Haridwar Ankita केस नार्को टेस्ट से पहले गिरफ्तारी क्यों?| Urmila Sanawar | Uttarakhand News

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दोस्तो, देवभूमि से एक ऐसा सवाल, जो अंकिता भंडारी केस में फिर हलचल पैदा कर रहा है! आखिर नार्को टेस्ट से ठीक पहले आधी रात को उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी क्यों हुई? उर्मिला तो कैमरे के सामने नार्को टेस्ट कराने की शर्त रख रही थीं, फिर ऐसा क्या हुआ कि मामला गिरफ्तारी तक पहुंच गया? और सबसे बड़ा सवाल—अंकिता केस में जिस कथित VIP का जिक्र होता रहा है, क्या उससे जुड़े सवालों के जवाब अब भी बाकी हैं? आखिर सच सामने आने से पहले इतने सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं? पूरी खबर को समझिए, क्योंकि इस मामले में हर घटनाक्रम के साथ नए सवाल सामने आ रहे हैं! दोस्तो अंकिता भंडारी हत्याकांड, देवभूमि उत्तराखंड के दामन पर लगा वो दाग, जो आज चार साल बाद भी इंसाफ की गुहार लगा रहा है। लेकिन, बीते 72 घंटों के भीतर इस केस में जो कुछ हुआ है, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है! एक अभिनेत्री एक बीजेपी के पूर्व विधायक की कथित पत्नि, जो अचानक कैमरे के सामने आती है। सोशल मीडिया पर एक कथित ‘VIP’ का नाम उछालती है। पूरी जांच की दिशा मोड़ने का दावा करती है और गरजते हुए कहती है—’मैं नार्को टेस्ट कराने को तैयार हूँ, बस अदालत मेरे नार्को टेस्ट को लाइव कैमरों के सामने टीवी पर चलवा दे!’ दोस्तो जैसे ही वो नार्को टेस्ट के लिए हां कहती है, 26 अक्टूबर की बड़ी न्यायिक सुनवाई से ठीक एक रात पहले, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में उसके घर पर आधी रात को पुलिस धावा बोल देती है! बिजली की फुर्ती से उसे दबोचा जाता है, हरिद्वार लाया जाता है और आनन-फानन में 14 दिनों के लिए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है!

दोस्तो अब आखिर उर्मिला के नार्को टेस्ट से कौन डरा हुआ है? क्या ये गिरफ्तारी वाकई 5 करोड़ की रंगदारी का मामला है, या फिर नार्को टेस्ट में वीआईपी के नाम उगलने के खौफ से रचा गया कोई चक्रव्यूह? दोस्तो ये सब हुआ 24 और 25 अक्टूबर की दरमियानी रात! जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस और यूपी पुलिस का एक ज्वाइंट ऑपरेशन चल रहा था। निशाना थीं—अभिनेत्री उर्मिला सनावर। महज 12 घंटे पहले हरिद्वार की रानीपुर कोतवाली में एक एफआईआर दर्ज होती है और बिना वक्त गंवाए पुलिस की टीम उर्मिला को उनके घर से उठा लेती है। इस गिरफ्तारी की टाइमिंग ने पूरे उत्तराखंड की सियासत में भूचाल ला दिया है। दोस्तो आखिर पुलिस का दावा क्या है? पुलिस के मुताबिक, ज्वालापुर के पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर उनके परिवार के खिलाफ अश्लील और मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।

दोस्तो इतना ही नहीं, व्हाट्सएप कॉल के जरिए रविदास धाम की करोड़ों की संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया और बदले में 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी! जान से मारने की धमकी भी दी गई। दोस्तो इसको आधार बना कर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया, मोबाइल जब्त किया और उर्मिला को सीधे कोर्ट रूम से जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। लेकिन दोस्तो कहानी में ट्विस्ट रंगदारी का नहीं, बल्कि अंकिता भंडारी केस का है! इतिहास गवाह है कि पुलिस इतनी फुर्ती आम तौर पर नहीं दिखाती। तो फिर उर्मिला के मामले में ऐसा क्या था? दरअसल, 23 अक्टूबर को देहरादून की सीबीआई कोर्ट में उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर आमने-सामने थे। दोनों ने सीबीआई जांच के तहत नार्को और पॉलिग्राफ टेस्ट के लिए रजामंदी दे दी थी। लेकिन उर्मिला सनावर ने कोर्ट के सामने एक ऐसी शर्त रख दी, जिससे बड़े-बड़े सफेदपोशों के पसीने छूट गए! उर्मिला ने मांग की कि उनका नार्को टेस्ट लाइव कैमरों के सामने और मीडिया की मौजूदगी में होना चाहिए.. दोस्तो उर्मिला का दावा था कि अगर उनका नार्को टेस्ट लाइव हुआ, तो अंकिता भंडारी केस से जुड़े कई बड़े नेताओं के नकाब उतर जाएंगे। कोर्ट ने इस मामले पर दोबारा विचार करने और अगली न्यायिक प्रक्रिया के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की थी। लेकिन 26 अक्टूबर की सुबह अदालत का दरवाजा खुलने से पहले ही, 25 अक्टूबर को उर्मिला को जेल भेज दिया गया! विपक्ष अब चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि यह टाइमिंग महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी है! दोस्तो उर्मिला की गिरफ्तारी के बाद अब उत्तराखंड का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमारी शैलजा और प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने सीधे सरकार को घेरा है। विपक्ष का सीधा सवाल है—जब उर्मिला नार्को टेस्ट के जरिए वीआईपी का सच उगलने वाली थीं, तो अचानक एक दिन पहले इतनी जल्दबाजी में उन्हें जेल क्यों भेजा गया? क्या सरकार किसी रसूखदार को बचाना चाहती है? हालांकि, दूसरी तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने इन सभी दावों और ऑडियो क्लिप्स को फर्जी करार देते हुए पहले ही मुकदमा दर्ज कराया है और इसे छवि खराब करने की साजिश बताया है। कानून अपना काम कर रहा है, उर्मिला सनावर पर रंगदारी के आरोप हैं और उनके खिलाफ पहले से भी कई मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। लेकिन देश की जनता के जेहन में एक ही यक्ष प्रश्न घूम रहा है—क्या उर्मिला की इस गिरफ्तारी के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड का वो ‘VIP’ राज हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो जाएगा? क्या नार्को टेस्ट की वो लाइव वाली शर्त ही उर्मिला पर भारी पड़ गई?