उत्तराखंड की राजधानी में प्रस्तावित मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड परियोजना के रूट संरेखण में अचानक बदलाव की आशंका को लेकर स्थानीय निवासियों का भारी विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। लगभग ₹2500 करोड़ से अधिक की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के नए रूट के विरोध में प्रभावित लोग देहरादून विधानसभा के सामने बेमियादी धरने पर बैठ गए हैं। स्थानीय संघर्ष समिति और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस नए रूट के कारण क्षेत्र के 300 से 400 से अधिक मकान और करीब 1500 से 2000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित होंगे, जिनमें अधिकांश गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार शामिल हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि वे सरकार से किसी भी प्रकार का वित्तीय मुआवजा नहीं चाहते, बल्कि उनकी एकमात्र मांग इस निर्माण कार्य को पहले से स्वीकृत पुराने रूट पर ही कराने की है।
इस बढ़ते बवाल के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय प्रशासन ने रूट में किसी भी तरह के फेरबदल के दावों को खारिज किया है। एनएचआई अधिकारियों का रुख है कि काम केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा स्वीकृत मूल योजना के अनुसार ही किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी भू-स्वामी को इस परियोजना से कोई आपत्ति है, तो वे भू-अधिग्रहण कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी (CALA) के समक्ष अपनी आधिकारिक आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। बहरहाल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन के साथ इस आंदोलन ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जिससे शहर में इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।