दोस्तो क्या हरियाणा से आने वाले हुड़दंगी पर्यटक हमारे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीड़ है, क्या हरियाणा वालों की वजह से ही देवभूमि के तीर्थस्थलों में रहने वाले लोगों का पेट भर रहा है, वरना भूखे मर जाते लोग अगर ऐसा तो उत्तराखंड की सरकार को सोचना चाहिए। उत्तराखंड के पर्यटन विभाग को इन सवालों के जवाब देने चाहिए और हर्ष छिकारा जैसे यूट्यूबर को ये बताना चाहिए कि, अगर अराजगता फैलाकर भड़काऊ बयान देकर कोई उत्तराखंडियों को एक रोटी के लिए मोहताज बता रहा है तो उसपर भी जवाब देना बनता है, लेकिन दोस्तो सरकार या पर्यटन विभाग दे ना दे जवाब। उत्तराखंड के ब्लॉगर यूट्यूबर हर्ष छिकारे जैसे लोगो जवाब ही ही नहीं दे रहे हैं, वो उनकी औकात भी बता रहे है। दोस्तो आपके मन में भी ये सवाल अकसर ये आता होगा कि ये हरियाणा वाले पर्यटक ही उत्तराखंड में क्यों कूटे जाते हैं और क्या ये सिर्फ उत्तराखंड में पीटे जाते हैं या फिर दूसरे प्रदेशों में भी जब मै इस बात का आकलन करने बैठा की कहीं उत्तराखंडियों में तो कोई कमी नहीं है, तब मुझे ये पता चला कि ये हिमाचल में भी पीटे जाते हैं और इस बात पर मुहर लगा दी उत्तराखंड के एक भाई ने जी हां दोस्तो सुना आपने वैसे सटीक और सही जवाब है। ऐसे कई लोग हैं जो हर्ष छिकारा को जवाब दे रहे हैं।
दोस्तो लोग ये कहने लग गए है कि मत आओ उत्तराखंड हम देख लेंगे अपने आप उत्तरखंडी इतना कमजोर नहीं होता और इधर दोस्तो सवाल ये उठ रहा है कि क्या हरियाणा और दिल्ली नंबर की गाड़ियाँ उत्तराखण्ड में बैन होनी चाहिए? यह सवाल अब धीरे-धीरे लोगों के मन में उठने लगा है और इसकी वजह कोई नफरत नहीं, बल्कि कुछ लोगों की लगातार बढ़ती बदतमीज़ियाँ हैं। पहाड़ कोई “स्टंट जोन” नहीं है। यहाँ की सड़कें मैदानों जैसी नहीं होतीं। एक तरफ गहरी खाई, दूसरी तरफ पहाड़ ऊपर से बारिश, धुंध और सँकरे मोड़।लेकिन फिर भी कुछ लोग यहाँ आकर सड़क व्यवस्था की ऐसी-तैसी करके रख देते हैं।गलत दिशा में गाड़ी चलाना, ब्लाइंड मोड़ पर ओवरटेक करना, तेज डीजे बजाना, सड़क के बीचों-बीच गाड़ी रोककर हुक्का पीना अधनंगे होकर हुड़दंग करना बात-बात पर लठ निकाल लेना और फिर इसे “मौज-मस्ती” का नाम देना।यह पर्यटन नहीं यह बदतमीजी है। दोस्तो सबसे शर्मनाक बात यह है कि कुछ लोग “अतिथि देवो भव” का मतलब कमजोरी समझ बैठे हैं। उत्तराखण्ड के लोग शांत हैं, इसका मतलब यह नहीं कि यहाँ अराजकता फैलाने की छूट मिल गयी। पहाड़ के लोग लड़ाई-झगड़े से बचते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें डरपोक समझ लिया जाए।
पहाड़ की संस्कृति बहुत सभ्य रही है। यहाँ लोग धीमी आवाज़ में बात करते हैं। रास्ते में मिलने वाले अनजान व्यक्ति को भी नमस्ते करते हैं। यहाँ प्रकृति को माँ की तरह माना जाता है। लेकिन कुछ लोग यहाँ आकर ऐसा माहौल बना देते हैं मानो किसी खुले रोड शो में आए हों और सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि फिर लोगों के मन में पूरे राज्य या पूरी बिरादरी को लेकर गलत धारणा बनने लगती है। जबकि गलती कुछ लोगों की होती है, बदनामी पूरे समाज की हो जाती है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन भी ऐसे लोगों पर सख्ती करे। गलत ड्राइविंग, शराब पीकर हुड़दंग, सड़क जाम करके डीजे बजाना, मारपीट और पर्यटकों के नाम पर अराजकता फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो। क्योंकि पर्यटन का मतलब यह नहीं कि स्थानीय लोगों की शांति और सुरक्षा खत्म कर दी जाए और उन लोगों से भी एक बात, अगर सच में पहाड़ से प्यार है, तो पहाड़ की संस्कृति का सम्मान करना सीखो। यहाँ की शांति को शोर में मत बदलो। यहाँ की सड़कों को रेसिंग ट्रैक मत बनाओ। और “मस्ती” के नाम पर ऐसी हरकतें मत करो जिससे पूरे हरियाणा के अच्छे लोग भी बदनाम हों सम्मान दोगे तो उत्तराखण्ड आपको दिल से अपनाएगा, लेकिन अगर पहाड़ की शांति को भंग करोगे तो धीरे-धीरे लोगों के मन में हरियाणा वालों के लिए गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक है।