उत्तराखंड के रुद्रपुर में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने और धामी सरकार को चेतावनी देने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मौलाना मुफ्ती मुजीब को गिरफ्तार कर लिया है। Maulana’s statement in Rudrapur सोशल मीडिया पर बयान का वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। रामपुर के दरियाल टांडा निवासी मुफ्ती मुजीब ने रुद्रपुर के त्रिशूल चौक पर आयोजित एक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा था कि “अगर सरकार ने मदरसे बंद किए, तो आप सोच भी नहीं सकते कि मुसलमान क्या हाल करेंगे”। पुलिस ने धार्मिक जुलूस के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है और जुलूस की प्रबंधक कमेटी से भी पूछताछ की जा रही है। इस संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह केवल एक मौलाना का बयान नहीं, बल्कि एक ऐसी मानसिकता और विचारधारा है जो संविधान को नहीं मानती और समाज को धमकाती है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि देवभूमि उत्तराखंड में किसी को भी कानून हाथ में लेने या धमकी देने की छूट बिल्कुल नहीं दी जाएगी।
पुलिस के अनुसार भाषण के दौरान उन्होंने मदरसों को बंद किए जाने की स्थिति में परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी। इसके अलावा वीडियो में वह ईदगाह की भूमि वापस करने की मांग करते हुए भी नजर आ रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने त्रिशूल चौक और आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके साथ ही सभा के दौरान मौजूद लोगों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई गई। पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में देर रात तक जांच की गई। पुलिस ने इसके बाद मुफ्ती मुजीब को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। सीएम धामी ने कहा त्रिशूल चौक पर दिया उन्मादी भाषण एक व्यक्ति द्वारा भाषण भर नहीं है, क्योंकि मौलाना एक विचारधारा है, जो अतिक्रमण करती है। भारत के संविधान को नहीं मानती है, लेकिन अब सरकार बदल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के उपरांत व्यवस्था का राज कानून का राज स्थापित हुआ है। जिसने भी उन्मादी भाषण दिया उनके खिलाफ कानून के हिसाब से कार्यवाही होगी. प्रशासन उन्हे ढूंढ रहा है।