दोस्तो, अंकिता भंडारी केस में CBI की जांच से जुड़े नए घटनाक्रम ने आखिर इतने सवाल क्यों खड़े कर दिए हैं? हरिद्वार में पूर्व विधायक सुरेश राठौर से पूछताछ, सहारनपुर में अभिनेत्री उर्मिला सनावर के घर पहुंची टीम और 48 मिनट की कथित रिकॉर्डिंग—आखिर इन सबके बीच क्या कनेक्शन है? उर्मिला सनावर का दावा है कि उनके घर पहुंचे लोग CBI के अधिकारी थे या नहीं, इस पर सवाल हैं। वहीं, कथित ऑडियो को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। क्या जांच में इन सवालों के जवाब मिलेंगे? आखिर इस पूरे मामले में अब कौन-सा नया तथ्य सामने आएगा? उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गूंज जब दिल्ली के इंडिया गेट तक पहुंची, तो सालों से सुस्त पड़ी केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI अचानक ऐसे खूंखार और आक्रामक मोड में आ गई है, जिसने उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक हड़कंप मचा दिया है! सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने शनिवार देर शाम हरिद्वार में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ को उनके आवास से उठाया और भेल स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस ले जाकर करीब 3 से 4 घंटे तक बंद कमरे में तीखे सवालों की बौछार कर दी! खेल यहीं नहीं रुका; इसके तुरंत बाद सीबीआई की टीम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में अभिनेत्री उर्मिला सनावर के घर 3 गाड़ियां लेकर पहुंच गई! लेकिन इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच, खुद अभिनेत्री उर्मिला ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर ऐसे गंभीर और सनसनीखेज सवाल उठा दिए हैं, जिसने जांच एजेंसी की नीयत को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है! उर्मिला ने पूछा है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर घुसने वाले असली सीबीआई थे या सीबीआई की आड़ में कोई गुंडे? आखिर क्यों अचानक इस केस में इतनी बड़ी हलचल हुई है?
दोस्तो अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी (VIP) चेहरे को बेनकाब करने की मांग को लेकर जब देवभूमि का गुस्सा उबाल पर था, तब दिल्ली में दर्ज हुए मुकदमे के बाद सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने उत्तराखंड की धरती पर वो कदम रखा है जिसने भूचाल ला दिया है। किसी को कानों-कान खबर नहीं थी, लेकिन शनिवार की देर शाम हरिद्वार के भेल स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में सीबीआई के बड़े अधिकारियों ने डेरा डाल दिया। जांच एजेंसी की टीम सीधे ज्वालापुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ के आवास पर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ गेस्ट हाउस ले आई। लगभग 3 से 4 घंटे तक चले इस सवाल-जवाब के सिलसिले ने साफ कर दिया कि सीबीआई अब उस अदृश्य वीआईपी तक पहुंचने के लिए कड़ियां जोड़ रही है। दोस्तो आखिर पूर्व विधायक और इस केस का क्या कनेक्शन है, इसे समझना बेहद जरूरी है। दरअसल, यह पूरा बखेड़ा कुछ महीने पहले तब शुरू हुआ था जब पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ और सहारनपुर की अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच मोबाइल पर बातचीत का एक कथित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस ऑडियो में कथित तौर पर अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मुख्य ‘वीआईपी’ गट्टू और कुछ बड़े भाजपा नेताओं के नामों का उल्लेख किया गया था। दोस्तो भले ही सुरेश राठौड़ इसे एआई (AI) द्वारा तैयार किया गया फर्जी ऑडियो बताते रहे हों, लेकिन इस खुलासे के बाद जनता का ऐसा भारी दबाव बना कि सरकार को सीबीआई जांच की संस्तुति करनी ही पड़ी। इसी वायरल ऑडियो और कोर्ट में जमा किए गए साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने सुरेश राठौड़ से कड़े सवाल पूछे। लेकिन हैरान करने वाली बात देखिए— पूछताछ के बाद जैसे ही मीडिया ने सुरेश राठौड़ से उर्मिला सनावर को लेकर सवाल पूछा, वो बुरी तरह उखड़ गए और साफ कह दिया कि— “मैं किसी उर्मिला सनावर को नहीं जानता! इधर हरिद्वार में सुरेश राठौड़ से पूछताछ खत्म हुई, और उधर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गोविंद नगर में एक नया हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। अभिनेत्री उर्मिला सनावर के घर अचानक तीन गाड़ियां आकर रुकीं, जिनमें से उतरे लोगों ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताया। लेकिन इस रेड या पूछताछ ने एक बहुत बड़ा कानूनी और सुरक्षा से जुड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दोस्तो उर्मिला सनावर ने सीधे मीडिया के सामने आकर और सोशल मीडिया पर सीबीआई की इस रेड पर तीखे सवाल दागे। उर्मिला का कहना है कि— “सीबीआई ने आने से पहले उन्हें कोई लिखित या मौखिक सूचना नहीं दी। क्या वो सच में सीबीआई की टीम थी या सीबीआई की आड़ में कोई गुंडे थे जो मुझे डराने आए थे?” उर्मिला ने आरोप लगाया कि ये लोग बिना किसी वैध नोटिस के उनके घर में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, जिसने जांच की निष्पक्षता पर ही एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
दोस्तो अभिनेत्री उर्मिला ने करीब 4 घंटे तक चली इस पूछताछ के बाद जांच एजेंसी की गंभीरता को पूरी तरह एक्सपोज कर दिया। उर्मिला का दावा है कि सीबीआई की टीम इस बेहद संवेदनशील केस में बेहद आधी-अधूरी जानकारी और तैयारी के साथ आई थी। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की मुख्य कड़ी यानी 48 मिनट की वो मूल कॉल रिकॉर्डिंग गायब है, जिसके बारे में सीबीआई के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। दोस्तो अब सवाल गहरा रहा है कि जब अंकिता के माता-पिता दिल्ली में सीबीआई निदेशक से मिलकर निष्पक्ष जांच का भरोसा ले चुके हैं, तब धरातल पर जांच करने वाली टीम इतनी बेपरवाह और बिना प्रोटोकॉल के क्यों काम कर रही है? क्या वाकई किसी बड़े रसूखदार को बचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है या फिर जांच को जानबूझकर उलझाया जा रहा है? दोस्तो ताबड़तोड़ कार्रवाई, पूर्व विधायक से लंबी पूछताछ और अभिनेत्री के सनसनीखेज आरोपों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बेहद खतरनाक और रहस्यमयी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां सीबीआई सच उगलवाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उठ रहे ये सवाल साफ कर रहे हैं कि इंसाफ की यह डगर अभी बेहद कांटों भरी है। दोस्तो जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी किसी मामले को अपने हाथ में लेती है, तो जनता को उम्मीद होती है कि अब सच के चेहरे से नकाब उतरेगा। लेकिन अंकिता भंडारी केस में जिस तरह से सीबीआई बिना पूर्व सूचना के अभिनेत्री के घर पहुंचती है, और अभिनेत्री खुद उन पर आधी-अधूरी तैयारी का आरोप लगाती हैं, वो इस पूरे केस की साख को हिलाने के लिए काफी है। पूर्व विधायक का याददाश्त भूल जाना और उर्मिला के तीखे सवाल, यह साफ कर रहे हैं कि 2027 के महासमर से पहले यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा बारूद बनने जा रहा है। क्या सीबीआई वाकई उस असली वीआईपी तक पहुंच पाएगी?