ज़रा सोचिए, अगर बीमारी ठीक करने के लिए खरीदी गई दवा ही नकली निकले तो क्या होगा? देहरादून में ऐसा ही एक बड़ा खुलासा हुआ है, जहां ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार करने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। आखिर कैसे चल रहा था यह पूरा खेल? किन राज्यों तक फैले हैं इसके तार? और इस कार्रवाई में क्या-क्या बरामद हुआ? पूरी रिपोर्ट में बताऊंगा। तो दोस्तो जिस दवा को आप बीमारी ठीक करने के लिए खरीदते हैं, अगर वही दवा नकली निकले तो क्या होगा? आपकी सेहत ही नहीं, आपकी जान भी खतरे में पड़ सकती है। देहरादून में ऐसा ही एक बड़ा खुलासा हुआ है, जहां ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं बनाने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। दोस्तो देहरादून के ईस्ट होप टाउन इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग, उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक मकान पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम से बनाई जा रही बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की गईं। दोस्तो, छापेमारी में दवाओं के खाली रैपर, पैकिंग सामग्री, लेबल, नकली ब्रांडिंग और दवाएं बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी जब्त की गईं। दोस्तो शुरुआती जांच में ये भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तार सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरे राज्यों तक फैले होने की आशंका है।
दोस्तो जांच एजेंसियों का मानना है कि नकली दवा बनाने वाले गिरोह प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम और पैकेजिंग का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा दे रहे थे। ऐसी दवाएं बाजार में पहुंच जातीं तो मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती थी। दोस्तो अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में देशभर के ड्रग कंट्रोलरों की बैठक में राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और नकली दवा नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई की रणनीति बनाई गई थी। उसी रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश से मिली सूचना के आधार पर देहरादून में यह कार्रवाई की गई। दरअसल दोस्तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। विभाग का कहना है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे गिरोहों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की संयुक्त कार्रवाई जारी रहेगी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था, नकली दवाएं किन-किन जिलों और राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं और इस पूरे गिरोह में कितने लोग शामिल हैं। देहरादून में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि नकली दवाओं का कारोबार अब सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय नेटवर्क का रूप ले चुका है। ऐसे में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं कि इस नेटवर्क की जड़ें आखिर कहां तक जाती हैं। दोस्तो नकली दवाओं का कारोबार सिर्फ कानून तोड़ने का मामला नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। ऐसे में यह कार्रवाई जितनी बड़ी है, उससे भी बड़ी चुनौती इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर इसे पूरी तरह खत्म करना है। अब देखना होगा कि जांच में और कौन-कौन से चेहरे सामने आते हैं और क्या इस कार्रवाई के बाद नकली दवाओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लग पाती है।