Pithoragarh इतिहास में पहली बार! साक्षात महा-चमत्कार! | OM Parvat | Adikailash | Uttarakhand News

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एक पर्वत और उस पर एक साथ दो-दो ‘ॐ’ की आकृतियां! उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से आई इन तस्वीरों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। आखिर ओम पर्वत पर इस बार ऐसा क्या हुआ, जो पहले कभी देखने को नहीं मिला? क्या ये कुदरत का अनोखा नजारा है या महादेव की कोई अद्भुत लीला? आदि कैलाश यात्रा पर पहुंचे श्रद्धालुओं की नजरें भी इस दुर्लभ दृश्य पर टिक गई हैं। आखिर दो ‘ॐ’ की आकृतियां कैसे उभरीं? देखिए इस खास रिपोर्ट में! दोस्तो सनातन संस्कृति में ‘ॐ’ को केवल एक शब्द नहीं, बल्कि पूरी ब्रह्मांड की ध्वनि और साक्षात शिव का स्वरूप माना गया है। और जब यही ‘ॐ’ किसी ऊंचे हिमालयी पर्वत पर कुदरती तौर पर बर्फ से लिखा दिखाई दे, तो श्रद्धा से सिर अपने आप झुक जाता है। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की पावन व्यास घाटी से इस वक्त एक ऐसी अलौकिक और विस्मयकारी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के शिव भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया है! दोस्तो आदि कैलाश की पवित्र यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को इस बार ओम पर्वत पर वो दुर्लभ नजारा देखने को मिला है जो इतिहास में शायद पहले कभी नहीं देखा गया। अमूमन दिखाई देने वाली एक ‘ॐ’ की आकृति की जगह, इस बार पर्वत की बर्फीली चोटियों पर एक साथ दो अलग-अलग ‘ॐ’ की दिव्य आकृतियां उभरकर सामने आई हैं! कुदरत के इस चमत्कारी दृश्य ने भू-वैज्ञानिकों से लेकर संतों तक, हर किसी को हैरत में डाल दिया है। दोस्तो ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के उद्घोष से गूंजती देवभूमि उत्तराखंड! एक तरफ चारधाम यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर है, तो दूसरी तरफ भारत-चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ के धारचूला से एक ऐसी तस्वीर आई है, जिसे देखकर आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है। करीब 5,590 मीटर यानी साढ़े अठारह हजार फीट से भी ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित पौराणिक ओम पर्वत पर कुदरत ने एक नया इतिहास लिख दिया है। आदि कैलाश की यात्रा पर नाभीढांग पहुंचे तीर्थयात्रियों ने जब सुबह अपनी नजरें इस पवित्र चोटी की तरफ उठाईं, तो वहां का नजारा देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। इस रहस्यमयी पर्वत पर सदियों से केवल एक ‘ॐ’ की आकृति दिखाई देती थी। काले पत्थरों के बीच जब सफेद बर्फ जमती थी, तो वो हूबहू ‘ॐ’ का आकार ले लेती थी। लेकिन इस बार प्रकृति ने अपनी कलाकारी का ऐसा जादू बिखेरा है कि मुख्य चोटी पर एक साथ दो अलग-अलग ‘ॐ’ के निशान साफ और स्पष्ट नजर आ रहे हैं। यह एक ऐसा दुर्लभ संयोग है, जिसे इस क्षेत्र के स्थानीय बुजुर्गों ने भी अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा। इस नजारे को देखकर ऐसा लग रहा है मानो साक्षात महादेव ने देवभूमि के इस पर्वत पर अपनी उपस्थिति का दोहरा प्रमाण दे दिया हो।

दोस्तो कुदरत के इस अद्भुत करिश्मे को देखने के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कंपकंपाती ठंड और ऑक्सीजन की कमी के बीच भी यात्रियों का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। कोई इसे कलयुग में भगवान शिव का साक्षात आशीर्वाद बता रहा है, तो कोई इसे सनातन धर्म की बढ़ती वैश्विक साख से जोड़कर देख रहा है। इस समय आदि कैलाश और ओम पर्वत के यात्रा मार्ग—जैसे गुंजी, कुटी और नाभीढांग में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। सोशल मीडिया पर भी ये तस्वीरें और वीडियो आग की तरह वायरल हो रहे हैं और देश-विदेश से लोग इस दिव्य नजारे के डिजिटल दर्शन कर रहे हैं। लेकिन दोस्तो जहां एक तरफ आस्था का ये सैलाब उमड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इसे समझने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। भू-वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे पूरी तरह से भौगोलिक और मौसमी कारण हैं। दरअसल, हाल के दिनों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम में काफी बदलाव आया है। ओम पर्वत की चट्टानों में कई प्राकृतिक दरारें (Crevices) और खांचे बने हुए हैं। इस बार जब तेज हवाओं के साथ भारी बर्फबारी हुई, तो बर्फ केवल मुख्य खांचे में ही नहीं, बल्कि उसके समानांतर बनी दूसरी दरारों में भी जाकर जमा हो गई। हवा के खास कोण (Angle) और कड़कड़ाती धूप के कारण बाकी हिस्सों की बर्फ पिघल गई, लेकिन उन दरारों में जमी बर्फ बच गई, जिसने एक और ‘ॐ’ का आकार ले लिया। दोस्तो वजह चाहे आस्था से जुड़ी हो या विज्ञान से, लेकिन इस चमत्कार ने व्यास घाटी की इस यात्रा में चार चांद लगा दिए हैं। जब से धारचूला से लिपुलेख तक की सड़क बनी है, तब से आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन करना बेहद आसान हो गया है और हर साल यहां रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सीमांत क्षेत्र होने के कारण भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। लेकिन इस बार जिन भी भाग्यशाली यात्रियों को ये दो ‘ॐ’ एक साथ देखने को मिले हैं, उनके लिए यह यात्रा जीवन भर न भूलने वाला एक अलौकिक संस्मरण बन चुकी है। दोस्तो तो देखा आपने! देवभूमि उत्तराखंड की महिमा अपरंपार है। यहां का कंकर-कंकर शंकर माना जाता है, और ओम पर्वत पर एक साथ दो ‘ॐ’ की आकृतियों का उभरना इस बात का साक्षात गवाह है कि प्रकृति के पास आज भी इंसानी सोच से परे कई ऐसे रहस्य हैं, जो हमें दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देते हैं। अगर आप भी महादेव के भक्त हैं, तो कमेंट बॉक्स में ‘हर-हर महादेव’ लिखना न भूलें।