गजब! नेता नहीं ‘गधे-घोड़े’ बोल रहे हैं और दिग्गज चुप? | BJP | Congress | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड BJP में ऐसा कौन-सा बयान आया कि कांग्रेस से शुरू हुई बहस अब बीजेपी के अपने दिग्गजों तक पहुंच गई? मनवीर चौहान ने ‘गधे-घोड़े’ कहकर आखिर किस पर निशाना साधा? गणेश गोदियाल ने भी ऐसा पलटवार किया कि सियासी बहस और तेज हो गई! लेकिन असली सवाल ये है—कांग्रेस छोड़कर BJP में आए नेताओं के पुराने राजनीतिक सफर पर अब सवाल क्यों उठ रहे हैं? क्या ये सिर्फ शब्दों की जंग है या 2027 से पहले दल-बदल की राजनीति का हिसाब-किताब? दोस्तो सियासत में जब बुद्धि पर ताला लगता है, तो जुबान से ऐसे मोती झड़ते हैं कि पूरी पार्टी उसे समेटते-समेटते थक जाती है! उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए नेताओं की तुलना सीधे ‘गधे-घोड़े’ से कर दी! उन्होंने बड़े गर्व से फरमाया कि जब तक ये नेता कांग्रेस में थे, इनके विचार गधे-घोड़े जैसे और लूले-लंगड़े थे, लेकिन बीजेपी की ‘पवित्र विचारधारा’ की वाशिंग मशीन में धुलकर ये रातों-रात सुधर गए!

दोस्तो इस बयान के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली तक बीजेपी के बड़े-बड़े सूरमाओं ने ऐसी रहस्यमयी चुप्पी साध ली है, जैसे उनके मुंह में दही जम गया हो। लेकिन विपक्ष नेता तगड़ा तंज कसा रहे हैं कि अब बीजेपी के इन ‘माननीयों’ को न उगलते बन रहा है और न निगलते। दोस्तो अगर आपको लगता है कि डार्विन का ‘इवोल्यूशन थ्योरी’ यानी विकास का सिद्धांत सिर्फ किताबों में है, तो आपको उत्तराखंड बीजेपी के मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान को सुनना चाहिए। उन्होंने राजनीति का एक नया जैविक विज्ञान खोज निकाला है! चौहान साहब का दावा है कि कांग्रेस पार्टी एक ऐसा ‘अजूबा बाड़ा’ है, जहां रहने वाले नेता ‘गधे-घोड़े’ जैसे लूले-लंगड़े विचारों के होते हैं। लेकिन चमत्कार देखिए! जैसे ही ये नेता कांग्रेस का फाटक लांघकर बीजेपी के दफ्तर में कदम रखते हैं, इनकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो जाती है, इनके विचार दिव्य हो जाते हैं और ये अचानक ‘रेस के घोड़े’ बन जाते हैं! सोशल मीडिया पर इस बयान ने वो खलबली मचाई है कि बीजेपी के रणनीतिकार अब अपना सिर पकड़ कर बैठे हैं। दोस्तो चलिए अब मनवीर चौहान साहब को उत्तराखंड बीजेपी का वो आईना दिखाते हैं, जिसे देखकर शायद वो खुद अपना बयान वापस लेना चाहें। अगर कांग्रेस से बीजेपी में आए नेता उनके मुताबिक पहले ‘गधे-घोड़े’ थे, तो मौजूदा वक्त में उत्तराखंड बीजेपी का करीब 30 से 35 फीसदी हिस्सा इसी श्रेणी में आ जाता है! इसको एसे समझा जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट में 40 फीसदी से ज्यादा मंत्री कांग्रेस की ही पृष्ठभूमि से हैं। चाहे वो सबसे वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज हों, हर संकट में काम आने वाले सुबोध उनियाल हों, तेजतर्रार रेखा आर्य हों या फिर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा हों। इतनी ही है दोस्तो बीजेपी में तो ऐसे विधायकों की पूरी की पूरी फौज है जो कभी कांग्रेस में थे और आज बीजेपी में विधायक हैं या पार्टी के उच्च पदों पर हैं

किशोर उपाध्याय, उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बत्रा, सरिता आर्य जैसे तमाम माननीय आज कमल के निशान पर विधायक हैं, लेकिन इनका राजनीतिक इतिहास कांग्रेस की ही गलियों से शुरू हुआ था। यानी दोस्तो जिस थाली में बीजेपी आज 2027 की सत्ता का भात खा रही है, मनवीर चौहान ने उसी थाली में ‘गधे-घोड़े’ का छेद कर दिया है! दोस्तो अब सबसे मजेदार बात देखिए — इस बयान के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली के 11 अशोक रोड तक ऐसी चुप्पी पसरी है, जैसी श्मशान में होती है। क्यों खामोश हैं अमित शाह? क्यों खामोश हैं जेपी नड्डा? क्योंकि केंद्रीय बीजेपी की पूरी रणनीति ही कांग्रेस के बड़े नेताओं को तोड़कर अपनी सरकार बनाने पर टिकी है दोस्तो ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर हिमंता बिस्वा सरमा तक, और उत्तराखंड में विजय बहुगुणा से लेकर सतपाल महाराज तक। इन सबको दिल्ली दरबार ने ही पलक-पावड़े बिछाकर बीजेपी में शामिल कराया था। अब दोस्तो अगर दिल्ली के बड़े नेता इस बयान पर कुछ बोलते हैं, तो मीडिया प्रभारी की नौकरी जाएगी, और अगर नहीं बोलते, तो उनके अपने ही मंत्रियों का सरेआम अपमान होता रहेगा। इसे कहते हैं— ‘सांप-छछूंदर की गति होना’। इधर दोसतो इधर, कांग्रेस के लोग सवाल पूछ रहे है इसमें कितनी सच्चाई है, जो हमें कभी नहीं लगा ना दिखाई दिया वो बीजेपी ने कौन सी मशीन से देख लिया। वैसे दोस्तो इस बयान के मायने दूरगामी हैं। 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के भीतर ‘मूल बीजेपी’ बनाम ‘आयातित बीजेपी’ की जो लड़ाई दबी हुई थी, उसे इस बयान ने हवा दे दी है। अब कांग्रेस से आए इन कद्दावर नेताओं के लिए बीजेपी के भीतर खुद को ‘सम्मानित’ साबित करना एक बड़ी चुनौती होगी। दोस्तो सियासत में जुबान का फिसलना आम है, लेकिन जब जुबान गधे और घोड़ों के तबेले में जाकर फंस जाए, तो उसकी गूंज चुनाव तक सुनाई देती है। अब देखना यह है कि बीजेपी के ये ‘सुधरे हुए’ माननीय इस तंज को हजम कर जाते हैं या फिर 2027 से पहले बीजेपी के भीतर कोई नया ‘अश्वमेध यज्ञ’ शुरू होता है..तो दोस्तो कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि उत्तराखंड बीजेपी में इस वक्त ‘गधे और घोड़ों’ की एक ऐसी रेस शुरू हो चुकी है, जिसमें प्रदेश मीडिया प्रभारी ने अपनी ही सरकार के घोड़ों को गधा बता दिया है। गणेश गोदियाल ने इस घाव पर नमक छिड़कने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, और बीजेपी के बड़े नेता अब बस इस वीडियो को डिलीट कराने या भूल जाने की दुआ कर कर रहें होगे, देखना दिलचस्प होगा कि अपमान का यह घूंट इन मंत्रियों को कितना कड़वा लगता है।