हल्द्वानी से कांग्रेस ने 2027 के चुनाव का बिगुल तो फूंक दिया है, लेकिन सवाल ये है कि क्या खड़गे का ये ‘विजय शंखनाद’ वाकई उत्तराखंड की सियासत बदल पाएगा?हजारों की भीड़ के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार बनाने का दावा किया है। तो क्या हल्द्वानी से शुरू हुई ये हुंकार 2027 में सत्ता परिवर्तन की दस्तक है या फिर सिर्फ चुनावी दावा? दोस्तो उत्तराखंड में 2027 का सियासी रण में कुछ महीनों की दूरी है, लेकिन सियासी शंखनाद अभी से तेज हो गया है। हल्द्वानी में कांग्रेस ने आज शक्ति प्रदर्शन किया और मंच से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीधे बीजेपी पर हमला बोलते हुए 2027 में कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा कर दियाखड़गे ने कहा, अब तो इस तालाब का पानी बदल दो ये कमल के फूल कुम्हलाने लगे हैं। यानी दोस्तो साफ है, कांग्रेस अब उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन के नारे के साथ चुनावी मोड में उतर चुकी है। दोस्तो बीजेपी-RSS से लेकर प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेताओं की राजनीति तक खड़गे ने मंच से जमकर निशाना साधा। दोस्तो हल्द्वानी की धरती, कांग्रेस का मंच, हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ और निशाने पर बीजेपी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी की विशाल जनसभा से उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकने की कोशिश की। दोस्तो खड़गे ने अपने भाषण की शुरुआत उत्तराखंड की वीरभूमि को नमन करते हुए की, लेकिन कुछ ही देर में उनका भाषण सीधे सियासी हमले में बदल गया। उन्होंने बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अब राज्य में सत्ता का बदलाव होना चाहिए। अब तो इस तालाब का पानी बदल दो, कमल के फूल कुम्हलाने लगे हैं! दोस्तो खड़गे का इशारा साफ था।
कांग्रेस उत्तराखंड में बीजेपी सरकार को हटाने का दावा लेकर मैदान में उतर रही है कि यानी 2027 अभी आया नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने चुनावी नैरेटिव सेट करना शुरू कर दिया है। एक तरफ बीजेपी अपनी सरकार के कामकाज और योजनाओं को लेकर मैदान में उतरेगी, तो दूसरी तरफ कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल बनाने की कोशिश करेगी।और हल्द्वानी की रैली से कांग्रेस ने साफ संदेश दिया है—2027 के लिए लड़ाई अभी से शुरू हो चुकी है। खड़गे ने उत्तराखंड की पहचान उसकी वीरता और सेना में योगदान का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि, उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ वीरों की भूमि भी है। कुमाऊं और गढ़वाल रेजिमेंट की वीरता का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा कि इसी धरती के वीर सपूत को देश का पहला परमवीर चक्र मिला। लेकिन इसके बाद भाषण का रुख इतिहास से सीधे सियासत की तरफ मुड़ गया क्योंकि आज का दिन कांग्रेस के लिए भी बेहद राजनीतिक महत्व रखता है। 8 अगस्त 1942 यही वो तारीख है जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था।और इसी ऐतिहासिक दिन हल्द्वानी में कांग्रेस की विशाल सभा, खड़गे ने इसे कांग्रेस की विचारधारा और आज की राजनीति से जोड़ दिया। खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया, जनता को एकजुट किया और आखिरकार अंग्रेजों को देश छोड़ना पड़ा।लेकिन यहीं से कांग्रेस अध्यक्ष का हमला और तीखा हो गया। उन्होंने बीजेपी और RSS पर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान नहीं देने का आरोप लगाया। खड़गे का BJP-RSS पर बड़ा हमला, आजादी के लिए कुछ नहीं किया “उल्टा हमें देशभक्ति सिखाते हैं”
दोस्तो खड़गे ने यहीं नहीं रोका उन्होंने बीजेपी और RSS पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग ही असली देशभक्त हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी-RSS से जुड़े लोगों पर अंग्रेजों की शरण में जाने का आरोप भी लगाया। अब दोस्तो जाहिर है, कांग्रेस अध्यक्ष का ये बयान सिर्फ इतिहास की बात नहीं है।ये सीधे उस राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है जिसमें कांग्रेस बीजेपी की राष्ट्रवाद और देशभक्ति की राजनीति को चुनौती देना चाहती है। इसके बाद खड़गे ने संविधान और लोकतंत्र का मुद्दा उठाया, उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की है।और इस मुद्दे पर राहुल गांधी को कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर सामने रखा।खड़गे ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र किया। कहा कि राहुल गांधी संविधान बचाने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चले ।युवाओं किसानों गरीबों और छात्रों की आवाज उठाने का दावा भी किया। खड़गे का राहुल गांधी पर फोकस, “कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चले”, “संविधान बचाने की लड़ाई”, “युवाओं-किसानों की आवाज” और फिर दोस्तो खड़गे ने बीजेपी पर सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल दागा। क्या बीजेपी का कोई नेता लगातार जनता के बीच जाता है? खड़गे ने राहुल गांधी को जनता के बीच जाने वाला नेता बताते हुए बीजेपी नेतृत्व को सीधे चुनौती दी।यानी कांग्रेस का संदेश साफ है। जनता के बीच कौन?सवालों के साथ कौन?और 2027 में सत्ता के लिए कौन? लेकिन OAMDLA हल्द्वानी की इस रैली का सबसे बड़ा संदेश क्या है?वो है—2027।
कांग्रेस ने आज से ही उत्तराखंड की सत्ता के लिए अपना दावा पेश कर दिया है।खड़गे के भाषण में बीजेपी पर हमला था, RSS पर हमला था। देशभक्ति और आजादी की लड़ाई का जिक्र था, संविधान का मुद्दा था। राहुल गांधी की राजनीति का बचाव था और इन सबके बीच बार-बार उभरकर सामने आया एक ही टारगेट—उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन।अब सवाल ये है कि क्या कांग्रेस की ये हुंकार 2027 में सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार कर पाएगी?क्या बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस ऐसा माहौल बना पाएगी, जो उसे सत्ता तक पहुंचा सके?या फिर बीजेपी कांग्रेस के इस हमले का जवाब अपने विकास, योजनाओं और संगठन की ताकत से देगी?क्योंकि उत्तराखंड की सियासत में मुकाबला सिर्फ दो पार्टियों का नहीं है। ये मुकाबला है नैरेटिव का।कांग्रेस कह रही है—”तालाब का पानी बदलो।”बीजेपी कहेगी—सरकार का काम देखो। और जनता 2027 में दोनों के दावों का हिसाब करेगी।तो हल्द्वानी की इस विशाल जनसभा से कांग्रेस ने अपना चुनावी मूड साफ कर दिया है।नारा साफ है, बीजेपी हटाओ कांग्रेस लाओ।लेकिन सवाल अब सिर्फ नारे का नहीं है सवाल है—क्या ये हुंकार 2027 में सत्ता का रास्ता खोल पाएगी?उत्तराखंड की सियासत में अब हर सभा, हर बयान और हर हमला 2027 के चुनावी चश्मे से देखा जाएगा।हल्द्वानी से कांग्रेस ने शंखनाद कर दिया है अब जवाब बीजेपी की बारी है।