लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड कांग्रेस की नई टीम सामने आ गई, लेकिन जिस कार्यकारिणी का इंतजार महीनों से हो रहा था, उसके ऐलान के साथ ही कांग्रेस के सामने एक नया सियासी सवाल खड़ा हो गया है।जिस कांग्रेस की तरफ से छोटी और चुस्त कार्यकारिणी की बात कही जा रही थी। उसी कांग्रेस की नई टीम में पदाधिकारियों की लंबी फेहरिस्त सामने आई है।अब बीजेपी इसी को कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी बता रही है। सवाल ये है कि क्या 2027 के चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश में कांग्रेस ने अनजाने में बीजेपी को ही बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया? दोस्तो उत्तराखंड कांग्रेस में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नई प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान हो गया है, लेकिन ऐलान के साथ ही कांग्रेस के सामने एक नई सियासी चुनौती भी खड़ी होती नजर आ रही है।क्योंकि जिस संगठन को छोटा, चुस्त और चुनावी लिहाज से ज्यादा प्रभावी बनाने की बात कही जा रही थी। उसकी नई टीम में पदाधिकारियों की संख्या काफी बड़ी है और अब बीजेपी ने इसी को लेकर कांग्रेस पर तंज कसना शुरू कर दिया है। लगता है दोस्तो गोदियाल को इस बात का एहसास है कि इस कार्यकारिणी की घोषणा में बड़ी चूक कर दी, लेकिन दोस्तो मै आपको खबर बताता हूं।
दोस्तो गोदियाल और कांग्रेस ये कह रही थी उनकी नई छोटी और प्रभावी होगी हालांकि जब कार्यकारिणी की घोषणा हुई और मेने लिस्ट देखी तो वो लंबी चौड़ी दिखाई दी, लेकिन दोस्तो सवाल सिर्फ ये नहीं है कि कांग्रेस की टीम कितनी बड़ी है। सवाल ये है कि 2027 के चुनावी मैदान में क्या इतनी बड़ी टीम कांग्रेस को फायदा देगी या फिर यही टीम बीजेपी के लिए कांग्रेस पर हमला करने का मुद्दा बन जाएगी? ये मै क्यों कह रहा हूं वो आगे आप समझ जाएंगे। दोस्तो तो काफी लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड कांग्रेस को आखिरकार नई प्रदेश कार्यकारिणी मिल गई। नई टीम में गोदावरी थपलियाल को प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि 24 नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष, 36 नेताओं को प्रदेश महासचिव और 107 नेताओं को प्रदेश सचिव बनाया गया है। यानी संगठन को विस्तार देने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। दोस्तो कांग्रेस का दावा है कि नई कार्यकारिणी में अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी जगह दी गई है और अब संगठन आगामी चुनावी तैयारियों को और मजबूती से आगे बढ़ाएगा, लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है। दोस्तो इस पूरी कवायद का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर कांग्रेस के भीतर काफी समय से इंतजार था।
दोस्तो, जनवरी 2026 में सामने आई रिपोर्टों में 60 से 70 सदस्यों की अपेक्षाकृत छोटी कार्यकारिणी की चर्चा थी। दोस्तो इसके बाद महीनों तक नई टीम के गठन को लेकर इंतजार जारी रहा। जून में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की पार्टी नेतृत्व से मुलाकात के बाद कार्यकारिणी के जल्द ऐलान की उम्मीद जगी थी।लेकिन अब जब सूची सामने आई तो तस्वीर बिल्कुल अलग है।पदाधिकारियों की बड़ी संख्या ने कांग्रेस की नई टीम को लेकर सियासी बहस छेड़ दी है और बस के केंद्र में इस भारी भरकम कार्यकारिणी में मुस्लिम और बाल्मिक समाज का गौंण होना है, यानि की गायब अल्पसंख्यक नेताओं को कांग्रेस के जिम्मेदार ना समझने को लेकर सोसल मीडिया पर तरह-तरह की खबरे और विरोध कांग्रेस अंदर से उठता दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस सिर्फ वोट के खातिर अल्पसंख्यक को अपने साथ रखती है और जब टीम जगह देने की बात आई तो एक भी किसी नेता का नाम ना होना अपने अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है और और यहीं से बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया.. दोस्तो उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री खजान दास ने नई कार्यकारिणी को “जंबो कार्यकारिणी” बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने से ज्यादा नेताओं को समायोजित करने पर जोर दिया है। यानी दोस्तो बीजेपी सीधे-सीधे ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस की नई टीम चुनाव जीतने की रणनीति से ज्यादा अंदरूनी संतुलन साधने की कवायद है।हालांकि ये बीजेपी का राजनीतिक आरोप है। कांग्रेस इसे किस तरह देखती है, वो बताता हूं क्योंकि कांग्रेस के लिए नई कार्यकारिणी सिर्फ संख्या का सवाल नहीं है।
दोस्तो इसके साथ पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर पांच महत्वपूर्ण समितियों का भी गठन किया है। कार्यकारिणी समिति, घोषणापत्र समिति, अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति, एसआईआर समिति और चार्जशीट समिति। यानी दोस्तो कांग्रेस ने 2027 के चुनाव से पहले संगठन के साथ-साथ चुनावी मुद्दों और रणनीति को भी संस्थागत रूप देने की कोशिश की है। नई कार्यकारिणी समिति में गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, हरीश रावत, प्रीतम सिंह, गुरदीप सिंह सप्पल, काजी निजामुद्दीन, करन माहरा, डॉ. हरक सिंह रावत और भुवन चंद्र कापड़ी समेत वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। घोषणापत्र समिति की कमान भुवन कापड़ी को अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की जिम्मेदारी विक्रम सिंह नेगी को, एसआईआर समिति की जिम्मेदारी मनोज रावत को और चार्जशीट समिति की अध्यक्षता करन माहरा को दी गई है। अब सवाल ये है कि कांग्रेस ने इतनी बड़ी टीम क्यों बनाई? इसका एक जवाब ये हो सकता है कि 2027 का चुनाव सिर्फ चेहरे के भरोसे नहीं, बल्कि संगठन की ताकत से लड़ने की तैयारी है। दोस्तो उत्तराखंड में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बीजेपी को घेरने की नहीं है, बल्कि अपने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की भी है। दोस्तों इसीलिए नई टीम में क्षेत्रीय संतुलन, वरिष्ठ नेताओं और नए चेहरों को जगह देने की कोशिश दिखाई दे रही है। लेकिन राजनीति में हर फैसले का दूसरा पहलू भी होता है।और इस फैसले का दूसरा पहलू है। इतने बड़े संगठन को एक दिशा में चलाना। दोस्तो क्योंकि पद बढ़ाने से संगठन मजबूत होगा या संगठन में समन्वय की चुनौती बढ़ेगी। इसका जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा। दूसरी तरफ बीजेपी इस पूरे मुद्दे को 2027 की चुनावी रणनीति में इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।