हरिद्वार की लाइफलाइन मानी जाने वाली ऊपरी गंगनहर को वार्षिक सफाई और मरम्मत कार्यों के लिए 20 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा की गई इस बंदी के कारण प्रसिद्ध हर की पैड़ी सहित हरिद्वार के सभी प्रमुख घाटों पर गंगा का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। विभाग के अनुसार, यह गंगनहर आगामी 7 नवंबर की मध्यरात्रि तक बंद रहेगी और 8 नवंबर की सुबह से घाटों पर जल का प्रवाह एक बार फिर सुचारू रूप से बहाल कर दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान नहर से गाद निकालने (डीसिल्टिंग), घाटों के समतलीकरण के साथ-साथ आगामी अर्धकुंभ मेले की तैयारियों से जुड़े निर्माण और रख-रखाव के कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
भले ही मुख्य नहर में पानी रोक दिया गया है, लेकिन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और दैनिक पूजा-अर्चना को ध्यान में रखते हुए विशेष वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भगीरथी बिंदु से हर की पैड़ी के लिए लगातार 200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि मुख्य घाट पूरी तरह सूखे न रहें और श्रद्धालुओं को आचमन व आंशिक स्नान में असुविधा न हो। इसके अतिरिक्त, शाम की प्रसिद्ध गंगा आरती के समय पानी की मात्रा को थोड़ा और बढ़ाया जाएगा। प्रशासन ने त्योहारी सीजन (दीपावली) के मद्देनजर आम जनता और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नवंबर के पहले सप्ताह तक हरिद्वार में गंगा स्नान के अपने कार्यक्रमों को टाल दें, ताकि घाटों पर चल रहे मरम्मत और व्यापक स्वच्छता अभियान को बिना किसी बाधा के समय पर पूरा किया जा सके।