ऐसे हुआ Dehradun में ‘अर्जुन’ ह’त्याकांड! | CM Dhami | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो दोस्तो, देहरादून की तिब्बती मार्केट में एक ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया जिसने हर किसी को हिला कर रख दिया। सड़क पर बिखरे खून से सने शव, पास में गिरे अनानास के टुकड़े और कुछ मिनटों के मोलभाव के बाद चली गोलियां — यही था वो भयानक वक्त जब एक मासूम जीवन के साथ खिलवाड़ किया गया। Dehradun Arjun Sharma Murder Case आज हम आपको इस हत्याकांड की पूरी कहानी दिखाएंगे, जिसमें पुलिस की मेहनत और कार्रवाई भी सामने आई है। जी हां दोस्तो खून से सनी सड़क ने बयां अर्जुन का आखिरी पल बयां किया। हमलावर काफी देर से दुकान पर खड़े थे। वह अर्जुन के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे। अर्जुन जैसे ही टेनिस खेलकर बाहर निकले हमलावर सक्रिय हो गए। अर्जुन ने पहले अपनी कार में टेनिस किट रखी। इसके बाद वे फल लेने गए। वे फल लेकर लौट रहे थे तभी हमलावर आए और गोली मार दी पूरी वीडिओ जरूर देखिएगा। दोस्तो यहां मै आपको कुछ तस्वीरें नहीं दिखा पा रहा हूं क्योंकि यूट्यूब वालों ने हाथ बांध रखे हैं लेकिन देहरादून के अर्जुन हत्याकांड की पूरी कहानी को अप सुनेंगे तो दंग रह जाएंग।

दोस्तो अर्जुन का हत्या तिब्बती मार्केट के गेट नंबर सात और आठ के बीच हुई। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम के पहुंचकर जांच पूरी करने तक कटे हुए अनानास के टुकड़े खून से सने हुए पड़े थे। अर्जुन को जब गोली मारी गई उससे ठीक पहले ही उन्होंने अनानास खरीदे थे। उन्हें अनानास बेचने वाले फल विक्रेता ने बताया कि फल खरीदते वक्त अर्जुन ने मोलभाव भी किया था। कह रहे थे कि सही दाम लगा लो तुमसे रोज फल खरीदूंगा। अर्जुन हत्याकांड की कहानी बलिदानी कोटे से मिली उनके परिवार की गैस एजेंसी बताई जा रही है। इस कहानी में कई और किरदार हैं लेकिन केंद्र में डॉक्टर अजय खन्ना का नाम आ रहा है। बताया जा रहा है कि शहर के इस नामी डॉक्टर ने अर्जुन की मां के कहने पर एजेंसी का लोन चुकाया था। अब अर्जुन की मां इस एजेंसी को बेचना चाह रही थी जबकि, अर्जुन इसके पक्ष में नहीं था। चूंकि डॉक्टर के करोड़ों रुपये इस लोन चुकाने में खर्च हो गए तो अब वह भी रकम को वापस चाह रहा था। इसी उलझन भरी कहानी में किसी एक किरदार ने भाड़े के शूटर बुलाकर अर्जुन का काम तमाम कर दिया। अमरदीप गैस एजेंसी अर्जुन के पिता के बलिदान होने के बाद कोटे से परिवार को मिली थी। यह एजेंसी उनकी मां के नाम पर थी। कारोबार को चलाने के लिए बैंक से लोन भी चल रहा था।

इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि अर्जुन की मां ने इस संपत्ति को बैंक में बंधक रख कुछ और लोन भी उठाया था। अब वह इस संपत्ति को बेचना चाह रही थी। इस बात की भनक अर्जुन को लग गई। दोस्तो अर्जुन नहीं चाहता था कि यह एजेंसी बेची जाए। इस पर उसने बैंक को शिकायत कर दी। बैंक ने जब पाया कि बंधक संपत्ति को बेचने का प्रयास हो रहा है तो उसने आपत्ति लगा दी। यहीं से एंट्री होती है डॉक्टर साहब की। अर्जुन की मां के कहने पर डॉक्टर अजय खन्ना और उनके साथियों ने इस संपत्ति को बंधक कर लिया गया लोन चुका दिया। अब बैंक की तरफ से यह संपत्ति बिल्कुल मुक्त हो गई…दोस्तो, देहरादून की तिब्बती मार्केट हत्याकांड ने साफ कर दिया कि अपराध कभी भी सार्वजनिक जगहों पर बेखौफ नहीं रह सकता। अर्जुन की हत्या की पूरी कहानी में पैसे, संपत्ति और चंद मिनटों के मोलभाव के बीच कितनी बड़ी साजिश थी, यह पुलिस की मेहनत और समय रहते की गई कार्रवाई से ही सामने आई। दो बदमाशों की गिरफ्तारी और उनके कब्जे से बरामद तमंचों, स्कूटी और पूछताछ ने पूरे मामले का रहस्य खोल दिया। पुलिस अब गहन जांच और पूछताछ के जरिए सभी पहलुओं को उजागर कर रही है। यही सतर्कता और जवाबदेही उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को मज़बूत बनाए रखेगी। मैं यही कहूँगा कि ऐसे मामलों में हमेशा पुलिस और प्रशासन का साथ दें और सुरक्षित रहें।