Ankita Bhandari Case 24 घंटे में गिरफ्तारी का दावा!। SIT Investigation । Uttarakhand News

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उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर देश और प्रदेश की सियासत गरमा गई है। जहाँ एक तरफ उत्तराखंड पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने दावा किया है कि मामला दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था, वहीं दूसरी ओर अक्टूबर 2026 में इस केस को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं कि पुलिस की SIT जांच, कोर्ट के फैसले और वर्तमान में चल रहे इस नए विवाद के पीछे की पूरी कहानी क्या है। देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) डॉ. वी. मुरुगेशन ने अंकिता भंडारी मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई का ब्यौरा साझा किया। पुलिस के मुताबिक, जैसे ही यह संवेदनशील मामला सामने आया, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों पर तुरंत एक्शन लिया गया और 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपियों को दबोच लिया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी स्तर की एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। एसआईटी ने वैज्ञानिक, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों को जुटाकर घटना के महज 88 दिनों के भीतर अदालत में 500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया था। पुलिस और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के चलते कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। 30 मई 2025 को कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों मुख्य आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी पाते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। ये तीनों आरोपी फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे अपनी सजा काट रहे हैं। इसके साथ ही, पीड़ित परिवार की मांग और एक कथित ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद, सरकार ने मामले की पारदर्शिता के लिए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्णय भी लिया था।

अदालती फैसले और उम्रकैद की सजा के बावजूद, अंकिता भंडारी के माता-पिता अभी भी पूर्ण न्याय और मामले में छिपे ‘VIP’ चेहरे को बेनकाब करने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। अंकिता भंडारी के माता-पिता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के इंडिया गेट पर इस नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन किया। VIP एंगल की सीबीआई जांच की मांग: पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब तक इस मामले के ‘VIP’ एंगल की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ऐसी कोई भी संवैधानिक नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए।नेताओं को लिया गया हिरासत में: दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों और अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के बाद, उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर धामी सरकार को घेरने में जुट गए हैं।