Dehradun में बड़े खुलासे हो गया बवाल! |CM Dhami | Harish Rawat | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो, उत्तराखंड में एक बार फिर ‘लैंड जिहाद’ को लेकर हड़कंप मचा है देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी यानी IMA के बेहद संवेदनशील इलाके से जुड़ा एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मदरसे और इस्लामिक शिक्षण संस्थान के नाम पर ली गई जमीन और फिर उसी जमीन पर प्लॉटिंग और बसावट का बड़ा खेला हो गया। मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है और जिला प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब कर ली गई है। आखिर IMA जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन के पास ये सब कैसे होता रहा? किसकी शह पर नियमों को ताक पर रखा गया? और अब इस पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी? दोस्तो भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की सुरक्षा को ताक में रख कर इस्लामिक संस्था द्वारा कृषि भूमि को बिना लैंड यूज़ कराए बेच दिए जाने का मामला चर्चा में है। उक्त प्रकरण शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ महमूद असद मदनी हैं। जोकि दारुल उलूम देवबंद और जमीयत उलेमा ए हिंद के नेता और राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं। मामला सुर्खियों में आने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गृह सचिव शैलेश बगौली के जरिए जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। इधर जब सीएम के सामने इस मामले में सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शिक्षा ट्रस्ट के नाम पर जमीन ली गई थी, लेकिन अब उसी जमीन का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला नियम-कानून और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ प्रतीत होता है, इसलिए इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि जो भी व्यक्ति या संस्था कानून का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस जमीन से जुड़े पूरे मामले में भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और सरकार किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। वहीं दोस्तो इससे पहले डीएम सविन बंसल ने बताया कि एसडीएम विकास नगर विनोद कुमार को इस भूमि प्रकरण पर जांच रिपोर्ट मांगी गई है प्रारंभिक रिर्पोट के अनुसार महमूद असद मदनी के शेखुल हिन्द ट्रस्ट द्वारा खरीदी गयी भूमि की जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया है कि ट्रस्ट द्वारा 15 व्यक्तियों को बड़े भूखण्ड के रूप में जमीन बेची गई है। इन 15 ने अन्य 70-80 लोगों को छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन बेच दी। इस प्रकरण में नोटिस देने के साथ ही पूरी जमीन को सरकार में निहित करने की कार्यवाही अमल में लायी जा रही है। दोस्तो अब आपको बताता हूं ये पूरा मामला है क्या दरअसल दोस्तो  नारायण दत्त तिवारी की कांग्रेस सरकार ने शेखुल एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट जिसका पता 1 बहादुर शाह जफर मार्ग दिल्ली बताया गया है, उक्त ट्रस्ट को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के पास इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने की प्रारंभिक अनुमति दी थी। इसके अध्यक्ष डा महमूद असद मदनी हैं। दोस्तो बताया ये जाता है कि ट्रस्ट यहां देवबंद दारुल उलूम की तरह विशाल मदरसा या मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने जा रहा था, जिसके लिए ट्रस्ट द्वारा 20 एकड़ भूमि ग्राम हरियावाला धौलास पछुवा दून परगना विकासनगर देहरादून में धारित भूमि किसानों से ली गई थी और साथ ही कुछ और ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी विभागों की भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा किया गया था। दोस्तो इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) को जब यहां उक्त इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के प्रयासों की जानकारी मिली तो उनके द्वारा उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस की तिवारी सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज की गई। जिसके बाद इस योजना पर कई माह तक रोक लगी रही।

कांग्रेस सरकार के बाद आई बीजेपी सरकार के समय ये मामला ठंडे बस्ते में रहा। इसके बाद जब पुनः कांग्रेस की सरकार आई तो एक बार फिर से यहां इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के लिए हलचल तेज हुई। दोस्तो ट्रस्ट के अध्यक्ष महमूद हसन मदनी द्वारा मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ले जाया गया जोकि कई माह तक चला जहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आईएमए की आपत्ति ही रही। दोस्तो हाई कोर्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार को और ट्रस्ट को ये निर्देश दिए थे कि इस भूमि का लैंड यूज़ चेंज नहीं किया जाएगा और ये कृषि भूमि ही रहेगी और यदि बेची जाएगी तो भी कृषि भूमि ही रहेगी और इससे जो पैसा आयेगा वो भी ट्रस्ट में सामाजिक कार्यों में लगाया जाएगा। दरअसल दोस्तो इस निर्देश के पीछे तर्क ये दिया गया था कि आईएमए एक संवेदनशील स्थान है आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इसके कैंपस के आसपास न तो आबादी की बसावट की जानी चाहिए और न ही व्यापारिक गतिविधियां यहां से संचालित होनी चाहिए। इसकी सीमा भारतीय सैन्य अकादमी के लगी हुई है, जहां अकादमी के कैडेट्स अभ्यास करते हैं। दोस्तो ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में दी गई याचिका संख्या 1918( एम एस)/2007 ट्रस्ट बनाम राज्य व अन्य के निर्देशों के बाद राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अपर सचिव जे पी जोशी ने 19 जुलाई 2016 को डीएम देहरादून को पत्र लिख कर कहा कि हाईकोर्ट के द्वारा पारित आदेश 8/6/2010 के अनुपालन में शासनादेश 150/राजस्व/2004/15/3/2004 के संदर्भ में उक्त ट्रस्ट की कृषि भूमि को अकृषि नहीं किया जाएगा।

दोस्तो जानकारी के अनुसार ट्रस्ट ने देहरादून स्थित रईस अहमद नाम के व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दी हुई थी अब उक्त 20 एकड़ भूमि पर मुस्लिम बस्ती बसाने के लिए सड़क डाल कर और बिजली के खंभे खड़े करके प्लॉटिंग की जा रही है और जानकारी ये भी कि हरियाला वाला कि प्रधान रही रजनी देवी ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन के समक्ष 2016 में कई बार लिखित रूप में भी दर्ज करवाई गई थी। उस समय तो प्रशासनिक दबाव में ये प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़ा था किंतु कुछ माह बाद उक्त भूमि को बेचा जाने लगा तो दोस्तो, IMA जैसे संवेदनशील सैन्य क्षेत्र के पास जमीन से जुड़ा ये मामला सिर्फ ज़मीन का नहीं, बल्कि सुरक्षा, नियम-कानून और सरकारी जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है।सीएम धामी के सख्त रुख के बाद अब इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन की नजर है और कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। देखना ये होगा कि जांच में और क्या-क्या खुलासे सामने आते हैं, किन लोगों पर गाज गिरती है और क्या वाकई इस ‘लैंड यूज़’ के खेल पर पूरी तरह रोक लग पाएगी फिलहाल इतना तय है—उत्तराखंड में नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।