जी हां दोस्तो देवभूमि में फिर लौट आया वो आतंक और इस बार हुई शर्मनाक घटना, एक महिला बनी निशाना। सवाल ये उठता है कि आखिर इस आतंक से जनता को कब और कैसे मिलेगी राहत? सरकार और सिस्टम के साथ विभाग इस मामले में क्या कदम उठा रहा है और क्या कभी पहाड़ की महिलाएं अपने आप को कभी सुरक्षित महसूस कर पाएंगी। पूरी खबर बताउंगा आपको मंजर बेहद डरावना है। दोस्तो उत्तराखंड में भालुओं का कहर बढ़ता ही जा रहा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी से एक डराने वाली खबर सामने आई है, जहां जंगल से सटे इलाके में भालू के हमले ने एक परिवार ही नहीं, पूरे गांव को दहशत में डाल दिया है। बड़कोट इलाके में एक बुजुर्ग महिला पर भालू ने अचानक हमला कर दिया। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर भालुओं के आतंक से बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर कब लगाम लगेगी और प्रशासन कब जागेगा? दोस्तो गांव वालों का कहना है कि यह इलाका लंबे समय से भालू की आवाजाही के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। सुबह के समय रोज के कामों के लिए निकलने वाले लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भालू के हमले के बाद गांव में डर का माहौल है और लोग वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। दोस्तो मामला उत्तरकाशी के बड़कोट गांव का है। अमरा देवी जिनकी उम्र 60 बताई गई, मंगलवार सुबह करीब 7 बजे नौनाली तोक रास्ते से अपनी गौशाला जा रही थीं। इसी दौरान पीछे से आए भालू ने उन पर हमला कर दिया।
भालू ने महिला के मुंह और सिर पर पंजा मारा और उन्हें बेहद घायल कर दिया। अमरा देवी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के गांव वाले मौके पर पहुंचे और शोर मचाकर किसी तरह उन्हें भालू के चंगुल से छुड़ाया। दोस्तो घायल अमरा देवी को गांव वालों की मदद से फौरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़कोट में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि भालू ने महिला की आंख और कान को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई। वहां के लोगों का आरोप है कि नौनाली तोक और आसपास की बस्तियों के बीचों-बीच भालू की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। यमुनोत्री रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों में भी भालू की मौजूदगी दर्ज हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद वन विभाग ने कोई पर्मानेंट समाधान नहीं किया, जिससे ऐसे हमले बढ़ते जा रहे हैं। साधु लाल SDO वन विभाग दोस्तो उत्तराखंड में भालुओं की संख्या हजारों में मानी जाती है, वन विभाग के अनुमान के अनुसार, राज्य में करीब 2,000 से 2,500 हिमालयी काले भालू पाए जाते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जंगलों में खाने की कमी, जलवायु का बदलना, तापमान में उतार-चढ़ाव और इंसानों की जंगलों में दखल की वजह से भालू अब जंगलों से निकलकर बस्तियों की ओर आ रहे हैं। इसके अलावा खुले में फेंका गया कचरा और खेतों में उगाई जाने वाली फसलें भी भालुओं को आकर्षित कर रही हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया है। साथ ही, एक्सपर्ट्स ने भालुओं के बढ़ते हमलों की वजह उनका कम सोना भी बताया था। भालू प्राकृतिक रूप से हाइबरनेशन में जाते हैं ताकि कम खाने में भी वह लंबे समय तक जिंदा रह सकें लेकिन इन पहाड़ी इलाकों में भालुओं को खाने की कोई कमी नहीं है, उन्हें यहां भरपूर खाना मिल रहा है इसीलिए वो यहां हाइबरनेशन में नहीं जा रहे और लोगों पर हमला कर रहें हैं। इसके साथ ही, वन विभाग के अफसर ने बताया कि अभी मौसम बदलने की वजह से भालू खाने की तलाश में आबादी वाले इलाकों में जा रहें हैं, जिससे इस तरह का संघर्ष बढ़ रहा है।वे आगे कहते हैं कि भालुओं को जंगल की ओर भगाने के लिए टीमें बनाई गईं हैं और तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही लोगों को सतर्क करने के लिए जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बढ़ती समस्या का समाधान जंगलों में प्राकृतिक भोजन बढ़ाने, कचरा प्रबंधन सुधारने, संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और गांव वालों को खुद की सुरक्षा करने की ट्रेनिंग देने जैसे कदम जरूरी हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि भालू और दूसरे जानवरों के हमलों को रोकने के लिए ठोस और जल्दी उपाय किए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसों में लोगों की जानें जाती रहेंगीं।