चमोली में कठिन राहों पर मां नंदा की डोली!आस्था के आगे बौने हुए पहाड़ | Uttarakhand News

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चमोली जिले की दुर्गम वादियों में इन दिनों पारंपरिक लोक जात यात्रा की दिव्य छटा बिखरी हुई है, जहां मां नंदा की डोली को उनके मायके से विदा करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। चमोली के अत्यंत दुर्गम, संकरे और पथरीले रास्तों पर जब मां नंदा देवी की डोली आगे बढ़ती है, तो वहां का नजारा इंसानी जज्बे और अटूट विश्वास की अनूठी मिसाल पेश करता है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड, खड़ी चढ़ाई और अनपेक्षित रूप से बदलते मौसम की चुनौतियों को मात देकर भक्त पूरी श्रद्धा के साथ हिमालय की ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। ढोल-दमाऊं की पारंपरिक थाप और ‘जय मां नंदा’ के गगनभेदी जयकारों के बीच श्रद्धालुओं के इस अथाह उत्साह को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो आस्था के इस पावन सैलाब के आगे विशालकाय पहाड़ भी बौने साबित हो गए हों।यह पावन यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और लोक परंपराओं का एक जीवंत प्रतीक भी है। चमोली के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु मां नंदा को अपनी बेटी और बहन के रूप में पूजते हैं, और उन्हें उनके ससुराल विदा करते समय भावुक हो उठते हैं। जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि दुर्गम रास्तों पर यात्रा सुचारू रूप से चलती रहे। प्रकृति की गोद में बसी इस देवभूमि में भक्ति, संस्कृति और हिमालयी भूभाग का यह विहंगम संगम हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रहा है और सदियों पुरानी इस लोक परंपरा को और अधिक सुदृढ़ बना रहा है।