भारत-चीन की जंग में जो गांव खाली कराए गए थे..अब वहां से फिर से रौनक लौटने वाली है !
चीन से सटे गांवों को लेकर सरकार का नया प्लान तैयार…चीन की हालत पतली…खड़ी होगी दीवार !
चीन की चालाकी को सरकार करेगी फेल…आखिरी गांवों तक पहुंचाने वाली है रेल
दुश्मन को अपने विकास से हराया जा सकता है…भारत के इस समय सिर्फ दो ही दुश्मन है…पाकिस्तान तो था ही…अब चीन भी हो चुका है…चीन कभी नहीं चाहता की भारत की तरक्की हो…इसिलिए चीन भारत के सटे गांवों को लेकर कुछ न कुछ साजिश करता रहता है…;चीन इसी चाल को कमजोर करने के लिए भारत ने भी अब बॉर्डर वाले क्षेत्रों में रेकी बढ़ा दी है…यानी जो गांव चीन से सटे हैं…जो चीन के करीब आते हैं..उन गांवों को अब फिर से जिंदा करने की तैयारी चल रही है…यही वजह है कि..चीन भारत के इस कदम से चिढ़ चुका है…उत्तराखंड में भी भारत सरकार खास रणनीति के तहत चीन की चाल को फेल कर रही है…इसके लिए सरकार ने गांवों को लेकर एक ठोस ऱणनीति बनाई है…इस रणनीति का मकसद साफ है कि..चीन को दिखाना है कि..हमारे गांव दिल्ली से भरे ही दूर हैं…लेकिन चीन ये जान ले एक एक गज की जमीन के लिए भारत का हर नागरिक अपनी जान लगा देगा…इसी कदम में मजबूती दिखाने के लिए सरकार ने ये योजना बनाई है…और तय किया है कि..किस रणनीति के तहत कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा….चीन की चाल को फेल करने की सारी योजना भारत ने उत्तराखंड के एक गांव से शुरू किया है…आज हम उसी गांव में आपको लेकर चलने वाले हैं…और दिखाने वाले हैं कि..ऐसा गांव को लेकर क्या काम सरकार कर रही है…
– उत्तराखंड का उत्तरकाशी काफी फेमस जिला है…उत्तरकाशी की चीन सीमा से लगा जादूंग गांव फिर से आबाद होगा….गांव में खंडहर हो चुके घरों के जीर्णोद्धार की योजना पर काम शुरू हो गया है….केंद्र औऱ राज्य सरकार की सीमांत गांव को दोबारा बसाने की योजना के तहत हाल में वास्तुविद् केसी कुड़ियाल ने गांव में बने पुराने घरों के जीर्णोद्धार के लिए उनका अवलोकन किया….गांव में छह भवन खंडहर हो चुके हैं जिनके जीर्णोद्धार के साथ कुल दस घर तैयार किए जाएंगे…. इसके लिए जल्द ही डीपीआर तैयार की जाएगी…बस फिर क्या था…भारत की ये तैयारी खास है….जो चीन को परेशान करने वाला है…..इसके लिए सरकार ने पूरी तैयारी भी की है…अगर आप केंद्र सरकार औऱ राज्य सरकार की तैयारी सुनेंगे…और प्लान को समझेंगे तो दांतों तले ऊंगली दबा लेंगे…सरकार ऐसा क्यों कर रही है..और इसके पीछे क्या मकसद हो सकता है…अगले एक मिनट में हम आपको वो भी बताने वाले हैं….दरअसल केंद्र सरकार ने देश के सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना तैयार की है….इसी योजना के तहत यहां चीन सीमा से लगे जादूंग गांव को फिर से बसाने की योजना है जिसके तहत गांव में खंडहर हो चुके घरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा….गांव के जीर्णोद्धार के लिए प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने वास्तुविद् केसी कुड़ियाल की कंपनी केसी कुड़ियाल एंड एसोसिएट्स को जिम्मेदारी सौंपी है….
भारत-चीन सीमा पर कभी नेलांग और जादूंग गांव आबाद हुआ करते थे जिसमें जाड़-भोटिया समुदाय के करीब 50 परिवार निवास करते थे…. लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान इन दोनों गांवों को खाली कराया गया….नेलांग गांव में अब ज्यादातर क्षेत्र में आईटीबीपी और सेना काबिज है जिसके चलते यहां पुराने घर नहीं बचे हैं….बताया कि राज्य सरकार गांव के जीर्णोद्धार के लिए दस करोड़ का बजट खर्च करने को तैयार है…. गांव के आबाद होने से क्षेत्र में पर्यटन के साथ सामरिक मजबूती भी मिलेगी… पर्यटन विभाग सीमांत जादूंग गांव में खंडहर हो चुके भवनों का जीर्णोद्धार करवा रहा है… इन भवनों के जीर्णोद्धार के बाद इन्हें होमस्टे के रूप में संचालित करने की योजना है…