उत्तराखंड के धौलास इलाके में भूमि विवाद ने फिर सियासत में हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहा है—यह मुद्दा अचानक क्यों सुर्खियों में आया? क्या ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकल गया है? और इस विवाद का आगामी विधानसभा चुनावों से क्या कनेक्शन है? आज हम आपको बताएंगे कि कैसे 20 एकड़ जमीन का मामला बीजेपी और कांग्रेस के बीच नए राजनीतिक युद्ध का केंद्र बन गया है। ये मुद्दा उठाना कितना जरूरी है अगर पहुंत जरूरी है तो फिर अब तक कांग्रेस और बीजेपी दोनों की सरकारों ने क्यों कार्रवाई नहीं की क्या इस मुद्दे को चुनाव के लिए बचाकर रखा गया था। दोस्तो उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी थोड़ा दूर है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में हावी रहा मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मुद्दा एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया है। प्रेमनगर के धौलास में जमीनों के कथित खुर्द-बुर्द होने से जुड़े मामले को बीजेपी मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जोड़कर आरोप लगा रही है। वहीं, कांग्रेस भी इस मामले को बीजेपी की तुष्टिकरण का एक और पैंतरा बता रही है। दरअसल, दोसतो देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के नजदीक ही करीब 20 एकड़ लैंड का ट्रांसफर कथित तौर पर इस्लामिक शिक्षा संस्थान स्थापित करने के लिए किए जाने के इस मामले को लेकर विकासनगर के उपजिलाधिकारी विनोद कुमार ने शुरुआती जांच की है। जांच के अनुसार, IMA के पास धौलास क्षेत्र में स्थित इस 20 एकड़ जमीन को अब छोटे-छोटे भूखंडों में आवासीय उद्देश्यों के लिए बेचा जा रहा है, जिससे सैन्य प्रशिक्षण संस्थान की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।
इधर धौलास जमीन विवाद को लेकर बीजेपी विधायक विनोद चमोली ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब स्पष्ट हो गया है कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव इस जमीन मामले से किस तरह जुड़ा हुआ था। विधायक चमोली ने इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत को सीधे घेरते हुए आरोप लगाया कि पूरा मामला उनके कार्यकाल से जुड़ा है। “यह बड़ा सवाल है कि यह जमीन किस मकसद के लिए आवंटित की गई थी, यह अपने आप में ज्यादा गंभीर है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सहसपुर विधानसभा में जिस मुस्लिम यूनिवर्सिटी के निर्माण को लेकर विषय उठा था। जिसको बार-बार हरीश रावत नकार रहे थे, आज उस षडयंत्र का पर्दाफाश हो गया है। बीजेपी विधायक विनोद चमोली ने कहा कि जब साल 2022 में ये विषय उठा तो यह सवाल सबके जहन में था कि आखिरकार मुस्लिम यूनिवर्सिटी का सवाल आया कहां से? लेकिन आज जब यह प्रकरण सामने आया तो समझ में आ रहा है कि पिछली विधानसभा चुनाव में जिस मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बात की गई थी, उसका आधार यही जमीन थी। दोस्तो पछवादून के धौलास-हरियावाला क्षेत्र में एक चैरिटेबल ट्रस्ट की 20 एकड़ कृषि भूमि को अवैध रूप से समुदाय विशेष के लोगों को बेचने की मामले में तूल पकड़ लिया है। बीजेपी विधायक विनोद चमोली ने इस भूमि को मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की मंशा रखने वालों की साजिश का हिस्सा बताया है तो वहीं अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने भाजपा पर पलटवार किया है । उन्होंने कहा कि भाजपा के पास काम नहीं है ये सब भाजपा के टोटके हैं।
भाजपा का ये मुस्लिम यूनिवर्सिटी वाला कारतूस अब फुस्स हो चुका है ओर अब फुके हुए कारतूस को बार-बार चलाओगे तो जनता के गले के नीचे नहीं उतरने वाला है। दोस्तो हरक सिंह रावत कहते हैं कि जनता देख रही है कि मच्छी बाजार में किसी लड़की की हत्या हुई वह हिंदू थी और मारने वाला भी हिंदू, ऋषिकेश में मरने वाली भी हिंदू और मारने वाला भी हिंदू , भाजपा महिला मोर्चा की महिला ने अपनी 14 साल की बेटी के साथ बलात्कार करवाया वो हिंदू , तब कहां गया था हिंदूवाद । हमारी बहू बेटियों के लिए आज देहरादून असुरक्षित शहर है तब कहां गया सनातन वाद हीं, बीजेपी की ओर से उठाए जा रहे मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भी पलटवार किया है। कांग्रेस का कहना है कि यह बीजेपी का टोटका है और इसके अलावा भाजपा के पास और कोई मुद्दा नहीं है। दोस्तो धौलास में कथित तौर पर साल 2004 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से एक धार्मिक संस्था को हुए भूमि आवंटन को बीजेपी मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जोड़कर आरोप लगा रही है। बीजेपी का कहना है कि साल 2004 में नारायण दत्त तिवारी की कांग्रेस सरकार में यह जमीन इस्लामिक एजुकेशन इंस्टीट्यूट के लिए दी गई थी, उसके बाद से लगातार वहां पर प्रयास हो रहे थे। जबकि, भारतीय सैन्य अकादमी वहां नजदीक में मौजूद है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न था। इस पर लगातार विरोध के बावजूद भी कांग्रेस ने जमीन वहां अलॉट की। दोस्तो, धौलास जमीन विवाद ने फिर उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक ओर बीजेपी कह रही है कि यह मामला मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की साजिश से जुड़ा है, तो वहीं कांग्रेस इसे सिर्फ राजनीतिक पैंतरेबाज़ी बता रही है। सवाल यह उठता है—क्या इस विवाद का असर अगले विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा? और क्या आम जनता इन सियासी खेलों में फँसती रहेगी या वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देगी? देहरादून के धौलास-हरियावाला इलाके की ये जमीन और इससे जुड़े आरोप-प्रत्यारोप अब जनता और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। देखना यह है कि आगे आने वाले दिनों में किस पक्ष की बात ज्यादा दमदार साबित होती है।