उत्तराखंड कैप्टन बना मिसाल! | Roorkee | Indian Navy | Captain Ashish Sharma | Uttarakhand News

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दोस्तो आज एक ऐसे जांबाज उत्तराखंडी की कहानी लेकर आया दूं दोस्तो जिसने सात समंदर पार किया ऐसा कमाल की दुनिया देखती रह गई और वो मिसाल बन गया। भयंकर युद्ध हो रहा था बमबारी हो रही थी, लोग जहां तहां फंसे पड़े थे, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के ठीक बीच उत्तराखंड के एक कैप्टन ने अपनी जिंदगी परवाह किए बिना अपने साथियों की पहले सोची और उसकी खबर बन गई। दोस्तो सोचिए ज़रा, जब चारों तरफ तनाव हो, समुद्र में खतरा हो और हालात इतने बिगड़ चुके हों कि हर पल जान पर बन आए तब क्या कोई इंसान अपना कर्तव्य छोड़कर सबसे पहले खुद की सुरक्षा चुनेगा? लेकिन आज मै एक ऐसे जांबाज भारतीय कैप्टन की कहानी बताने जा रहा हू जिन्होंने मुश्किल हालातों में भी इंसानियत और कर्तव्य को सबसे ऊपर रखा। दोस्तो ईरान की बमबारी और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच फंसे जहाज में जहां हर कोई घर लौटने की कोशिश में था। वहीं उत्तराखंड के रुड़की निवासी कैप्टन ने ऐसा फैसला लिया जिसने सबका दिल जीत लिया। पहले अपनी टीम के 12 सदस्यों को सुरक्षित भारत भेजा और खुद जहाज पर डटे रहने का निर्णय लिया। वैसे दोस्तो आखिर क्यों उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर भी साथियों को पहले सुरक्षा दी? और कैसे उनका यह फैसला आज पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है?

दोस्तो होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव गहराता जा रहा है। ईरान द्वारा जलमार्ग को बंद करने और जहाजों पर फायरिंग की घटनाओं के बाद कई देशों के जहाज इस अहम समुद्री रास्ते में फंस गए हैं। इनमें से एक भारतीय जहाज भी शामिल है। दोस्तो इस जहाज की कमान संभाल रहे हैं उत्तराखंड के रुड़की निवासी कैप्टन आशीष शर्मा। 45 दिनों से मुश्किल हालात में फंसे होने के बावजूद उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जो उन्हें एक सच्चा नेता साबित करता है। जब हालात कुछ सामान्य हुए और जहाजों के लिए रास्ता खुला, तब कैप्टन आशीष के पास खुद पहले घर लौटने का मौका था। लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देते हुए। पहले 12 क्रू मेंबरों को सुरक्षित भारत भेजा, खुद जहाज पर डटे रहने का फैसला किया। जी हां दोस्तो बाकी साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उठाई। कैप्टन आशीष ने और कह दिया कि जहाज पर मौजूद हर सदस्य की सुरक्षा कैप्टन की पहली जिम्मेदारी होती है। जब तक मेरा अंतिम साथी सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाता, मैं अपनी पोस्ट नहीं छोड़ सकता। दोस्तो उत्तराखंड के कैप्टन के इस बयान ने उनकी कर्तव्यनिष्ठा को और मजबूत बना दिया। दोस्तो जानकारी के अनुसार जहाज को पूरी तरह सुरक्षित निकलने में अभी लगभग डेढ़ महीने का समय लग सकता है। इस दौरान कैप्टन आशीष ने वीडियो संदेश के जरिए अपने और अन्य क्रू मेंबरों के सुरक्षित होने की जानकारी दी है, जिससे उनके परिवारों को राहत मिली है। जिन 12 क्रू मेंबरों को भारत भेजा गया, उन्होंने रवाना होते समय अपने कैप्टन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि कैप्टन के इस फैसले ने उनकी जान बचाई और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचने का मौका मिला।

दोस्तो यहां आपको ये बता देता हूं कि क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य। दोस्तो होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, यहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार को प्रभावित कर सकता है। तनाव के बीच भी भारतीय जहाज ‘देश गरिमा’ ने इस जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार किया। यह भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड का जहाज है और मार्च के बाद यह इस मार्ग को पार करने वाला 10वां भारतीय जहाज बन गया है। दोस्तो कैप्टन आशीष शर्मा ने जिस तरह अपने कर्तव्य और मानवता को प्राथमिकता दी, वह एक प्रेरणादायक उदाहरण है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो सबसे पहले अपनी टीम की सुरक्षा को महत्व देता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की इस खतरनाक और तनावपूर्ण स्थिति के बीच उत्तराखंड के कैप्टन आशीष शर्मा ने जो फैसला लिया है, वह सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि असली नेतृत्व की मिसाल बन गया है, जहां एक तरफ जान बचाकर घर लौटना आसान रास्ता था, वहीं उन्होंने पहले अपने 12 साथियों को सुरक्षित भेजकर यह साबित कर दिया कि एक सच्चा कैप्टन अपने क्रू को सबसे पहले रखता है। अब भले ही जहाज को सुरक्षित निकलने में अभी समय लगे, लेकिन उनकी यह सोच और उनका यह साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।