Uttarakhand का सबसे बड़ा घपला EXPOSED ! Haldwani News | Uttarakhand News | Tension In Haldwani

Spread the love

उत्तराखंड में खुला बड़ा घपला! ऐसे परिवार, जो आयकर देते हैं और सरकारी नौकरी में हैं, फिर भी ले रहे हैं बीपीएल कार्ड का लाभ। क्या यही कारण है कि सच्चे जरूरतमंद वंचित रह जाते हैं? चंपावत जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है और मामले की पूरी जांच के आदेश दे दिए हैं। जानते हैं कि प्रशासन अब किन कदमों पर चल रहा है और क्या होगी अपात्रों के लिए कार्रवाई की राह। दोस्तो क्या सच में उत्तराखंड में गरीबों के लिए बनी योजनाओं का फायदा केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँच पा रहा है? या फिर कुछ लोग इस सिस्टम का दुरुपयोग कर अपने लिए लाभ उठा रहे हैं? चंपावत में हाल ही में सामने आया है बड़ा खुलासा—बीपीएल कार्ड का इस्तेमाल कर रहे आयकरदाता और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार! क्या ऐसे अपात्रों के खिलाफ प्रशासन कड़ा रुख अपनाएगा? जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जांच के आदेश दे दिए हैं और साफ कर दिया है—जो भी नियम तोड़ेगा, उसका कार्ड निरस्त होगा। जानिए कि अब क्या कार्रवाई होने वाली है और वास्तविक जरूरतमंदों को आखिर कब मिलेगा उनका हक। दोस्तो उत्तराखण्ड के करीब साढ़े नौ लाख राशन कार्डधारक परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है दरअसल इस महीने से सरकारी राशन व्यवस्था में एक अहम बदलाव लागू हो गया है। राज्य खाद्य योजना के तहत अब लाभार्थियों को प्रति परिवार फिर से पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल दिया जा रहा है। बता दें कि बीते लगभग चार वर्षों से गेहूं की कमी के चलते इन परिवारों को पूरे साढ़े सात किलो राशन के रूप में केवल चावल ही मिल रहा था। दरअसल, योजना की शुरुआत में पात्र परिवारों को संतुलित आहार के उद्देश्य से गेहूं और चावल दोनों का वितरण किया जाता था। लेकिन गेहूं की उपलब्धता प्रभावित होने के बाद विभाग को मजबूरी में गेहूं के स्थान पर चावल देना पड़ा। इससे कई क्षेत्रों में लोगों को अपनी खानपान की आदतों के अनुसार राशन उपयोग करने में कठिनाई भी हुई।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अपर निदेशक पीएस पांगती ने बताया कि इस माह से गेहूं की आपूर्ति दोबारा सुचारू कर दी गई है, जिससे राज्य खाद्य योजना के लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में गेहूं मिलने लगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की अन्य योजनाओं में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं दोस्तो दूसरी ओर सरकारी योजनाओं का लाभ अब सिर्फ वास्तविक जरूरतमंदों तक ही सीमित रखने की तैयारी तेज हो गई है। गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे, लेकिन बीपीएल राशन कार्ड का लाभ ले रहे परिवारों पर चम्पावत जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि जो भी लोग अपात्र होते हुए बीपीएल कार्ड इस्तेमाल कर रहे हैं, वे स्वयं अपना कार्ड सरेंडर करें, अन्यथा जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं। आपको बता दें कि बीते मंगलवार को कलेक्ट्रेट में कठियानौला, सिलिंग टाक, अमोड़ी समेत कई गांवों के प्रधान जिलाधिकारी से मिले। प्रधानों ने ज्ञापन सौंपते हुए शिकायत की कि विभागीय योजनाओं और बैठकों की जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिल पा रही है। साथ ही उन्होंने भू-कटाव से गांवों और कृषि भूमि को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग रखी। प्रधानों ने यह भी ध्यान दिलाया कि कई गांवों में ऐसे लोग बीपीएल सूची में शामिल हैं, जिनके परिवार के सदस्य सरकारी नौकरी में हैं, व्यापार करते हैं या आयकरदाता हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद वे सस्ते राशन और अन्य योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे वास्तविक पात्र परिवार वंचित हो रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि बीपीएल कार्ड का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा और व्यापक जांच कराई जाएगी। जांच में अपात्र पाए जाने पर संबंधित कार्ड निरस्त होंगे और नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। योजनाओं की जानकारी न मिलने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने प्रधानों को स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन की ओर से सभी सूचनाएं और योजनाओं से जुड़ी जानकारी इंटरनेट मीडिया पर नियमित रूप से साझा की जा रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि रील और अनावश्यक वीडियो देखने के बजाय चंपावत प्रशासन के आधिकारिक पोस्ट और जारी पुस्तिकाओं को देखें, जहां सभी योजनाओं का विवरण उपलब्ध है। “चंपावत प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं तक पहुंचेगा, जो वास्तव में इसके पात्र हैं। अब सवाल यह है—क्या अपात्र बीपीएल धारक खुद कार्ड सरेंडर करेंगे या प्रशासन की कार्रवाई का सामना करेंगे? आने वाले दिनों में जांच की रिपोर्ट बताएगी कि नियमों की दरकार कितनी गंभीरता से लागू की जा रही है। ऐसे में जरूरतमंदों को उनका हक मिलने की उम्मीद और भी मजबूत हो गई है।