उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Case) की आग एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। अंकिता के न्याय की लड़ाई लड़ रहे माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देने और दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत से रिहा किए जाने के बाद केंद्र सरकार को 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। इस अल्टीमेटम और इंडिया गेट पर देर रात हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सियासी गलियारों और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अंकिता भंडारी के माता-पिता का यह आक्रोश सिक्किम के नए राज्यपाल (Governor of Sikkim) की नियुक्ति को लेकर है। केंद्र सरकार द्वारा भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले का परिवार कड़ा विरोध कर रहा है। अंकिता के परिजनों का दावा है कि इस मामले में जिस ‘कथित VIP’ का नाम शुरू से उछाला जा रहा था, उसकी कड़ियां इस नियुक्ति से जुड़ी हैं। परिवार की मांग है कि जब तक सीबीआई (CBI) की अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को तुरंत रद्द या स्थगित किया जाए।
24 घंटे की समयसीमा देते हुए अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे अपने घर पर आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू करेंगे और इस लड़ाई को देशव्यापी आंदोलन में बदल देंगे। 14 और 15 अक्टूबर की दरम्यानी रात दिल्ली का इंडिया गेट छावनी में तब्दील हो गया था। अंकिता के माता-पिता के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा भी धरना स्थल पर पहुंचे। देर रात दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए हिरासत में ले लिया। अंकिता के माता-पिता को अलसुबह करीब 5 बजे रिहा किया गया, जिसके तुरंत बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सिक्किम के राज्यपाल पद पर दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति तुरंत रोकी जाए। इस पूरे बवाल पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय (ADG) की तरफ से भी बयान जारी किए गए हैं। सरकार और पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में पहले दिन से पूरी संजीदगी के साथ काम कर रहे हैं।