रामशरण नौटियाल समेत BJP के 4 बड़े कद्दावर नेता कांग्रेस में शामिल!दोस्तो, उत्तराखंड में 2027 के चुनाव से पहले क्या कांग्रेस ने बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है? रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी और बीजेपी से जुड़े कई नेताओं के पाला बदलने के क्या सियासी मायने हैं? क्या जौनसार-बावर और विकासनगर में राजनीतिक समीकरण बदलने वाले हैं? और इस सियासी उलटफेर का बीजेपी पर कितना असर पड़ेगा? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने से पहले ही सियासत का वो सबसे बड़ा और खूनी तख्तापलट हो चुका है, जिसने भारतीय जनता पार्टी के खेमे में हड़कंप मचा दिया है! अभी कल ही की तो बात है जब बीजेपी के प्रवक्ता ने कांग्रेस से आए नेताओं को ‘गधा-घोड़ा’ कहकर अपमानित किया था, और आज दिल्ली दरबार से उस अपमान का ऐसा करारा और लाइव हिसाब हुआ है कि देहरादून से लेकर दिल्ली तक बीजेपी के पैरों तले से जमीन खिसक गई है! दोस्तो विकासनगर और चकराता विधानसभा सीट को लेकर इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर आ रही है। मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस का दामन थाम लिया है! खेल सिर्फ नौटियाल तक सीमित नहीं है; दिल्ली में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और यशपाल आर्य ने मिलकर बीजेपी के उस सबसे मजबूत किले में ऐसी महा-सेंधमारी की है, जिसने विधायक मुन्ना सिंह चौहान की रातों की नींद उड़ा दी है! आखिर कौन-कौन से वो बड़े सूरमा हैं जिन्होंने बीजेपी को ठेंगा दिखाकर हाथ का साथ चुना है? और इस महा-उलटफेर के उत्तराखंड की राजनीति में क्या गहरे मायने हैं?
दोस्तो इसे कहते हैं राजनीति की बिसात पर वो शह और मात का खेल, जिसे भांपने में बीजेपी का पूरा खुफिया और रणनीतिक तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ! पर्वतांचल वॉलीबॉल लीग के मंच पर जब विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने रामशरण नौटियाल से हाथ नहीं मिलाया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि इसका बदला इतनी जल्दी और सीधे देश की राजधानी दिल्ली में लिया जाएगा। दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में उत्तराखंड कांग्रेस के रणनीतिकारों ने एक ऐसा चक्रव्यूह रचा, जिसने विकासनगर और चकराता के पूरे राजनीतिक भूगोल को हिलाकर रख दिया। हाल ही में बीजेपी से इस्तीफा दे चुके कद्दावर नेता रामशरण नौटियाल ने आज अपने समर्थकों की भारी फौज के साथ कांग्रेस की लालटेन को थामकर ‘हाथ’ को और मजबूत कर दिया है। दोस्तो बीजेपी के लिए यह झटका सिर्फ रामशरण नौटियाल के जाने का नहीं है, बल्कि यह जौनसार-बावर और पछवादून क्षेत्र में संगठन की रीढ़ को उखाड़ फेंकने जैसा है। कांग्रेस में शामिल होने वाले चेहरों की ताकत, धर्मेंद्र ठाकुर’ विकासनगर नगरपालिका के लगातार छह बार के सभासद और दो बार के डीपीसी (DPC) सदस्य। इन्हें पूरे क्षेत्र में विधायक मुन्ना सिंह चौहान का सबसे वफादार, सबसे करीबी और ‘दाहिना हाथ’ माना जाता था। धर्मेंद्र ठाकुर का जाना मुन्ना चौहान के अपने ही घर में सबसे बड़ी बगावत है। सूरत सिंह चौहान, दो बार के जिला पंचायत सदस्य और साल 2022 के विधानसभा चुनाव में चकराता सीट पर बीजेपी के मुख्य चुनाव प्रभारी। वेस्ट होप टाउन के प्रधान रहे सूरत सिंह का जाना चकराता में बीजेपी को पूरी तरह अनाथ कर गया है। विजय महेंद्रू, पूर्व भाजपा पदाधिकारी और जमीन से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता, जो लंबे समय से बीजेपी की नीतियों से नाराज चल रहे थे।
