दोस्तो, दोस्तो आपको उत्तराखंड में नकल माफिया का खुल्ला खेल तो खूब देखा होगा और इस खेल के बड़े खिलाड़ी को भी आप जानते होंगे। जिसका नाम प्रदेश के हर एक युवा की जुमान पर रहा है, वो नाम हाकम सिंह है, लेकिन दोस्तो अदालत के फैसले के बाद किसी मामले की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन यहां हाकम सिंह को कोर्ट से क्लीन चीट का क्या मिली वो नजाने लगा। साथ होंगे वो कई सवाल जो बीत कुछ वक्त से अपने उत्तराखंड में पूछे जा रहे हैं। दोस्तो तो क्या एक क्लीन चिट के बाद जश्न मनाने का अंदाज भी सवालों के घेरे में आ सकता है? उत्तराखंड के चर्चित नाम हाकम सिंह रावत एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई पुराना विवाद नहीं, बल्कि एक नया वायरल वीडियो है। हाईकोर्ट से कथित तौर पर क्लीन चिट मिलने के बाद उनका नाचते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद एक बार फिर बहस तेज हो गई है—आखिर यह जश्न है या फिर संदेश देने की कोशिश? क्या यह सिर्फ एक निजी खुशी है या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी और सामाजिक संदेश छिपा है? और क्यों इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है?
दोस्तो खबर ये कि नकल माफिया हाकम सिंह को नैनीताल हाईकोर्ट ने पटवारी भर्ती परीक्षा मामले में क्लीन चिट दे दी है, यहां दोस्तो आपको बता दूं कि क्लीन चिट की क्यों दी है। वो इसलिए क्योंकि सबूत न मिलने पर हाकम को जनवरी में बेल मिल गई थी, जिसके बाद अब उन्हें हाईकोर्ट ने क्लीन दे दी है और अब थोड़ा इस तस्वीर पर नजर दोड़ाई। दोस्तो पटवारी भर्ती परीक्षा मामले में हाकम सिंह और उनके सहयोगी को पटवारी भर्ती परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 20 सितंबर को गिरफ्तार किया था। दोनों पर भर्ती परीक्षा पास कराने का आरोप था। लेकिन दोनों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने पर न्यायमूर्ति आलोक महरा की कोर्ट ने हाकम को जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिए थे, जिसके बाद अब उन्हें हाईकोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है। दोस्तो इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने हाकम सिंह को क्लीन चिट मिलने पर सरकार पर निशाना साधा है। कह रही है कि बेरोज़गार युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वाले हाकम सिंह को सरकार की ढीली और संदिग्ध पैरवी के चलते क्लीन चिट मिल जाना सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल है। दोस्तो हाकम सिंह खुलेआम जश्न मना रहा है और सत्ता के गलियारों में बैठे लोग संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। अगर सरकार सच में निष्पक्ष होती, तो इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देती, लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि यह मामला न्याय से ज़्यादा रिश्तों और संरक्षण का बन चुका है। भाजपा की राजनीति में अपने लोगों को बचाना प्राथमिकता है, चाहे उसके लिए सच और न्याय की बलि ही क्यों न देनी पड़े। ये सब आरोपों के जरिए विपक्षी बीजेपी को घेर रहे हैं और ये वीडियो दिखा रही है। दोस्तो उत्तराखंड में उन दिनों एक घोटाले की वजह से हलचलें तेज़ थी।
जब रोज़गार के लिए नौजवानों के पलायन की चुनौती के बीच राज्य में एक बार फिर सरकारी नौकरियों में भर्ती के एक कथित घोटाले की जांच चल रही थी दिसंबर 2021 में हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक होने की शिकायत की जांच एसटीएफ़ कर रही थी जिसने 22 लोगों को गिरफ़्तार किया था। इनमें राजनेता, पुलिसकर्मी, सचिवालय कर्मचारी, आउटसोर्सिंग कंपनी का कर्मचारी, परीक्षार्थी, कोर्ट कर्मचारी और कोचिंग सेंटर से जुड़े लोग भी शामिल थे। लेकिन मामला तब ज्यादा सुर्खियों में आया जब जिस शख़्स हाकम सिंह को कथित घोटाले का मास्टरमाइंड कहा जा रहा था उनके बारे में बताया ये गया कि वो बीजेपी नेता हैं और उनके पार्टी के कई नेताओं से नज़दीकी संबंध हैं। इसके बाद बीजेपी ने इस ‘मास्टरमाइंड’ को पार्टी से निकाल दिया है। उसके बाद कई बार जेल जाने और बाहर आने का सिलसिला चलता रहा और जब कोर्ट ने सबूत नहीं होने की वजह से क्लीनचीट दे दी है तो नाचना तो बनता है ना, तो दोस्तो हाकम सिंह रावत को लेकर अदालत का फैसला जहां कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, वहीं उनका वायरल जश्न वाला वीडियो अब एक नई बहस को जन्म दे रहा है।क्या यह सिर्फ एक अदालत से मिली राहत का उत्सव है या फिर सिस्टम और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली एक तस्वीर?पटवारी भर्ती परीक्षा से जुड़े जिस मामले ने कभी पूरे उत्तराखंड में युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ाई थी, उसी मामले में आए इस नए मोड़ ने अब एक बार फिर चर्चा को तेज कर दिया है।अब नजरें इस पर टिकी हैं कि आगे इस मामले को लेकर क्या राजनीतिक और कानूनी हलचल देखने को मिलती है।