देवभूमि उत्तराखंड से एक ऐसी खबर जिसने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया क्या मेहनत, जज़्बा और जुनून के दम पर इंसान किसी भी दूरी को आसान बना सकता है? और क्या 113 किलोमीटर की कठिन मैराथन में जीत हासिल करना आसान होता है? इन सवालों के जवाब सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 में मीनाक्षी और दिगंबर ने दिया है। ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। कैसे सम्मानित करते हुए सीएम धामी भी हो गए गदगद। दोस्तो 113 किलोमीटर की मैराथन में अपनी देवभूमि की मीनाक्षी और दिगंबर शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उन्हें सम्मानित किया। भारतीय सेना और उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा संयुक्त रूप में आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज’ के दूसरे संस्करण का समापन गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में हो गया। उत्तराखंड की मीनाक्षी और दिगंबर ने क्रमश: महिला और पुरुष वर्ग में गोल्ड मेडल जीते। समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे. इसमें सेना के 100 जवानों और 200 अन्य धावकों ने हेलंग से उखीमठ तक की कठिन यात्रा पूरी की।
दोस्तो इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सीमांत ग्रामीण क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना और पारंपरिक यात्रा मार्गों को पर्यटन से जोड़ना है। 113 किलोमीटर लंबी इस कठिन सहनशक्ति प्रतियोगिता में देशभर से करीब 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक क्षमता, धैर्य और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। दोस्तो, इस रोमांचक सफर की शुरुआत 16 अप्रैल को बदरीनाथ में आयोजित एक्सपो के साथ हुई। इसके बाद 17 अप्रैल को हेलंग से कलगोट, 18 अप्रैल को कलगोट से मंडल और 19 अप्रैल को मंडल से ऊखीमठ तक मैराथन के विभिन्न चरण आयोजित किए गए. चार दिनों तक चले इस चुनौतीपूर्ण आयोजन में प्रतिभागियों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। चमोली निवासी खिलाड़ी दिगंबर सिंह ने बताया कि वे काफी समय से रांसी मैदान में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने पहले भी कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, जहां उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इस बार भी उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर जीत हासिल की है। वहीं दोस्तो दूसरी तरफ पौड़ी के थली गांव की रहने वाली खिलाड़ी मीनाक्षी ने भी इस प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। मीनाक्षी पिछले दो से ढाई वर्षों से रांसी मैदान में नियमित प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वे कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर प्रथम स्थान हासिल कर चुकी हैं। इस जीत से उनका आत्मविश्वास और मनोबल दोनों बढ़ा है।
दोस्तो समापन समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सीमावर्ती इलाकों में सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे न केवल आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और रणनीतिक दृष्टि से भी राज्य को नई गति मिली है. पौड़ी शहर के रांसी मैदान में लंबे समय से प्रशिक्षण ले रहे दो खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया है. इस उपलब्धि के बाद दोनों खिलाड़ियों ने अपनी खुशी जाहिर की है.- बाइट सीएम धामी– दोस्तो यहां गौर करने वाली बात ये कि मीनाक्षी और दिगंबर ने 7 और 8 मार्च को दिल्ली में हुई अल्ट्रा मैराथन दौड़ में पुरुष और महिला वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया था. अल्ट्रा मैराथन 100 किलोमीटर की थी। दोनों ने न सिर्फ गोल्ड मेडल जीते थे, बल्कि वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई किया था। इन दोनों एथलीट के कोच रूपेश यादव हैं. रूपेश, देश के लंबी दूरी के चैंपियन धावक हैं और भारतीय लॉन्ग डिस्टेंस एथलेटिक्स टीम के कोच ओलंपियन सुरेंद्र भंडारी के शिष्य रहे हैं। सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 की वो कहानी जिसने साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों तो 113 किलोमीटर की दुर्गम पहाड़ी दौड़ भी आसान लगने लगती है। मीनाक्षी और दिगंबर ने न सिर्फ इस कठिन मैराथन में जीत हासिल की, बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम भी रोशन कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दोनों खिलाड़ियों का सम्मान इस बात का प्रतीक है कि देवभूमि अब खेलों में भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है।