दोस्तो इस तिकड़ी और नौटियाल के गठजोड़ ने एक ही झटके में बीजेपी के स्थानीय कैडर को मटियामेट कर दिया है। अब दोस्तो इस महा-उलटफेर के गहरे सियासी मायनों को समझिए। उत्तराखंड की चकराता विधानसभा सीट पिछले कई दशकों से कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रीतम सिंह का अभेद्य किला रही है। साल 2022 में बीजेपी ने इसी रामशरण नौटियाल को आगे कर प्रीतम सिंह को उनके ही घर में कड़ी टक्कर दी थी। दोस्तो अब जबकि रामशरण नौटियाल खुद कांग्रेस के पाले में आ गए हैं, और चकराता के बीजेपी प्रभारी सूरत सिंह चौहान भी उनके साथ हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि 2027 के चुनाव में चकराता सीट पर बीजेपी की जमानत बचना भी मुश्किल हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, विकासनगर सीट पर मुन्ना सिंह चौहान के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी चरम पर है। धर्मेंद्र ठाकुर जैसे जमीन से जुड़े नेता के कांग्रेस में आने से विकासनगर सीट पर भी कांग्रेस का पलड़ा अब २० हजार से ज्यादा वोटों से भारी दिखाई देने लगा है। जौनसार की पारंपरिक राजनीति में नौटियाल परिवार का अपना एक बड़ा रसूख है, जिसका सीधा फायदा अब आगामी चुनावों में कांग्रेस को मिलना तय है। दोस्तो राजनीतिक विश्लेषक इसे बीजेपी के हालिया ‘गधे-घोड़े’ वाले बयान का पहला सीधा और आत्मघाती साइड-इफेक्ट मान रहे हैं। जब बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस से आए नेताओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई थी, तभी से यह तय था कि कांग्रेस से बीजेपी में गए नेताओं का एक बड़ा धड़ा अब अपनी ‘घर-वापसी’ की योजना बना रहा है। गणेश गोदियाल ने दिल्ली में बैठकर इस असंतोष की आग को हवा दी और बीजेपी के कद्दावर चेहरों को अपने पाले में खींच लिया। यह दलबदल साफ संदेश है कि बीजेपी की ‘कथित विचारधारा की वाशिंग मशीन’ अब अपने ही नेताओं का दम घोट रही है, और आने वाले दिनों में ऐसे कई और बड़े विकेट राज्यभर में गिर सकते हैं। दोस्तो दिल्ली में रची गई इस सियासी स्क्रिप्ट ने देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित बीजेपी मुख्यालय में सन्नाटा पसरा दिया है। रामशरण नौटियाल, धर्मेंद्र ठाकुर और सूरत सिंह चौहान का कांग्रेस में जाना महज़ एक जॉइनिंग नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के ‘मिशन 2027’ के रथ का पहिया पंचर करने जैसा है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और महेंद्र भट्ट इस भयंकर राजनीतिक डैमेज को कंट्रोल करने के लिए क्या नया पासा फेंकते हैं। दोस्तो तो इसे कहते हैं राजनीति का असली मास्टरस्ट्रोक। जहां बीजेपी राज्यसभा चुनाव के जरिए दलित कार्ड खेलकर खुद को मजबूत दिखा रही थी, वहीं कांग्रेस ने दिल्ली में बैठकर जौनसार-बावर और पछवादून की पूरी जमीन ही बीजेपी के नीचे से खिसका दी है। रामशरण नौटियाल और मुन्ना चौहान के करीबियों का कांग्रेस में जाना साफ कर रहा है कि 2027 की जंग बेहद दिलचस्प और एकतरफा होने की राह पर चल पड़ी है। क्या बीजेपी इस झटके से उबर पाएगी?