Nanda Devi Rajjat की तारीख पर घमासान! | Nandadevi | Chamoli | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो, नंदादेवी राजजात—जिसकी धार्मिक आस्था और परंपरा पूरे उत्तराखंड में गहराई से जुड़ी है—को लेकर इस बार बड़ी उठापटक देखी जा रही है। कुलसारी काली मंदिर में आयोजित समन्वय बैठक में तीनों विकासखंडों के जनप्रतिनिधि, चौदह सयानों और बड़ीजात समिति आमने-सामने आ गए। 2026 या 2027 कौन सा साल होगा राजजात का आयोजन? परंपरा की बारह साल की मान्यता और महापंचायत के फैसले में टकराव ने बैठक में विवाद को जन्म दिया। दोस्तो क्यों हुआ इतना बवाल और आखिर विवाद की असली वजह क्या रही? विस्तार से बताता हूं। दोस्तो वैसे पहली बार नंदादेवी राजजात को लेकर बड़ी खीचातान देखने को मिल रही है। ऐसा क्यों हो रहा होगा अगर आपको कुछ समझ आता है तो बताइयेगा, लेकिन में नंदादाराज को लेकर बैठक में हुए घमासान की बात करने आया हूं। दोस्तो यात्रा आयोजन को लेकर कुलसारी काली मंदिर के प्रांगण में एक समन्वय बैठक का आयोजन किया गया जिसमें तीनों विकासखंडों के जनप्रतिनिधियों , बधाण पट्टी चौदह सयानों ,कुरुड़ के गौड़ पुजारियों समेत धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों ने राजजात के आयोजन को लेकर विचार रखे।

दोस्तो बैठक में राजजात के आयोजन को 2027 में कराने को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी रही। एक ओर चौदह सयानो ने नंदादेवी राजजात की तैयारी को लेकर जिलाधिकारी चमोली के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सरकार स्वयं 2026 में राजजात कराने की स्थिति में नहीं है। निर्जन पड़ावों में रास्तों की बदहाल स्थिति है, उसे देखते हुए राजजात 2027 में ही होनी चाहिए। चौदह सयानों ने एकमत होकर कहा कि राजजात का इतिहास रहा है कि बारह वर्ष में मनौती की जाती है। 12 वर्षों के बाद ही राजजात का आयोजन होता आया है। इसलिए वे 2027 में ही राजजात के पक्षधर हैं। वहीं कुरुड़ बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि कुरुड़ में हुई महापंचायत के बाद भगवती के पश्वा को अवतरित किया गया। अवतरण के बाद बड़ी जात के आयोजन को 2026 में ही कराए जाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा इस बीच कोई विषम परिस्थिति निकल कर आती है तभी 2026 में बड़ी जात के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाएगा। अन्यथा महापंचायत में लिए गए निर्णय के अनुसार 2026 में ही बड़ी जात का आयोजन किया जाएगा।

दोस्तो बैठक के बाद एक समन्वय समिति का भी गठन किया गया। इस समन्वय समिति का विरोध भी देखने को मिला। कुल मिलाकर कहा जाए तो नंदादेवी राजजात के 2027 में और बड़ी जात के 2026 में होने के निर्णयों पर बैठक में भारी विवाद देखने को मिला। सभी पक्षों के इसे लेकर अपने अपने मत थे। दोस्तो जहां एक ओर चौदह सयानो ने नंदादेवी राजजात की तैयारी को लेकर जिलाधिकारी चमोली के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सरकार स्वयं 2026 में राजजात कराने की स्थिति में नहीं है लिहाजा निर्जन पड़ावों में जिस राहत रास्तो की बदहाल स्थिति है उसे देखते हुए राजजात 2027 में ही होनी चाहिए ,चौदह सयानो ने एकमत होकर कहा कि राजजात का इतिहास रहा है कि बारह वर्ष में मनोती की जाती है और 12 वर्षों के बाद ही राजजात का आयोजन होता आया है इसलिए वे 2027 में ही राजजात के पक्षधर हैं वहीं कुरुड़ बड़ीजात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि कुरुड़ में हुई महापंचायत के बाद भगवती के पश्वा को अवतरित किया गया और अवतरण के बाद बड़ीजात के आयोजन को 2026 में ही कराए जाने का निर्णय लिया गया था। दोस्तो इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि इस बीच कोई विषम परिस्थिति निकल कर आती है तभी 2026 में बड़ीजात के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाएगा अन्यथा महापंचायत में लिए गए निर्णय के अनुसार 2026 में ही बड़ीजात का आयोजन किया जाएगा।

दोस्तो बैठक के बाद एक समन्वय समिति का भी गठन किया गया लेकिन इस समन्वय समिति का विरोध भी देखने को मिला ,कुल मिलाकर कहा जाए तो नंदादेवी राजजात के 2027 में और बड़ीजात के 2026 में होने के निर्णयों पर बैठक में भारी विवाद देखने को मिल। दोस्तो, नंदादेवी राजजात और बड़ी जात को लेकर कुलसारी काली मंदिर में हुई यह बैठक साफ दिखाती है कि धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक निर्णयों के बीच टकराव अभी भी कायम है। जहां चौदह सयानो 12 वर्षों की परंपरा और रास्तों की स्थिति को देखते हुए राजजात 2027 में कराने के पक्षधर हैं, वहीं बड़ीजात समिति ने महापंचायत के निर्णय के अनुसार 2026 में आयोजन करने की बात कही।बैठक के बाद बनी समन्वय समिति पर भी विवाद रहा, ये साफ करता है कि सभी पक्षों के दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। अंत में यही कहा जा सकता है कि नंदादेवी राजजात का भविष्य केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि संगठन और आपसी सहमति पर भी निर्भर है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन और धार्मिक प्रतिनिधि इस विवाद का संतुलित समाधान निकाल पाएंगे, या फिर संघर्ष जारी रहेगा।