उत्तराखंड कांग्रेस में सियासत का पारा एक बार फिर चढ़ गया है जहां ‘नेता या तांत्रिक’ जैसे बयान ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी है और अब इस बयान पर खुद प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की सख्त प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को और गरमा दिया है। आखिर किसे कहा गया ‘तांत्रिक’ और क्यों भरे मंच से लगानी पड़ी फटकार? कैसे एक बयान ने कांग्रेस के अंदर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। वो बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट में। दोस्तो जहां कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा इस उमीद के साथ उत्तराखंड के दौरे पर पहुंची थी, कि जनता के बीच जा रहे कांग्रेस में गुटबाजी के संदेश को वो पाट पाएं। अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का काम करे, लेकिन दोस्तो ठीक शैलजा के दौरे के दौरान जो हुआ उसने कांग्रेस खलबली को और ज्यादा बल दे दे दिया। मै आगे आपको दो बयान दिखाने जा रहा हूं। गौर कीजिएगा दोस्तो प्रदेश की सियासत में जमीनी स्तर पर कांग्रेस का आधार कमजोर हो रहा है लेकिन पार्टी में दिग्गज नेताओं में फेस के लिए संग्राम चल रहा है। हर नेता की कोशिश है कि पार्टी का चेहरा बने। इसके लिए अपने क्षत्रपों से एक-दूसरे की घेराबंदी के लिए फिल्डिंग सजाने पर ज्यादा आमदा हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस कैडर आधारित पार्टी नहीं रही है। यही वजह कि अनुशासनहीनता भी दिखाई देती है।
अब उसी पर कुमारी शैलजा को भरे मंच से नसीहत देनी पड़ी तो क्या बातों-बातों में कांग्रेस नेता प्रकाश जोशी को पाठ पढ़ा गई कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा! जोशी ने घुमा फिराकर पॉलिटिशियन! ज्योतिष और तांत्रिक में बताया था फर्क! जोशी ने शैलजा के सामने ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दी थी नेता रूपी तांत्रिक से सावधान रहने की सलाह। हालांकि जोशी बयान पर बवाला मचने के बाद अब सफाई पेश कर रहे हैं। अब आपके मन में वो सवाल की उत्तराखं कांग्रेस में की तांत्रिक वाले बयान पर शोर हो रहा है। दरअसल दोस्तो हुआ खुछ हूं कि हल्दिवानी में कांग्रेस का एक कार्यक्रम हो रहा था इसी दौरान कांग्रेस पूर्व राष्ट्रीय सचिव रहे कांग्रेस के नेता प्रकाश जोशी ने तांत्रिक से सवधान रहने के लिए कह रहे हैं। अब ये तांत्रिक वाली परीभाषा क्यों गड़ी जा रही है बल। दोस्तो तो क्या कांग्रेस हाईकमान का संदेश साफ है कि अब कांग्रेस में चुनाव से ठीक पहले बवाल की गुंजाइस कम है। दोस्तों, उत्तराखंड कांग्रेस में ‘नेता बनाम तांत्रिक’ वाला बयान अब सिर्फ एक टिप्पणी नहीं रहा, बल्कि यह पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और गुटबाजी को खुलकर सामने ले आया है। जहां एक तरफ कुमारी शैलजा मंच से अनुशासन और एकजुटता का संदेश देती नजर आईं, वहीं दूसरी तरफ नेताओं के बयान यह साफ इशारा कर रहे हैं कि अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है।
अब बड़ा सवाल यही है कि चुनाव से पहले क्या कांग्रेस अपनी अंदरूनी कलह को खत्म कर पाएगी या फिर ऐसे बयान ही पार्टी की राह और मुश्किल बनाते रहेंगे?फिलहाल नजरें हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि 2027 का चुनाव दूर नहीं है लेकिन दोस्तो प्रदेश की राजनीति में 2017 और उसके बाद हुए विधानसभा व लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लगातार करारी हार का सामना करना पड़ा। 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी के दावे कर रही है लेकिन पार्टी में चुनाव वर्ष के शुरूआत में ही जिस तरह की गुटबाजी व नेताओं में बीच एक-दूसरे के प्रति तीखी बयानबाजी हो रही है। उससे सत्ता में वापस के दावे को हकीकत में बदलना आसान नहीं है। 2027 का चुनाव जिस चेहरे पर लड़ा जाएगा, यह तो हाईकमान तय करेगी लेकिन इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच फेस की लड़ाई दिखाई देने लगी है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस में आपसी लड़ाई नई बात नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व के लिए नेताओं के बीच आपसी मतभेद चरम पर रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि भाजपा या वामपंथी दलों की तरह कांग्रेस कैडर आधारित पार्टी नहीं है। जिस कारण अनुशासनहीनता धरातल पर साफ दिखाई देती है। कांग्रेस को इस समय आपसी लड़ाई से ज्यादा धरातल पर काम करने की जरूरत है।