Rishabh Pant के जमीन विवाद में खुलासा! | CM Dhami | Haridwar | land issue | Uttarakhand News

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दोस्तो क्रिकेट के मैदान पर अपनी बल्लेबाजी से दुनिया में नाम कमाने वाले ऋषभ पंत, अब अपने ही उत्तराखंड में एक ऐसी तलाश को लेकर चर्चा में हैं, जो पिछले तीन साल से पूरी नहीं हो पाई है। आखिर ऐसा क्या है कि पंत को अपने घर में जमीन नहीं मिल रही? पंत ने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई और अब मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में अधिकारियों को पंत से संपर्क करने के निर्देश दे दिए हैं। तो क्या अब उत्तराखंड में ऋषभ पंत को जमीन मिल पाएगी। क्या है मामला बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो दोस्तो बड़ी हैरानी होती है जब मेरे सामने दो खबरें होती है एक ये खबर की पौड़ी में दिल्ली वालों ने रातों-रात 112 पहाड़ खरीद लिया। किसी को कानों कान कोई खबर नहीं लगी। हां वो बात अलग है कि अब स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद पौड़ी में 112 नाली जमीन के खेल की जांच हो रही है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ दोस्तो उत्तराखंड के भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज और उत्तराखंड के लाल ऋषभ पंत अब अपने गृह राज्य में अपना आशियाना बनाना चाहते हैं या कोई एकैडमिक काम करना चाहते हैं। उनको जमीन नहीं मिली बल, ऐसा कैसे हो सकता है। दोस्तो पंत ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने जमीन खरीदने से जुड़ी अपनी परेशानी रखी. और दोस्तो ये तब है जब मेने आपको एक खबर दिखाई दी कि ऋषभ पंत उत्तराखंड के सबसे बड़े व्यक्तिगत आयकर दाता हैं। दोस्तो ऋषभ पंत एक ट्वीट के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। दोस्तो ऋषभ पंत का कहना है कि वह करीब तीन साल से उत्तराखंड में जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया की जटिलताओं और स्पष्टता की कमी के चलते अब तक उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक जमीन नहीं मिल पाई है।

पंत की अपील के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी जवाब देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने और पंत को नियमानुसार हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। ऋषभ पंत ने शुक्रवार रात करीब 12:46 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड से अपने लगाव का जिक्र करते हुए पंत ने कहा कि वह अपने राज्य में वापस आकर रहना चाहते हैं, लेकिन रहने के लिहाज से उनकी जरूरत के मुताबिक अच्छी और बड़ी जमीन नहीं मिल पा रही है। पंत ने मुख्यमंत्री से जमीन खरीदने की प्रक्रिया में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जमीन खरीदने की प्रक्रिया में स्पष्टता को लेकर काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं। तीन साल से प्रयास करने के बावजूद अब तक जमीन नहीं मिल पाई है। उत्तराखंड में घर बनाने की इच्छा: ऋषभ पंत ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि उन्होंने उत्तराखंड को देश-दुनिया में बढ़ावा देने के लिए काम किया है। अब वह अपने पहाड़ी लोगों के बीच लौटकर राज्य के लिए कुछ करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वह उत्तराखंड में रहकर राज्य के विकास में अपना योगदान देना चाहते हैं। इसी मकसद से उन्होंने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत तौर पर मामले को देखने की अपील की है। ऋषभ पंत ने एक अन्य पोस्ट में जमीन को लेकर अपनी इच्छा और स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने के लिए सरकार की ओर से उन्हें जमीन उपहार में मिलती है, तो यह उनके लिए सम्मान की बात होगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार से तय सरकारी दर पर जमीन खरीदने के इच्छुक हैं।

दोस्तो पंत ने कहा कि कम से कम इससे वह अपने राज्य उत्तराखंड में अपना पहला घर बना सकेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का तरीका समझ नहीं आ रहा है और इसी वजह से उन्होंने मुख्यमंत्री से मदद मांगी है। उधर दोस्तो ऋषभ पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से भी जवाब सामने आया है। मुख्यमंत्री ने पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों के जरिए देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। सीएम ने उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की पंत की भावना को भी सराहा। इधर दोस्तो ऋषभ पंत की दोनों पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कुछ यूजर्स ने पंत की मांग और जमीन खरीदने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने इसे उत्तराखंड लौटने की उनकी इच्छा से जोड़कर देखा। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने यह दावा भी किया कि पोस्ट बाद में हटाई जा सकती हैं। हालांकि ऐसी अटकलों फिलहाल सीएम की पोस्ट के बाद खत्म हो गई हैं, लेकिन दोस्तो ये बात ऋषभ पंत सीधे-सीधे भी तो कह सकते थे..उसको सवर्जनिक तोर पर करने के पीछे का कारण क्या हो सकता है।