अरविंद पांडे को मनाने या फिर उनकी किसी तरह से पार्टी संगठन के साथ सुलह करने की दिशा में कदम हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक जानकार इसे धामी सरकार की घेराबंदी के रूप में भी देख रहे हैं, पिछले कुछ समय में त्रिवेंद्र रावत, अनिल बलूनी, धन सिंह रावत, के अलावा उत्तराखंड में भाजपा के अन्य कई बड़े नेताओं के सरकार के खिलाफ लामबंद होने की चर्चाएं सियासी गलियारों में आम हो चली हैं। ऐसे में अब यह गुट कुमाऊं के नाराज विधायकों को भी अपने साथ जोड़ते हुए क्या अपने इस गुट को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल रहा लेकिन अब तो अकेले बूलनी की मुलाकात पर सियासी संग्राम छिड़ता दिखाई दे रहा है।