पप्पू गिरधारी की जमानत खारिज! | Uttarakhand News

Spread the love

देहरादून में रेखा आर्य विवाद ने अब कौन-सा नया मोड़ ले लिया है? पप्पू गिरधारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद क्या गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है? आखिर कोर्ट में ऐसी कौन-सी दलील दी गई, जो उनके पक्ष में काम नहीं आई? और अब आगे क्या होगा? देखिए, इस पूरे विवाद की बड़ी अपडेट! दोस्तो  देवभूमि उत्तराखंड की सबसे हाई-प्रोफाइल घरेलू जंग अब पुलिस के कमरों से निकलकर अदालत की चौखट पर एक बेहद खूनी कानूनी मोड़ ले चुकी है! कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को देहरादून की विशेष SC/ST अदालत से तगड़ा और करारा झटका लगा है। दोस्तो गिरफ्तारी के खौफ से कांप रहे पप्पू गिरधारी ने अपनी पत्नी के ‘मंत्री पद और रसूख’ का हवाला देकर जो अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, उसे माननीय कोर्ट ने पूरी तरह से नामंजूर कर दिया है। इस फैसले के आते ही पप्पू गिरधारी ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया है और वो अंडरग्राउंड हो गए हैं, जबकि देहरादून पुलिस की टीमें उनकी तलाश में यूपी के बरेली तक खाक छान रही हैं। आखिर अदालत में वो कौन सी बहस हुई जिसने गिरधारी साहू के वकीलों के सारे दावों को ध्वस्त कर दिया? दोस्तो उत्तराखंड सरकार की सबसे ताकतवर महिला मंत्रियों में से एक रेखा आर्या द्वारा अपने पति के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे में कानून का शिकंजा कस गया है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) अंजलि बेंजवाल की अदालत ने आरोपी पति गिरधारी लाल साहू की अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।

कैंट थाने में दर्ज इस मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने खुद कोर्ट न आकर अपने पैरोकार के जरिए राहत की भीख मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने साफ कह दिया कि प्रथम दृष्टया यह मामला अग्रिम जमानत देने योग्य बिल्कुल नहीं है, चलिए आपको बताते हैं कि अदालत के भीतर दोनों पक्षों के बीच क्या तीखी बहस हुई। बचाव पक्ष के वकीलों की दलील गिरधारी लाल साहू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह 22 साल पुरानी शादी का एक सामान्य और पैसों से जुड़ा घरेलू विवाद है। बचाव पक्ष के वकीलों की दलील, उन्होंने दलील दी कि कथित अपमानजनक और जातिसूचक शब्द घर के अंदर एक बंद कमरे में कहे गए थे, इसलिए इसे ‘सार्वजनिक स्थान’ या ‘पब्लिक व्यू’ का अपराध नहीं माना जा सकता और एससी-एसटी एक्ट की धारा १८ के तहत अग्रिम जमानत पर प्रतिबंध यहाँ लागू नहीं होना चाहिए। सरकारी वकील का करारा पलटवार, विशेष लोक अभियोजक गोविंद सिंह ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि प्राथमिकी में स्पष्ट लिखा है कि आरोपी ने मंत्री आवास पर तैनात स्टाफ के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में जातिसूचक शब्द कहे। और दोस्तो माननीय जज ने सरकारी पक्ष की दलील को सही माना और कहा कि जिस कमरे में स्टाफ के अन्य लोग मौजूद हों, वह ‘दृष्टिगोचर स्थान’ यानी पब्लिक व्यू ही कहलाएगा, और इसी आधार पर अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया।

दोस्तो गिरधारी लाल साहू ने अपनी याचिका में साफ़ लिखा था कि उसकी पत्नी कैबिनेट मंत्री हैं और वो अपने राजनीतिक पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे जेल भिजवा सकती हैं। जैसे ही शनिवार को कोर्ट से झटका लगा, गिरधारी लाल साहू का यह डर हकीकत में बदलने लगा। दोस्तो मुकदमा दर्ज होने और कोर्ट से राहत न मिलने के बाद से ही आरोपी गिरधारी लाल साहू ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर दिया है और वो पूरी तरह अंडरग्राउंड हो गए हैं। दून पुलिस और एसआईटी की एक विशेष टीम साहू की तलाश में उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित ठिकानों पर दबिश देने पहुंची थी, लेकिन आरोपी के पहले ही फरार हो जाने के कारण पुलिस टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। पुलिस अब उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी और तेज़ करने जा रही है। वहीं दोस्तो दूसरी तरफ, इस महा-विवाद की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) भी अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है। एसआईटी प्रभारी जया बलोनी के मुताबिक, बीते रविवार को उत्तराखंड के नए राज्यपाल के देहरादून आगमन और सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्तता के कारण वीआईपी ड्यूटी के चलते मंत्री के बयान दर्ज नहीं हो पाए थे। लेकिन आज, यानी सोमवार को राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह के संपन्न होने के तुरंत बाद, SIT की टीम अस्पताल या शासकीय आवास पर पहुंचकर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के विस्तृत और विधिवत बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर सकती है। इसके साथ ही मंत्री द्वारा सौंपे गए कथित धोखाधड़ी के दस्तावेजों और विवादित ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच भी साथ-साथ चल रही है।